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कौन हैं DRDO के वैज्ञानिक प्रदीप कुरुलकर, जिन्होंने पाकिस्तानी एजेंट को ब्रह्मोस का गोपनीय दस्तावेज ऑफर किया?

Pradeep Kurulkar: भारत में हथियार बनाने और हथियारों के निर्माण को लेकर रिसर्च करने वाली सरकारी एजेंसी डीआरडीओ (डिफेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट ऑर्गेनाइजेशन) के वैज्ञानिक प्रदीप कुरुलकर, जो जासूसी के आरोप में मई महीने में गिरफ्तार गिये गये थे और अभी तक कस्टडी में हैं, उनके बारे में खुलासा हुआ है, कि उन्होंने पाकिस्तानी एजेंट को ब्रह्मोस मिसाइल परियोजना से जुड़े अत्यंत गोपनीय दस्तावेज दिखाने का ऑफर दिया था।

महाराष्ट्र एटीएस ने खुलासा किया है, कि वैज्ञानिक प्रदीप कुरुलकर ने एक महिला पाकिस्तानी इंटेलिजेंस ऑपरेटिव (पीआईओ) को ब्रह्मोस मिसाइल परियोजना पर "अत्यधिक गोपनीय" रिपोर्ट दिखाने की पेशकश की थी।

Pradeep Kurulkar

महाराष्ट्र के आतंकवाद विरोधी दस्ते (एटीएस) के नेतृत्व में की गई एक जांच से पता चला है, कि वैज्ञानिक प्रदीप ने पाकिस्तानी ऑपरेटिव को कहा था, कि जब वह व्यक्तिगत रूप से उनसे मिलेगी, तो वो ब्रह्मोस से संबंधिक गोपनीय जानकारियां उसे देंगे।

उस पाकिस्तानी एजेंट ने खुद को ब्रिटने में रहने वाली भारतीय नागरिक "ज़ारा दासगुप्ता" बताई।

वहीं, एटीएस ने हनी ट्रैप के एक संदिग्ध मामले में जासूसी और महिला पीआईओ के साथ गलत कम्युनिकेश से संबंधित ऑफिशियल सीक्रेट एक्ट (ओएसए) की धाराओं के तहत 3 मई को कुरुलकर को गिरफ्तार कर लिया।

कौन हैं प्रदीप कुरुलकर?

59 साल के वैज्ञानिक प्रदीप, डीआरडीओ के अनुसंधान एवं विकास प्रतिष्ठान (इंजीनियर्स) यानि आर एंड डीई विंग के डायरेक्टर थे, जिन्होंने कई रणनीतिक रूप से संवेदनशील परियोजनाओं को संभाला है।

वैज्ञानिक प्रदीप ने जिन प्रोजेक्स को संभाला, उनमें सैन्य पुलों से लेकर ग्राउंड सिस्टम और करीब करीब सभी तरह के भारत के शस्त्रागार में मिसाइल लॉन्चर की रणनीतिक संपत्तियों के विकास में शामिल थे। वह इसी साल नवंबर में साइंटिस्ट एच यानि 'उत्कृष्ट वैज्ञानिक' रैंक के साथ रिटायर्ड होने वाले थे, जो डीआरडीओ के भीतर दूसरी सबसे ऊंची रैंक है।

मई में जब वैज्ञानिक प्रदीप को गिरफ्तार किया गया था, उस वक्त इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट में उनके साथ वैज्ञानिकों से बातचीत की गई थी, जिसमें वैज्ञानिक प्रदीप को लेकर उनके विचार जाने गये थे।

उनके साथ काम करने वाले वैज्ञानितों ने कहा था, कि वैज्ञानिक प्रदीप एक बेहतरीन और आखिरी वक्त कर संघर्ष करने वाले वैज्ञानिक थे और डीआरडीओ के अंदर वो एक 'टास्कमास्टर' थे, जो संघर्षों को सुलझाने में माहिर माने जाते थे।

सहयोगियों और उनके जूनियर्स का कहना था, कि वैज्ञानिक प्रदीप काफी बातचीत करने वाले बॉस थे, जिन्हें हर किसी से बात करना काफी पसंद था, हंसी मजाक पसंद था, जिन्हें किस्से-कहानियां सुनाना काफी पसंद था।

प्रदीप कुरुलकर ने 1985 में कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग पुणे से इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में स्नातक की उपाधि प्राप्त की और डीआरडीओ में शामिल होने से पहले, उन्होंने पुणे में एक निजी फर्म के साथ काम किया। उन्हें संगीत में भी गहरी रुचि है और वह सैक्सोफोन, बांसुरी, तबला और मृदंगम भी बजाते हैं।

