आर्थिक महाशक्ति बनने के बाद भी चीन क्यों नहीं बन पाएगा दुनिया का सुपर पावर? जानें वजह

नई दिल्ली, 17 नवंबर: चीन दुनिया की महाशक्ति माने जाने वाले अमेरिका को अमेरिका को पीछे छोड़ दुनिया का सबसे अमीर देश बन गया है। मैनेजमेंट कंसल्टेंट मैकिन्जे एंड कंपनी की रिसर्च ब्रांच की रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले 20 साल में दुनिया की संपत्ति 3 गुना बढ़ी है। साल 2000 में दुनिया की कुल संपत्ति 156 खरब डॉलर थी, जो साल 2020 के बाद बढ़कर 514 खरब डॉलर हो गई। चीन एक नई महाशक्ति के रूप में उभर रहा है और वैश्विक शक्ति संरचना से अमेरिका की जगह ले रहा है। लेकिन इस सबसे बावजूद एक सवाल हर किसी के मन में है कि, चीन सबसे अमीर देश बनने के बाद भी दुनिया का सुपर पावर क्यों नहीं बन सका।

चीन 2028 तक दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था अमेरिका को को पछाड़ देगा

चीन 2028 तक दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था अमेरिका को को पछाड़ देगा

इसमें कोई संदेह नहीं है कि चीन पहले ही आर्थिक रूप से वैश्विक महाशक्ति बन चुका है। चीन 2028 तक दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था अमेरिका को को पछाड़ देगा। चीन जल्द से जल्द अमेरिका से बेहतर आर्थिक और सैन्य ताकत हासिल कर रहा है,लेकिन चीन अभी भी कई मामलों में अमेरिका से पीछे है। अब सवाल यह है कि क्या कम्युनिस्ट पार्टी के नेतृत्व वाला चीन कभी भी उतना ही दुर्जेय और पूर्ण महाशक्ति हो सकता है जितना कि पिछले आठ दशकों से अमेरिका रहा है?

भू-राजनीतिक और सांस्कृतिक चुनौतियां

भू-राजनीतिक और सांस्कृतिक चुनौतियां

सोवियत संघ की तरह, चीन भी कई भू-राजनीतिक और सांस्कृतिक चुनौतियों का सामना कर रहा है। चीन को दुनिया भर में अमेरिका की तरह सम्मान और मान्यता मिलना बेहद ही मुश्किल है। भले ही उसकी आर्थिक और सैन्य शक्ति अमेरिका से आगे निकल जाए। एक लोकतांत्रिक अमेरिका में हमेशा एक कम्युनिस्ट चीन की तुलना में वैचारिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक श्रेष्ठता होगी। चीन भले ही आर्थिक मोर्चे पर बेहरीन प्रदर्शन कर रहा है लेकिन एक दलीय राजनीतिक व्यवस्था और देश में मानवाधिकार मूल्यों की उल्लंघन जैसे मुद्दे उसकी छवि को खराब कर रहे हैं।

चीन के सामने उसके पड़ोसी भी एक बड़ी समस्या हैं

चीन के सामने उसके पड़ोसी भी एक बड़ी समस्या हैं

चीन के सामने उसके पड़ोसी भी एक बड़ी समस्या हैं। एशिया की भू-राजनीति चीन के पक्ष में नहीं है जिसकी एक वजह अमेरिका भी है। अमेरिका के विपरीत, चीन कई शक्तिशाली और प्रतिस्पर्धी देशों से घिरा हुआ है। उनमें से कम से कम दो रूस और भारत, महाशक्ति बनने का सपना देखते हैं। चीन ने उनके खिलाफ युद्ध भी लड़े हैं और कई सीमा विवाद बने हुए हैं। चीन अपने पड़ोस में न तो सुरक्षित है और न ही दुनिया के अन्य हिस्सों में स्वतंत्र रूप से राजनीतिक और सैन्य से शामिल हो सकता है, जैसा कि अमेरिका करता है। चीन को जापान और कोरिया जैसे विकसित देशों से भी कड़ी प्रतिस्पर्धा मिलती है।

चीन के पास अमेरिका जैसे ताकतवर सहयोगी नहीं हैं

चीन के पास अमेरिका जैसे ताकतवर सहयोगी नहीं हैं

इसके अलावा चीन के पास कोई भी ताकतवर और भरोसेमंद सहयोगी नहीं है। जैसा कि शीत युद्ध में अमेरिका के पास थे। मेरिका ने शीत युद्ध के दिनों से ब्रिटेन, जर्मनी, जापान और ऑस्ट्रेलिया जैसे कई क्षेत्रीय रूप से शक्तिशाली देशों के साथ मजबूत राजनीतिक और सैन्य सहयोग स्थापित किया है। वहीं एशिया में भारत, जापान, कोरिया और कई अन्य देशों के साथ अमेरिका के अच्छे संबंध हैं। दूसरी ओर दुनिया में चीन का एकमात्र महत्वपूर्ण सहयोगी रूस है, लेकिन यह गठबंधन कई विरोधाभासों से ग्रस्त है। ऐसे में यह मानना बेमानी है कि, चीन भविष्य में अमेरिका और उसके सहयोगियों की संयुक्त सेनाओं की तुलना में सैन्य, आर्थिक और राजनीतिक रूप से बढ़त हासिल करेगा।

आंतरिक कलह से जूझ रहा है चीन

आंतरिक कलह से जूझ रहा है चीन

चीन की अपने ही अधीन कुछ स्टेट्स के साथ तनातनी चल रही है। हांगकांग कभी ब्रिटेन के अधीन था। उसी ने स्वायत्तता की शर्त पर चीन को हांगकांग सौंपा था। चीन ने वहां राष्ट्रीय सुरक्षा कानून लागू करना चाहा, लेकिन अमरीका और पश्चिमी देशों ने इसका विरोध किया। चीन द्वारा लाए जा रहे नए कानून के विरोध में स्थानीय लोग भी प्रदर्शन कर रहे हैं। यही हाल कुछ ताईवान का भी है। चीन ताइवान को अपने से अलग हुए हिस्से से रूप में देखता है। जबकि ताइवान की एक बड़ी आबादी अपने आपको एक अलग देश के रूप में देखती है। जिसके चलते दोनों देशों के बीच काफी समय से विवाद चल रहा है।

अमेरिका अप्रवासियों का देश है

अमेरिका अप्रवासियों का देश है

इसके अलावा अमेरिका वैश्विक सांस्कृतिक महाशक्ति रहा है और रहेगा। इस बात की संभावना बेहद ही कम है कि चीन इस क्षेत्र में अमेरिका को चुनौती पेश कर पाएगा। उसका लोकतंत्र और स्वतंत्रता न केवल अमेरिका को वैचारिक श्रेष्ठता प्रदान करता है, बल्कि फिल्मों, मीडिया, संगीत और साहित्य के माध्यम से उसका सांस्कृतिक प्रभाव भी दुनिया भर में फैला हुआ है। अमेरिका अप्रवासियों का देश है, और यह दुनिया की संस्कृतियों और विचारों का प्रतिनिधित्व करता है और समृद्ध बनाता है। लेकिन चीन लंबे समय से बंद देश बना हुआ है। जबकि अंग्रेजी दुनिया की भाषा बनी हुई है, यह कल्पना करना लगभग असंभव है कि मेडेरियन उस स्थान पर ले पाएगी।

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