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Islamic Revolutionary Guard: ईरान का इस्लामिक रिवॉल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स क्या है? जिसने इजराइल पर किया है हमला

What is Islamic Revolutionary Guard Corps: जब इजराइल ने पिछले हफ्ते सीरिया की राजधानी दमिश्क में ईरानी वाणिज्य दूतावास पर हमला किया, तो इसमें 13 ईरानी अधिकारी मारे गये थे, जिनमें 2 जनरल शामिल थे। इस हमले के बाद ही ईरान ने इजराइल में हमला करने की कसम खाई थी। ये सभी सैन्य अधिकारी इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड्स कॉर्प्स (IRGC) के थे।

और शनिवार की रात ईरान ने ठीक वैसा ही किया, और पहली बार इजराइल के खिलाफ अपनी धरती से करीब 300 से ज्यादा मिसाइल और ड्रोन हमले किए। माना जाता है, इजराइल पर ये जवाबी हमला इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड्स कॉर्प्स (IRGS) ने किया है।

Islamic Revolutionary Guard Corps

दरअसल, शनिवार को सीरिया में हुए हमले के बाद IRGC ने कहा था, कि उसके ड्रोन और मिसाइलों की बारिश ने इजराइल के खिलाफ अपने सभी मकसद हासिल कर लिए हैं। ईरानी सशस्त्र बलों के चीफ ऑफ स्टाफ मोहम्मद बघेरी ने स्टेट टीवी को बताया, कि "ऑपरेशन ऑनेस्ट प्रॉमिस... कल रात से आज सुबह तक सफलतापूर्वक पूरा हुआ और इसने अपने सभी उद्देश्यों को हासिल कर लिया है।"

आइये जानते हैं, कि ईरान का इस्लामिक रिवॉल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स क्या है? और वो ईरान में क्या भूमिका निभाते हैं?

इस्लामिक रिवॉल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स क्या है?

इस्लामिक रिवॉल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC), जिसे सिपाही-ए-पासदारन के नाम से भी जाना जाता है, उसकी स्थापना 1979 की इस्लामी क्रांति के फौरन बाद की गई थी। ये ईरान के पारंपरिक सशस्त्र बल, यानि ये ईरान की सेना जैसी नहीं है, लिहाजा इसे ईरान की सेना समझकर भूल नहीं करनी चाहिए।

इस्लामिक रिवॉल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स की जिम्मेदारी, आंतरिक और बाहरी खतरों के खिलाफ इस्लामिक गणराज्य की रक्षा करने और सीधे ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई को जवाब देना है। पिछले कुछ वर्षों में यह ईरान की घरेलू और विदेशी राजनीति में भी प्रभावशाली हो गया है, कई वरिष्ठ अधिकारी इसके रैंक से होकर गुजरे हैं।

IRGC के पास सेना की तीनों इकाइयों, थल सेना, नौसेना और वायु इकाइयों को मिलाकर करीब 190,000 सक्रिय कर्मी हैं। यह बासिज धार्मिक मिलिशिया को भी आदेश देता है, जो ईरान की इस्लामिक सत्ता प्रतिष्ठान के प्रति वफादार एक स्वयंसेवी अर्धसैनिक बल है, जिसका उपयोग अक्सर सरकार विरोधी विरोध प्रदर्शनों को कुचलने के लिए किया जाता है।

वहीं, साल 2019 में संयुक्त राज्य अमेरिका ने IRGC को एक आतंकवादी संगठन के रूप में नामित किया था। क्योंकि, ये हिज्बुल्लाह समेत सीरिया के कई आतंकवादी संगठनों को बनाने के लिए जिम्मेदार रहा है।

IRGC की स्थापना शाह मोहम्मद रजा पहलवी के पतन के तुरंत बाद हुई थी, क्योंकि वामपंथी और राष्ट्रवादी क्रांतिकारी देश को गणतंत्र की दिशा में ले जाना चाहते थे।

लेकिन, लोकतंत्र को कुचलने वाले सत्तारूढ़ मौलवियों ने 1979 की क्रांति और उसकी उपलब्धियों की रक्षा के लिए अपनी स्वयं की वैचारिक सैन्य शाखा - IRGC - का गठन किया। सेंटर फॉर स्ट्रैटेजिक एंड इंटरनेशनल स्टडीज की रिपोर्ट है, कि इसका मतलब यह है, कि क्रांतिकारी शासन और उसकी नीतियों की रक्षा के लिए IRGC को संवैधानिक रूप से वैध अस्तित्व और राजनीतिक परिदृश्य में शामिल होने का कानूनी अधिकार दिया गया था।

ईरान के संस्थापक सर्वोच्च नेता, अयातुल्ला रूहुल्लाह खुमैनी ने IRGC को "इस्लाम के सैनिक" के रूप में वर्णित किया। समूह की स्थापना के बाद उन्होंने पास्दारन से कहा, "आप जहां भी हों, अपने आप को अपने भीतर और अपने आस-पास के सभी शैतानों से बचाएं।"

ईरान में कितना खतरनाक है IRGC?