उनके सहयोगियों के मुताबिक, वैज्ञानिक उन टीमों के प्रमुख सदस्य थे, जिन्होंने एंटी सैटेलाइट मिसाइल टेस्ट - मिशन शक्ति और परमाणु-सक्षम अग्नि सीरिज जैसी कई रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण परियोजनाओं पर काम किया था।

उनका सबसे बड़ा योगदान, यकीनन, आकाश मिसाइल के सफल डेवलपमेंट में था। सतह से हवा में मार करने वाली आकाश मिसाइल (एसएएम), भारतीय सेना और वायु सेना की वायु रक्षा क्षमताओं की एक प्रमुख संपत्ति है। कुरुलकर आकाश ग्राउंड सिस्टम के प्रोजेक्ट लीडर और टीम मैनेजर थे।

उनकी डीआरडीओ प्रोफ़ाइल, जिसे उनकी गिरफ्तारी के फौरन बाद हटा दिया गया था, उसमें कहा गया था, कि उन्होंने अन्य मिसाइल प्रणालियों पर भी काम किया, जिनमें मध्यम दूरी की एसएएम, निर्भय सबसोनिक क्रूज़ मिसाइल प्रणाली, प्रहार, क्विक रिएक्शन एसएएम और एक्स्ट्रा लंबी दूरी की एसएएम शामिल हैं।

गिरफ्तारी से कुछ ही दिन पहले, कुरुलकर को पुणे में आर्मामेंट कॉम्बैट इंजीनियरिंग क्लस्टर कार्यालय में ट्रांसफर कर दिया गया था, क्योंकि डीआरडीओ की सर्विलांस शाखा ने आंतरिक जांच की थी।

गिरफ्तारी के बाद से वैज्ञानिक को निलंबित कर दिया गया है।

प्रदीप कुरुलकर पर क्या हैं आरोप?

एटीएस के अनुसार, कुरुलकर से पीआईओ ज़ारा ने व्हाट्सएप पर संपर्क किया था और उसने उन्हें बताया था, कि वह यूके में स्थित एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर है। फिर उसने उन्हें कई अश्लील मैसेज भेजकर और अपनी आवाज में और वीडियो कॉल करके उन्हें लालच दिया और कुरुलकर ने 10 जून 2022 और 24 फरवरी, 2023 के बीच उसके साथ कई बार बातचीत की थी।

एटीएस ने आरोप लगाया है, कि ज़ारा भारत में विभिन्न डीआरडीओ और रक्षा परियोजनाओं के बारे में वैज्ञानिक से गोपनीय जानकारी निकालना चाहती थी। जैसे ही वैज्ञानिक प्रदीप, उसके हुस्न के जाल में फंसे, उस पाकिस्तानी एजेंट ने कथित तौर पर उनसे गोपनीय जानकारियों के बारे में पूछताछ करनी शुरू कर दी थी।

1837 पन्नों की है चार्जशीट

1,837 पन्नों की चार्जशीट में, महाराष्ट्र एटीएस ने यह भी आरोप लगाया, कि दोनों ने 19 अक्टूबर 2022 और 28 अक्टूबर 2022 के बीच ब्रह्मोस मिसाइल के बारे में बातचीत की थी।

इस बातचीत में पाकिस्तानी एजेंट जारा पूछती है, कि "क्या ब्रह्मोस मिसाइल आपका आविष्कार था बेब.. जो सबसे खतरनाक है"।

उसपर, कुरुलकर जवाब देते हैं, कि "मेरे पास सभी ब्रह्मोस वेरिएंट्स पर लगभग 186 ए4 आकार की प्रारंभिक डिज़ाइन रिपोर्ट है।" और बाद में कुरुलकर ने कथित तौर पर उनसे कहा, "मैं उस रिपोर्ट की प्रति वाट्सएप और ईमेल से नहीं भेज सकता, यह अत्यधिक वर्गीकृत है... मैं इन दस्तावेजों को ट्रैक करूंगा औऱ इसे तैयार रखूंगा। जब आप यहां होंगी, तो कोशिश करूंगा और आपको यहां दिखाऊंगा।"

ब्रह्मोस के अलावा, कुरुलकर और ज़ारा ने डीआरडीओ के "अग्नि 6, रुस्तम (मध्यम ऊंचाई वाले लंबे समय तक चलने वाले मानव रहित वायु वाहन), सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइलें (एसएएम), मानव रहित लड़ाकू वायु वाहन (यूसीएवी), ड्रोन परियोजनाओं" पर व्हाट्सएप चैट की थी।

चार्जशीट में कहा गया है, कि दोनों के बीच "क्वाडकॉप्टर, डीआरडीओ ड्यूटी चार्ट, उल्का मिसाइल, राफेल, आकाश और एस्ट्रा मिसाइल" पर चैट भी शामिल है।

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