कौन है शाहिद महमूद, जिसे UN में चीन ने अंतर्राष्ट्रीय आतंकवादी की लिस्ट में शामिल होने से बचा लिया?
चीन इससे पहले भी आतंकवादियों को संयुक्त राष्ट्र में बचाता आया है और इसी साल जून में चीन ने भारत और अमेरिका द्वारा पाकिस्तान स्थित आतंकवादी अब्दुल रहमान मक्की को भी बचाया था।
Shahid Mahmood China United Nations: चीन ने लश्कर-ए-तैयबा (एलईटी) के आतंकवादी शाहिद महमूद को वैश्विक आतंकवादी के रूप में सूचीबद्ध करने के लिए संयुक्त राष्ट्र में भारत और अमेरिका के संयुक्त प्रस्ताव को रोक दिया है। पिछले चार महीनों में ये चौथी बार है, जब बीजिंग ने संयुक्त राष्ट्र में पाकिस्तान स्थित आतंकवादियों को ब्लैकलिस्ट करने की कोशिशों को रोक दिया है। ताजा कदम ऐसे समय में आया है, जब संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस भारत में हैं और 26/11 के मुंबई आतंकी हमले के पीड़ितों को श्रद्धांजलि दी है, जिसे लश्कर-ए-तैयबा ने अंजाम दिया था। भारत और अमेरिका ने संयुक्त तौर पर प्रस्ताव दिया था, कि 42 वर्षीय महमूद को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की 1267 अल कायदा प्रतिबंध समिति के तहत वैश्विक आतंकवादी के रूप में नामित किया जाए।

कौन है शाहिद महमूद?
अमेरिकी ट्रेजरी विभाग के मुताबिक, जिसने शाहिद महमूद को 2016 में एक विशेष रूप से नामित वैश्विक आतंकवादी (एसडीजीटी) के रूप में नामित किया था, वह कराची में स्थित लश्कर का एक वरिष्ठ सदस्य है, और इस आतंकवादी संगठन से इसके ताल्लुकात साल 2007 से हैं। ट्रेजरी विभाग के मुताबिक, "कम से कम जून 2015 से जून 2016 तक, महमूद ने फलाह-ए-इंसानियत फाउंडेशन (FIF) के उपाध्यक्ष के रूप में काम किया, जो लश्कर-ए-तैयबा का एक धन उगाहने वाली शाखा है। साल 2014 में महमूद कराची में एफआईएफ का नेता था और अगस्त 2013 में महमूद की पहचान लश्कर की प्रकाशन शाखा के सदस्य के रूप में हुई थी।

कई देशों की यात्रा कर चुका है शाहिद
महमूद लश्कर-ए-तैयबा की ओर से दूसरे देशों की यात्रा भी कर चुका है। रिपोर्ट के मुताबिक, "शाहिद महमूद कराची में एफआईएफ के प्रमुख के रूप में कामय करते समय, उसने लश्कर-ए-तैयबा की भर्ती को सुविधाजनक बनाने के उद्देश्य से एक बर्मी प्रवासी शिविर को धन वितरित करने के लिए बांग्लादेश की यात्रा की थी। अगस्त 2012 में महमूद, एफआईएफ के पाकिस्तान चैप्टर के प्रभारी के तौर पर बर्मा गया था, जहां उसने लश्कर-ए-तैयबा के प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व किया था और 2014 के मध्य में उसने सीरिया और तुर्की की यात्रा की थी और बाद में दोनों देशों में एफआईएफ प्रयासों का नेतृत्व करने के लिए उसे नियुक्त किया गया था। महमूद ने एफआईएफ की ओर से बांग्लादेश और गाजा की भी यात्रा की है। रिपोर्ट के मुताबिक, "लश्कर-ए-तैयबा की ऑपरेशन टीम के हिस्से के रूप में, महमूद की जिम्मेदारी के क्षेत्रों में सऊदी अरब और बांग्लादेश शामिल थे। इसके अतिरिक्त, अगस्त 2013 में शाहिद महमूद को बांग्लादेश और बर्मा में इस्लामी संगठनों के साथ गुप्त संबंध बनाने का निर्देश दिया गया था और साल 2011 के अंत तक शाहिद महमूद ने दावा किया था, कि लश्कर की प्राथमिक चिंता भारत और अमेरिका पर हमला होना चाहिए।

