कौन हैं मोहम्मद यूनुस? जिन्‍हें मुख्य सलाहकार बनाकर बांग्लादेश में नई अंतरिम सरकार बनाने की उठी मांग

Who is Muhammad Yunus: बांग्लादेश में शेख हसीना सरकार के तख्‍तापलट के बाद देश की कमान वहां की सेना ने संभाल ली है।। शेख हसीना के देश छोड़ भागते ही वहां पर हिंसा भड़क उठी है। सरकार गिरने के बाद उपद्रवी जगह-जगह लूटपाट और आगजनी कर रहे हैं। वहीं बांग्लदेश में सरकारी नौकरी में आरक्षण का विरोध प्रदर्शन कर रहे समन्वयकों ने नोबेल शांति पुरस्कार विजेता मोहम्मद यूनुस को मुख्य सलाहकार बनाकर एक नई अंतरिम सरकार बनाने की सलाह दी है। आइए जानते है कौन हैं मोहम्मद यूनुस?

Muhammad Yunus

बता दें मोहम्मद यूनुस को मुख्य सलाहकार नियुक्त करने की आंदोलनकारी छात्रों के समन्‍वयकों ने मांग मंगलवार की सुबह फेसबुक एक वीडियो जारी कर की। बांग्लादेश के सेना प्रमुख वकर-उज़-ज़मान मंगलवार को प्रदर्शनकारी नेताओं से मुलाकात भी करने वाले हैं।

कौन हैं मोहम्मद यूनुस?

मोहम्मद यूनुस एक प्रसिद्ध सामाजिक उद्यमी, बैंकर, अर्थशास्त्री और समाजसेवी हैं। 2006 में यूनुस को तब अन्‍तराष्‍ट्रीय ख्‍याति मिली जब उन्‍होंने ग्रामीण बैंक को माइक्रोक्रेडिट और माइक्रोफाइनेंस में उनके अभूतपूर्व काम के लिए नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित किया गया। 84 वर्षीय यूनुस के माइक्रोक्रेडिट ने गरीब लोगों, विशेषकर महिलाओं की मदद करने में अग्रणी भूमिका निभाई।

यूनुस को मिले हैं ये प्रतिष्ठित पुरस्कार

  • 2009 में यूनाइटेड स्टेट्स प्रेसिडेंशियल मेडल ऑफ़ फ़्रीडम और 2010 में कांग्रेसनल गोल्ड मेडल शामिल हैं।
  • 2011 में यूनुस सोशल बिजनेस-ग्लोबल इनिशिएटिव्स (YSB) के को-फाउंडर हैं, जो इनक्यूबेटर फ़ंड और सलाहकार सेवाओं के माध्यम से दुनिया भर में सामाजिक व्यवसायों को बढ़ावा देता है। YSB कंपनियों, सरकारों, फ़ाउंडेशन और NGO जैसे विभिन्न संगठनों के साथ सहयोग किया।
  • यूनुस ने 2012 से 2018 तक स्कॉटलैंड में ग्लासगो कैलेडोनियन विश्वविद्यालय के चांसलर के रूप में कार्य किया।
  • पहले चटगांव विश्वविद्यालय में अर्थशास्त्र के प्रोफेसर रहे युनूस ने ग्रामीण अमेरिका और ग्रामीण फाउंडेशन अहम भूमिका निभाई।
  • 1998 से 2021 तक, वह संयुक्त राष्ट्र फाउंडेशन के बोर्ड सदस्य रहते हुए विभिन्न पहलों में योगदान दिया।

कितने पढ़े-लिखें मोहम्‍मद यूनुस हैं

बांग्लादेश के चटगांव में 28 जून, 1940 में जन्‍में बांग्लादेश में ढाका विश्वविद्यालय में पढ़ाई करने के बाद वेंडरबिल्ट विश्वविद्यालय में अर्थशास्त्र की पढ़ाई के लिए फुलब्राइट छात्रवृत्ति मिली। इसी विवि से यूनूस ने 1969 में अपनी पीएचडी की उपाधि प्राप्त की।

युनूस ने इन प्रभावशाली पदों पर काम किया

युनूस ने अपना शैक्षणिक करियर मिडिल टेनेसी स्टेट यूनिवर्सिटी में अर्थशास्त्र के असिस्‍टेंट प्रोफेसर के तौर पर शुरू किया। चटगांव विश्वविद्यालय में अर्थशास्त्र विभाग का नेतृत्व करने के लिए बांग्लादेश लौट आए। यूनुस ने अपने पूरे करियर के दौरान कई प्रभावशाली पदों पर काम किया। महिलाओं पर चौथे विश्व सम्मेलन (1993-1995) के लिए अंतर्राष्ट्रीय सलाहकार समूह, महिला स्वास्थ्य पर वैश्विक आयोग और महिलाओं और वित्त पर संयुक्त राष्ट्र विशेषज्ञ समूह में सेवा करना शामिल है।

अकाल में लोगों के लिए खुदा बने युनूस

बता दें 1974 में बांग्लादेश में जब अकाल आया था तब यूनुस ने गरीब व्यक्तियों को छोटे व्यवसाय शुरू करने में मदद करने के लिए दीर्घकालिक ऋण देकर उनके लिए बड़ा बदलाव लाने का प्रयास किया था। ग्रामीण बैंक की स्थापना हुई और माइक्रोफाइनेंस का एक व्यापक आंदोलन शुरू हुआ। इनके इस प्रयास से असंख्‍य लोगों को गरीबी से उबारा।

मोहम्‍मद युनूस के पुरस्‍कार

विज्ञान के लिए मोहम्मद शबदीन पुरस्कार, विश्व खाद्य पुरस्कार, किंग हुसैन मानवतावादी नेतृत्व पुरस्कार, वोल्वो पर्यावरण पुरस्कार, क्षेत्रीय विकास के लिए निक्केई एशिया पुरस्कार, फ्रैंकलिन डी. रूजवेल्ट स्वतंत्रता पुरस्कार और सियोल शांति पुरस्कार जैसे पुरस्कारों से वैश्विक स्तर पर मान्यता मिली है।

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