जब भीड़ में भी होता है अकेलेपन का एहसास

अकेलापन
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इस साल वेलेंटाइन के दिन बीबीसी ने अकेलेपन पर एक प्रयोग किया था- लोनलीनेस एक्सपेरीमेंट.

दुनियाभर के 55,000 लोग इसके लिए किए गए सर्वे में शामिल हुए. अकेलेपन पर किया जाने वाला अब तक का ये सबसे बड़ा सर्वे है.

क्लाउडिया हैमंड ने इस प्रोजेक्ट के निष्कर्षों पर ध्यान दिया और अकेलेपन पर अपने अनुभवों के बारे में तीन लोगों से बात की.

''अकेलेपन का एहसास एकदम शून्य की तरह होता है. आपके पास अच्छी या बुरी ख़बर है लेकिन आप इसे किसी से बता पाएं, ऐसा कोई नहीं है. तो इस तरह के लोगों की कमी जीवन को मुश्किल बना सकती है.''

33 साल की मिशेल लॉयड लंदन में रहती हैं. उसका स्वभाव बहुत ही दोस्ताना और बातूनी है और वे अपने काम को बहुत इंज्वॉय करती हैं. उन्हें लगता है कि उनके पास सब है पर फिर भी उन्हें अकेलापन महसूस होता है.

वे अलग-अलग शहरों में कुछ समय के लिए रही हैं इसलिए उनके दोस्त देश में चारों तरफ़ फैले हैं और उन्हें ये भी लगता है कि वे सब अपने बच्चों के साथ सप्ताहांत में व्यस्त हैं. वे बताती है कि ऑफ़िस के बाद वो अपने सहकर्मियों के साथ बाहर खाने-पीने जाती है पर फिर भी वे उनके साथ गहरे रिश्तें नहीं बना पाती हैं.

''मैं बहुत ही बातूनी हूं, मैं किसी से भी बात कर सकती हूं पर इसका मतलब ये नहीं कि हमारा रिश्ता ज़्यादा समय तक चले. मुझे हमेशा अकेलापन लगता है. किशोरावस्था में थी तो किसी ग्रुप के साथ होने के बावजूद मुझे अकेलापन लगता था लेकिन पिछले पांच सालों से ये और भी अधिक बढ़ गया है.''

मिशेल लॉयड
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अकेलापन के कारण मिशेल को अवसाद और चिंता होती थी क्योंकि उन्हें अपने नकारात्मक भाव बताने में मुश्किल होती थी.

ऐसे ही बहुत से कारण हैं जो अकेलेपन का कारण बन सकते हैं. लेकिन बीबीसी के सर्वे में युवाओं के बीच इससे भी अधिक ज़्यादा गंभीर कारण मिले और ये पैटर्न हर शहर में एक-सा देखा गया.

मिशेल ने अपनी दिमाग़ी हालत और अकेलेपन के लिए जो महसूस किया वो बता दिया, यहां तक कि उन्होंने इस पर ब्लॉग भी लिखा. लेकिन ऐसा सब नहीं कर पाते.

सर्वे के अनुसार युवा अपने अकेलेपन के बारे में बुज़ुर्गों से ज़्यादा अधिक दूसरों को बता पाते हैं. लेकिन कई युवाओं को आज भी अपने अकेलेपन के बारे में बताने में शर्म आती है.

ग्राफ़
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क्या बुज़ुर्गों को इस तरह का अनुभव बताने में डर लगता है या इससे निकलने के लिए उनके पास कोई और तरीका है?

अध्ययन के दौरान जब बुज़ुर्गों से पूछा गया कि उन्हें भी अकेलापन लगता है तो उन्होंने कहा कि उन्हें ये युवा अवस्था में अधिक लगता था.

युवाओं को अकेलापन महसूस होने के उनके पास कई कारण थे. 16 से 24 साल के बीच वाले युवाओं को अकेलापन इसलिए लगता है क्योंकि इस उम्र में वो घर से बाहर अपनी पहचान बनाने और नये दोस्त बनाने के लिए निकलते हैं.


