मालदीव के राष्ट्रपति मोहम्मद मोइज्जू कैसे भारत से तोड़ रहे संबंध, तुर्की के बाद चीन की दौरा, कितना बड़ा झटका?
India-Maldives Tie: प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी की लक्षद्वीप यात्रा के बाद मालदीव की युवा सशक्तिकरण उप मंत्री मरियम शिउना के एक ट्वीट ने सोशल मीडिया पर बड़े पैमाने पर प्रतिक्रिया शुरू कर दी है, जिसमें अभिनेता अक्षय कुमार और पूर्व क्रिकेटर आकाश चोपड़ा, समेत सुपरस्टार सलमान खान सहित कई भारतीय हस्तियां मालदीव के बहिष्कार के आह्वान में शामिल हो गईं।
मालदीव के पूर्व राष्ट्रपति मोहम्मद नशीद ने राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू से सरकार को ऐसी टिप्पणियों से दूर रखने का आग्रह किया है, जिसके बाद मालदीव सरकार ने रविवार को शिउना द्वारा मोदी के खिलाफ की गई अपमानजनक टिप्पणियों से खुद को दूर कर लिया।

उन्होंने कहा, कि भारत ने मालदीव की सुरक्षा और समृद्धि में "महत्वपूर्ण" योगदान दिया है और मोहम्मद मोइज्जू से नई दिल्ली को आश्वासन देने के लिए कहा, कि मंत्री की टिप्पणियां सरकार की नीति को प्रतिबिंबित नहीं करती हैं।
मोहम्मद मोइज्जू कैसे तोड़ रहे भारत से संबंध?
मोहम्मद मोइज्जू, जिन्होंने पिछले साल नवंबर में लक्जरी रिसॉर्ट्स से युक्त सौ से ज्यादा द्वीपों से बने हिंद महासागर में बसे मालदीव के राष्ट्रपति के रूप में पदभार संभाला था, उन्होंने देश में लगभग 75 भारतीय सैन्य कर्मियों की एक छोटी टुकड़ी को हटाने और मालदीव की "भारत-प्रथम" नीति में परिवर्तन लाने की चुनावी प्रतिज्ञा जारी की थी।
मोहम्मद मोइज्जू से पहले जो भी मालदीव के सर्वोच्च पद क पहुंचा है, उन्होंने अपना पहला दौरा भारत का किया है, लेकिन मोइज्जू ने भारत से पहले तुर्की का दौरा किया और अब वो चीन की यात्रा करने जा रहे हैं।
चीनी विदेश मंत्रालय ने एक बयान में कहा, कि मोइज्जू सोमवार 8 जनवरी को चीन का दौरा करने वाले हैं। चीन के विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता हुआ चुनयिंग ने शुक्रवार को कहा, कि चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने उन्हें आमंत्रित किया है।
गुरुवार को राष्ट्रपति मोइज्जू के चीन की राजकीय यात्रा करने की चर्चा के बारे में टिप्पणी करने के लिए पूछे जाने पर, नई दिल्ली ने कहा, कि मामला उसके हाथ से बाहर है।
भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जयसवाल ने कहा, कि "यह उन्हें (मालदीव के राष्ट्रपति) तय करना है कि वे कहां जाते हैं और अपने अंतरराष्ट्रीय संबंधों के बारे में कैसे आगे बढ़ते हैं।'' उन्होंने कहा, कि द्वीपों से भारतीय सैन्यकर्मियों को हटाने के बारे में उनके पास कोई अपडेट नहीं है।
जबकि, नई दिल्ली और बीजिंग दोनों इस क्षेत्र में प्रभाव के लिए प्रतिस्पर्धा कर रहे हैं, मोहम्मद मोइज्जू की सरकार को चीन की ओर झुका हुआ माना जाता है।
नवीनतम अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) के आंकड़ों के अनुसार, मालदीव पर चीन का लगभग 1.3 अरब डॉलर का बकाया है। चीन मालदीव का सबसे बड़ा बाहरी ऋणदाता है, जिसका उसके कुल सार्वजनिक ऋण में लगभग 20 प्रतिशत योगदान है।
