पीएम मोदी को व्यक्तिगत रूप से पुतिन का क्या संदेश देना चाहते हैं रूसी विदेश मंत्री?
नई दिल्ली, 1 अप्रैल: विदेश मंत्री एस जयशंकर और उनके रूसी समकक्ष सर्गेई लावरोव के बीच शुक्रवार को नई दिल्ली में तमाम अंतरराष्ट्रीय दबावों के बीच बातचीत हुई है। इस दबाव में अमेरिका की वह चेतावनी भी शामिल है, जिसमें उसने रूस से तेल आयात बढ़ाने पर 'गंभीर नतीजों' की ओर इशारा किया है। दोनों विदेश मंत्रियों के बीच यह बातचीत इन संभावनाओं के बीच हुई है कि भारत, रूस से ज्यादा मात्रा में रियाती कीमत पर तेल खरीदेगा और साथ ही दोनों देश द्विपक्षीय व्यापार में रूबल-रुपया व्यवस्था को अपनाने के हिमायती हैं। इस बीच रूसी विदेश मंत्री लावरोव ने कहा है कि वह रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन का 'संदेश व्यक्तिगत रूप' प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को उनसे मिलकर देना चाहते हैं।

पीएम मोदी को व्यक्तिगत रूप से दूंगा राष्ट्रपति पुतिन का संदेश-सर्गेई लावरोव
रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने कहा है कि कई तरह की कठिनाइयों के बावजूद भारत और रूस का संबंध मजबूत है। उन्होंने कहा है कि 'राष्ट्रपति (पुतिन) और प्रधानमंत्री एक-दूसरे के लगातार संपर्क में हैं और मैं अपनी वार्ता के बारे में राष्ट्रपति को रिपोर्ट दूंगा। वैसे उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी के लिए अपनी शुभकामनाएं भेजी हैं और मैं इस संदेश को व्यक्तिगत रूप से उनतक पहुंचाने का अवसर चाहूंगा।' उन्होंने ये भी कहा है कि 'हम उस संतुलन को खोजने में सक्षम रहे हैं, जो हमारे रिश्ते को टिकाऊ बनाता है। हमारी बैठकें अच्छी रही हैं और 2+2 वार्ता भी। जहां तक मैं समझता हूं, हम ऊर्जा, विज्ञान, फार्मास्यूटिकल्स के क्षेत्रों में प्रोजेक्ट को लागू करना जारी रखेंगे, क्योंकि हमें कोविड से लड़ने का भी प्रबंध करना है। आपको यूक्रेन पर हमारी स्थिति पता है, हम कुछ भी छिपाते नहीं हैं और आपको भी हमारी स्थिति को संपूर्ण रूप से देखना चाहिए, न कि एक-तरफा तरीके से। '

'भारत इस स्थिति को पूर्णता से ले रहा है'
आगे उन्होंने यह भी कहा है कि 'हम एक संतुलित वैश्विक व्यवस्था में दिलचस्पी रखते हैं, जो इसे सतत बनाता है। इन दिनों हमारे पश्चिमी सहयोगी यूक्रेन में संकट के लिए किसी भी सार्थक अंतरराष्ट्रीय मसले को कमतर करना चाहते हैं.....हम किसी चीज के लिए लड़ते नहीं और हमने इस बात की सराहना की कि भारत इस स्थिति को पूर्णता से ले रहा है, न कि केवल एक-तरफा तरीके से।' अपने शुरुआती टिप्पणी में विदेश मंत्री जयशंकर ने कहा, 'हमारे संबंध बहुत विकसित हैं और महामारी के अलावा यह बैठक बहुत मुश्किल माहौल में हो रही है।' उन्होंने कहा कि भारत हमेशा से मतभेदों और विवादों को बातचीत और कूटनीति के जरिए हल करने का पक्षधर रहा है।

यूक्रेन संकट पर पीएम मोदी पुतिन से तीन बार कर चुके हैं बात
भारत अबतक यूक्रेन पर रूस के हमले की खुलकर आलोचना करने से बचता रहा है और रूस की निंदा करने वाले प्रस्तावों पर भी संयुक्त राष्ट्र में वोटिंग करने से अनुपस्थित रहा है। लेकिन, पिछले हफ्ते रूस ने यूक्रेन में मानवीय संकट पर जो प्रस्ताव पेश किया था, भारत उससे भी अनुपस्थित रहा, जिसे भारत के पहले वाले रुख में थोड़ा सा बदलाव के रूप में देखा गया। भारत इस संकट के समाधान के लिए कूटनीति और बातचीत पर जोर देता रहा है। प्रधानमंत्री मोदी 24 फरवरी, 2 मार्च और 7 मार्च को इसपर पुतिन से फोन पर भी बात कर चुके हैं।












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