आतंकियों को संरक्षण देता चीन
चीन इससे पहले भी आतंकवादियों को संयुक्त राष्ट्र में बचाता आया है और इसी साल जून में चीन ने भारत और अमेरिका द्वारा पाकिस्तान स्थित आतंकवादी अब्दुल रहमान मक्की को 1267 अल-कायदा प्रतिबंध समिति के तहत ब्लैकलिस्ट करने के प्रस्ताव को रोक दिया था। उसके बाद फिर अगस्त महीने में उसने जैश-ए-मोहम्मद (JEM) के वरिष्ठ नेता अब्दुल रऊफ अजहर को ब्लैकलिस्ट करने के लिए अमेरिका और भारत के एक प्रस्ताव को रोक दिया था। वहीं, सितंबर महीने में चीन ने लश्कर-ए-तैयबा के आतंकवादी साजिद मीर को वैश्विक आतंकवादी के रूप में नामित करने के लिए अमेरिका और भारत द्वारा सह-समर्थित एक प्रस्ताव को फिर से ब्लॉक कर दिया था। मीर भारत के सबसे वांटेड आतंकवादियों में से एक है और 26/11 के मुंबई आतंकी हमलों में उसकी भूमिका के लिए अमेरिका ने उसके सिर पर 50 लाख अमेरिकी डॉलर का इनाम रखा हुआ है। वहीं, इस बार एफएटीएफ की बैठक से ठीक पहले भारत और अमेरिका ने इस पाकिस्तानी आतंकवादी के खिलाफ यूएन में प्रस्ताव पेश किया था।

FATF की ग्रे लिस्ट में है पाकिस्तान
आपको बता दें कि, FATF मनी लॉन्ड्रिंग, टेरर फाइनेंसिंग और वैश्विक वित्तीय नेटवर्क के लिए अन्य खतरों की निगरानी करने वाला एक अंतरराष्ट्रीय प्रहरी संगठन है, और पाकिस्तान को एफएटीएफ ने साल 2018 से ग्रे लिस्ट में रखा हुआ है। इस सूची से बाहर निकलने के लिए पाकिस्तान कड़ी मेहनत कर रहा है। एफएटीएफ के ग्रे लिस्ट में रहने से एक देश को कई तरह की अंतर्राष्ट्रीय मदद नहीं मिल पाती है। एफएटीएफ की ग्रे लिस्ट से बाहर निकलने के लिए पाकिस्तान को FATF ने उसके सामने जितनी भी शर्तें रखी हैं, उन्हें पूरा करना ही होगा। जिसमें आतंकवादियों पर कार्रवाई भी शामिल है। संयुक्त राष्ट्र में मक्की के प्रस्ताव को FATF की पूर्ण बैठक के दिन 17 जून को रोक दिया गया था। वहीं, रऊफ असगर को लेकर प्रस्ताव 17 अगस्त को आया, जब FATF की एक टीम पाकिस्तान जाने वाली थी। वहीं, एक और आतंकवादी साजिद मीर का प्रस्ताव 17 सितंबर को लाया गया था, जब FATF तुरंत पाकिस्तान से लौटा ही था और अब शाहिद के खिलाफ प्रस्ताव लाया गया है, जब आज से एफएटीएफ की बैठक शुरू हुई है।

1267 अल कायदा प्रतिबंध समिति क्या है?
ये समिति संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद का हिस्सा है और इसका काम आतंकवादियों के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों को लागू करना है। समान भूमिकाओं वाली अन्य दो समितियां काउंटर टेरेरिज्म कमेटी और सिक्योरिटी काउंसिल कमेटी भी हैं। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव 1267 के तहत अल-कायदा और तालिबान को आतंकवादी निकायों के रूप में नामित किया गया था और अल-कायदा समिति को 15 अक्टूबर, 1999 को अल-कायदा और तालिबान प्रतिबंध समिति के रूप में स्थापित किया गया था। 2011 में तालिबान के लिए एक अलग कमेटी बनाई गई थी। प्रस्ताव 1267 को संयुक्त राष्ट्र के चार्टर-4 के तहत अपनाया गया था।












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