बीबीसी का प्रयोग

फरवरी 2018 में बीबीसी लोनलीनेस एक्सपेरीमेंट बीबीसी रेडियो4 पर वेलकम कलेक्शन के साथ लॉन्च किया गया था. अकेलेपन पर शोध करने के लिए तीन शैक्षिक संस्थान की मदद से ऑनलाइन सर्वे शुरू किया गया था.


विश्वास न कर पाना!

हालांकि 41 प्रतिशत लोगों का मानना है कि अकेलेपन का अनुभव कई बार सकारात्मक भी हो सकते हैं.

अकेलेपन के स्वास्थ्य और रहन-सहन पर गंभीर प्रभाव पड़ सकते हैं. लोगों के बीच अकेलेपन को लेकर कई मतभेद थे. कुछ को हमेशा अकेलापन लगता था तो किसी को कभी-कभी. लेकिन दोनों ही सूरतों में दूसरों पर विश्वास करने का स्तर बहुत ही कम था.

अकेलेपन और अकेले कुछ समय बिताने के बीच रिश्ता थोड़ा जटिल सा है- शोध में 83 प्रतिशत लोगों ने कहा कि उन्हें ख़ुद में रहना पसंद है. एक तिहाई ने कहा कि अकेला रहने पर ही उन्हें अकेलेपन का एहसास होता है.

जैक किंग
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जैक किंग

96 साल के जैक किंग ने बताया कि वे अपने खाली समय में व्यस्त रहना पसंद करते हैं. 2010 में ही उनकी पत्नी उन्हें छोड़ कर चले गई थी. लेकिन वे अपने खाली समय में फ़िल्में देखते हैं, किताबें पढ़ते हैं , चित्रकारी करते हैं आदि.

सर्वे में ये भी पाया गया है कि जिन लोगों के साथ किसी भी तरह का भेदभाव होता है उन्हें भी अकेलापन काफ़ी महसूस होता है.

मेगन
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मेगन

26 साल की मेगन देख नहीं सकती. उन्हें सोशल रहना बहुत पसंद है. लेकिन स्कूल से अब तक उन्हें कई बार अकेलापन लगता आया है.

उन्होंने अकेलेपन का अनुभव अपने ब्लॉग में भी लिखा है.


दुनियाभर के लोगों को लगता है अकेलापन

  • अलग-अलग देशों, द्वीपों और क्षेत्रों के 237 लोग सर्वे में शामिल हुए
  • आपकी संस्कृति का अकेलेपन को प्रभावित करती है
  • उत्तरी यूरोप और अमरीका जैसे स्वतंत्रत देश के लोगों ने भी माना कि वे अपने अकेलेपन के बारे में अपने सहयोगी को नहीं बता पाते हैं
  • इन जगहों पर अकेलेपन की रोकथाम के लिए पार्टनर के साथ संबंध काफ़ी महत्वपूर्ण होते हैं
  • जिन जगहों पर विस्तृत परिवार पर ज़ोर दिया जाता है वहां पर बुज़ुर्ग ख़ासकर महिलाएं कम अकेलापन महसूस करती हैं

अकेलेपन से निकलने के लिए क्या करना चाहिए?

पहले, अपने समय को सही जगह इस्तेमाल करें और जो आपको पसंद हो वो करें.

दूसरा, सोशल क्लब ज्वाइन कर लेना चाहिए. हालांकि ये उन सुझावों में से एक है जो अक्सर लोग देते हैं लेकिन इससे कोई मदद नहीं हो पाती. यदि आप अलग-थलग महसूस करते हैं तो क्लब ज्वाइन किया जा सकता है लेकिन अगर आप भीड़ में भी वैसा ही महसूस करते हैं तो ज़्यादा अच्छा होगा कि दूसरे लोगों पर विश्वास किया जाए.

तीसरा, अपनी सोच को सकारात्मक बनाएं लेकिन ये जितनी आसानी से कहा जा सकता है उतनी आसानी हो नहीं पाता.

आख़िर में, दोस्तों या परिवार के लोगों से, आप जो भी महसूस करते हैं उस पर बात करनी चाहिए. और कोशिश करनी चाहिए कि हर किसी में कुछ अच्छा और साकारात्मक देखें.

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