मैरीटाइम पॉलिसी इनिशिएटिव के प्रमुख अभिजीत सिंह ने समाचार एजेंसी रॉयटर्स से कहा, कि "राष्ट्रपति मुइज्जू भारत के साथ बातचीत जारी रखने के इच्छुक नहीं हैं। उनकी हरकतें माले और दिल्ली के बीच दूरियां पैदा करने के लिए निर्देशित (किसी के इशारे पर) लगती हैं। वह चीन के साथ घनिष्ठ मित्रता के लिए भी उत्सुक दिखते हैं, जो भारत के लिए चिंता का विषय होना चाहिए।"
उन्होंने कहा, "नई दिल्ली की यात्रा से पहले राष्ट्रपति की बीजिंग यात्रा एक संकेत है - बिल्कुल स्पष्ट - कि भारत इस शासन के लिए प्राथमिकता में नीचे है।"
मोहम्मद मोइज्जू की 'इंडिया ऑउट' कैम्पेन
निर्वाचित होने के बाद सबसे पहले भारत का दौरा करने वाले अपने अधिकांश पूर्ववर्तियों के विपरीत, मोहम्मद मोइज्जू ने अपने पहले विदेशी गंतव्य के रूप में तुर्की को चुनकर 'इंडिया ऑउट' नीति का विकल्प चुना है।
बाद में उन्होंने COP28 के मौके पर संयुक्त अरब अमीरात में प्रधानमंत्री मोदी से मुलाकात की। दोनों देशों ने भारतीय सैनिकों की वापसी पर चर्चा के लिए एक कोर ग्रुप का गठन किया है।
अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन ने गुरुवार को मालदीव के विदेश मंत्री ज़मीर से बात की और अमेरिकी विदेश विभाग ने एक बयान में कहा, कि "सचिव ने स्वतंत्र, खुले, सुरक्षित और समृद्ध भारत-प्रशांत क्षेत्र में एक प्रमुख भागीदार मालदीव के साथ सहयोग को मजबूत करने के लिए संयुक्त राज्य अमेरिका की प्रतिबद्धता की पुष्टि की।"
मोइज्जू ने भारत विरोधी कौन-कौन से कदम उठाए?
- अपनी सामान्य भागीदारी से हटकर, भारत, श्रीलंका और मॉरीशस के साथ सदस्य-राज्य होने के बावजूद, मालदीव ने एनएसए-स्तरीय कोलंबो सुरक्षा कॉन्क्लेव की बैठक में भाग लेने से इनकार कर दिया।
- मोहम्मद मोइज्जू ने अपने पूर्ववर्ती सोलिह की 'इंडिया फर्स्ट' नीति को उलटते हुए मालदीव के रुख को बदलने का फैसला किया है और द्वीप राष्ट्र से भारतीय सैन्य कर्मियों को वापस लेने का विकल्प चुना है।
- आगे भी बदलाव का संकेत देते हुए, मालदीव ने भारत के साथ हाइड्रोग्राफी सहयोग समझौते को नवीनीकृत नहीं करने का फैसला किया है, जिससे यह 7 जून 2024 को समाप्त हो जाएगा।
- मूल रूप से 2019 में हस्ताक्षर किए गये, इस समझौते ने भारत को मालदीव के क्षेत्रीय जल में हाइड्रोग्राफिक सर्वेक्षण करने की अनुमति दी थी, जिसमें पानी के नीचे की सतहों की मैपिंग और चट्टानों, लैगून, समुद्र तट और अन्य भौतिक विशेषताओं का अध्ययन शामिल था।
माना जा रहा है, कि मालदीव की मौजूदा सरकार के कार्यकाल में उसके भारत के साथ संबंध खराब ही रहेंगे, जिसकी शुरूआत मालदीव के मंत्रियों के भारत के प्रधानमंत्री को लेकर दिए गये घटिया बयानों से शुरू हो चुकी है। हालांकि, मालदीव से पहले मलेशिया ने भी एंटी-इंडिया स्टैंड अपनाया था, लेकिन बाद में जियो-पॉलिटिकल परिणानमों ने उसे एक बार फिर से पाकिस्तानी खेमे से हटकर भारत के खेमे में आने के लिए मजबूर कर दिया, लेकिन मालदीव को लेकर माना जा रहा है, कि वो अगले पांच सालों तक चीन के खेमे में ही रहेगा।












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