नित्यानंद का कहां है 'कैलासा'? क्या ये एक मान्यता प्राप्त देश है
भगोड़े तांत्रिक नित्यानंद ने लगभग तीन साल पहले अपना कैलासा देश बनाने का दावा किया था। वहीं संयुक्त राष्ट्र की बैठक में अब जब कैलासा के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया तो ये एक बार फिर सुर्खियों में आ चुका है।

भगोड़ा नित्यानंद का देश कैलासा इन दिनों एक बार फिर चर्चा में हैं। इसकी वजह है कि विवादास्पद तांत्रिक नित्यानंद के तथाकथित देश कैलासा। नित्यांनंद के 'यूनाइटेड स्टेट्स ऑफ कैलासा' (USK)के प्रतिनिधियों ने फरवरी महीने में पिछले महीने संयुक्त राष्ट्र की बैठक में हिस्सा लिया और जमकर सुर्खियां बटोरी। दुनिया भर के लोग ये जानने के लिए ये उत्सुक नजर आए कि नित्यानंद का ये काल्पनिक देश कहा है? आइए जानते हैं कहां है नित्यानंद का कैलासा और क्या इस उसका देश एक मान्यता प्राप्त देश है?

भागने के एक साल बाद अपना देश बनाने का किया था वादा
याद रहे अहमदाबाद में नित्यानंद का आश्रम था वो बलात्कार और अपहरण का आरोप में 2019 में भारत छोड़कर विदेश भाग गया था। इसके एक साल बाद अपना देश स्थापित करने के दावे के साथ दुनिया के सामने आया। उसने अमेरिका के नजदीक 'रिपब्लिक ऑफ कैलासा' नाम का अपना अलग द्वीप बसाने का दावा किया था।

सोशल मीडिया पर कैलासा के डेवलेपमेंट के वीडियो शेयर होते हैं
नित्यानंद के सोशल मीडिया पर फॉलोअर्स हैं जो वर्चुअली नजर आते हैं। इतना ही नहीं वो नित्यानंद के अपने देश में हो रहे विकास पर अपडेट पोस्ट करते रहते हैं। सोशल मीडिया पर प्रतिनिधि नियमित रूप से दुनिया भर के राजनयिकों के साथ अपनी बातचीत के वीडियो और तस्वीरें पोस्ट करते हैं। सोशल मीडिया पर प्रतिनिधि नियमित रूप से दुनिया भर के राजनयिकों के साथ अपनी बातचीत के वीडियो और तस्वीरें पोस्ट करते हैं।

कैलाश कहां है?
रिर्पोट के मुताबिक नित्यानंद ने इक्वाडोर के तट पर एक द्वीप खरीदा और उसी द्वीप पर अपना कैलासा देश बसाया है। हालांकि, इक्वाडोर की सरकार ने उस वक्त बीबीसी को बताया था कि नित्यानंद देश में नहीं है। उसने कैलाश' का नाम कैलाश पर्वत के नाम पर रखा गया है, जो हिंदुओं धर्म में पवित्र माना जाता है।

कैलासा देश क्यों स्थापित किया गया और कैसे करता है काम
स्वयंभू स्वामी नित्यानंद का काल्पनिक देश कैलासा की वेबसाइट के अनुसार 'कैलासा' एक मूवमेंट है जिसकी स्थापना कनाडा, संयुक्त राज्य अमेरिका और अन्य देशों के हिंदू आदि शैव अल्पसंख्यक समुदाय के सदस्यों द्वारा की गई है और यह सभी के लिए एक सुरक्षित सेल्टर देता है। नस्ल, लिंग, पंथ, जाति या पंथ के बावजूद दुनिया के अभ्यास, आकांक्षी या सताए गए हिंदू, जहां वे शांतिपूर्वक रह सकते हैं और अपनी आध्यात्मिकता, कला और संस्कृति को अपमान, हस्तक्षेप और हिंसा से मुक्त व्यक्त कर सकते हैं।

ई-नागरिकता और ई-वीजा के लिए मांगी है अप्लीकेशन
नित्यानंद के देश यूएसके के ट्विटर हैंडल ने गुरुवार को ई-नागरिकता के लिए ई-वीजा के लिए अप्लीकेशन मांगी। नित्यानंद USK एक ध्वज, एक संविधान, एक आर्थिक प्रणाली, एक पासपोर्ट और एक प्रतीक भी होने का दावा करता है। वेबसाइट के अनुसार अन्य देशों की तरह 'कैलाश' में भी ट्रेजरी, कॉमर्स, सॉवरेन, हाउसिंग, ह्यूमन सर्विसेज जैसे कई विभाग हैं। 'कैलाश' खुद को "अंतर्राष्ट्रीय हिंदू डायस्पोरा के लिए घर और शरण" कहता है।

क्या 'कैलाश' एक मान्यता प्राप्त देश है
नित्यानंद का कैलासा एक ऐसी जगह है जहां नित्यानंद और उसके लोग रहते हैं। इस काल्पनिक देश में जो कार्यक्रम होते हैं उसके बारे में ये वो पोस्ट करते रहते हैं और अधिकारियों और सरकारों के साथ बैठकें दिखाने का दावा किया हालांकि संयुक्त राष्ट्र संघ ने 'कैलाश' को मान्यता नहीं दी है।

कैसे मिलती है देश की मान्यता
1933 के मोंटेवीडियो सम्मेलन के अनुसार जिसे प्रथागत अंतरराष्ट्रीय कानून के हिस्से के रूप में स्वीकार किया गया है एक ऐसे क्षेत्र को देश तभी माना जाएगा जब इसमें एक स्थायी आबादी, एक सरकार और अन्य देशों के साथ संबंध रखने की क्षमता होनी चाहिए। एक बार संयुक्त राष्ट्र द्वारा देश की मान्यता प्राप्त होने के बाद एक देश को कई अंतरराष्ट्रीय मंचों जैसें विश्व बैंक और अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) के लिए रास्ते खुल जाते हैं।

कैलासा देश नहीं तो क्या है?
यदि कैलासा जैसे किसी क्षेत्र ने देश की दर्जा हासिल नहीं किया है तो ऐसा देश सूक्ष्म राष्ट्र कहा जा सकता है। एनसाइक्लोपीडिया ब्रिटानिका में दी गई जानकारी के अनुसार एक सूक्ष्म राष्ट्र स्व-घोषित संस्थाएं हैं जो स्वतंत्र संप्रभु राज्य होने का दावा करती हैं लेकिन अंतर्राष्ट्रीय समुदाय या संयुक्त राष्ट्र द्वारा मान्यता प्राप्त नहीं हैं।

देश के प्रतिनिधियों को संयुक्त राष्ट्र में भेजा
हालांकि स्वंभू स्वामी नित्यानंद अंतर्राष्ट्रीय मंच पर अपने देश कैलासा को स्वीकृति दिलाने के लिए अपने देश के प्रतिनिधियों को संयुक्त राष्ट्र में भेजा। यूनाइटेड स्टेट ऑफ कैलासा की तथाकथित स्थायी राजदूत और भगोड़े नित्यानंद की शिष्या विजयप्रिया भी शामिल थीं लेकिन यूएन ने विजयप्रिया नित्यानंद द्वारा की गई प्रस्तुतियों को "अप्रासंगिक" बताते हुए फटकार लगाई और कहा इस पर विचार नहीं किया जाएगा।
नोट- फोटो KAILASA's SPH Nithyananda फेसबुक पेज के सौजन्य से
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