आज, IRGC ईरान की राजनीति और सेना का एक अभिन्न अंग है। इसे ईरान में प्रमुख सैन्य बल माना जाता है और यह देश के कई प्रमुख सैन्य अभियानों के पीछे है, जिसमें इजराइल पर शनिवार का हमला भी शामिल है।

IRGC की एक विदेशी शाखा भी है, जिसे कुद्स फोर्स के नाम से जाना जाता है, जो लेबनान से लेकर इराक, यमन और सीरिया तक मध्य पूर्व तक फैला है, जो अपने सहयोगी मिलिशिया को भारी रूप से प्रभावित करती है। इसके सदस्यों ने सीरिया के गृहयुद्ध में राष्ट्रपति बशर अल-असद के समर्थन में लड़ाई लड़ी है और हाल के वर्षों में इस्लामिक स्टेट के आतंकवादियों के खिलाफ लड़ाई में इराकी सुरक्षा बलों का समर्थन किया है।

इसके शीर्ष कमांडर, मेजर-जनरल कासिम सुलेमानी को 2020 में इराक में एक ड्रोन हमले में संयुक्त राज्य अमेरिका ने मार गिराया थी, जिसके बाद एक बड़े संघर्ष की आशंका पैदा हो गई थी।

IRGC की अपनी नौसेना भी है, जिसे होर्मुज के महत्वपूर्ण जलडमरूमध्य में गश्त करने का काम सौंपा गया है, जो खाड़ी को हिंद महासागर से जोड़ने वाला एक संकीर्ण जलमार्ग है, जिसके माध्यम से दुनिया की 20 प्रतिशत तेल आपूर्ति गुजरती है।

ईरान जो मिसाइल हमले करता है, उसके लिए IRGC की वायु सेना जिम्मेदार है। रॉयटर्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, IRGC ने सीरिया में सुन्नी मुस्लिम आतंकवादियों और उत्तरी इराक में ईरानी कुर्द विपक्षी समूहों पर हमला करने के लिए मिसाइलों का इस्तेमाल किया है। संयुक्त राज्य अमेरिका, यूरोपीय शक्तियों और सऊदी अरब ने 2019 के मिसाइल और ड्रोन हमले के लिए ईरान को दोषी ठहराया, जिसने सऊदी अरब में दुनिया की सबसे बड़ी तेल सुविधा को नष्ट कर दिया था, हालांकि ईरान ने मामले में अपना हाथ होने से इनकार कर दिया था।

ट्रम्प प्रशासन ने 2003 से 2011 के बीच इराक में 608 अमेरिकी सैनिकों की हत्याओं के लिए भी IRGC को दोषी ठहराया था। इसके अलावा, आईआरजीसी की कुद्स फोर्स को लेबनान के हिजबुल्लाह आंदोलन और फिलिस्तीनी इस्लामिक जिहाद सहित अमेरिका द्वारा नामित आतंकवादी समूहों को बढ़ावा देने और उनका समर्थन करने के लिए जाना जाता है। ये आतंकी संगठनों को धन, ट्रेनिंग, हथियार और उपकरण प्रदान करता है।

ईरान की राजनीति में कितना दखल?

IRGC की लोकप्रियता और अयातुल्ला खामेनेई के साथ इसके घनिष्ठ संबंधों ने इसे ईरानी राजनीति में एक प्रमुख खिलाड़ी बना दिया है। दरअसल, आईआरजीसी के कई पूर्व अधिकारी ईरान के राजनीतिक प्रतिष्ठानों में प्रमुख पदों पर हैं, जिनमें राष्ट्रपति इब्राहिम रायसी का मंत्रिमंडल भी शामिल है।

काउंसिल ऑन फॉरेन रिलेशन्स का कहना है, कि चूंकि IRGC सर्वोच्च नेता की नीतिगत स्थिति के साथ कदम मिलाकर चलता है, इसलिए कभी-कभी इसकी शक्तियां ईरान के राष्ट्रपति की शक्तियों पर भारी पड़ती हैं, जो किसी भी सशस्त्र बल को नियंत्रित नहीं करते हैं और उनके पास अपनी खुद की अपेक्षाकृत कम शक्तियां होती हैं।

ऐसी भी रिपोर्टें हैं, कि आईआरजीसी ने 2013 के राष्ट्रपति चुनावों के दौरान हस्तक्षेप किया था। रिपोर्टों से संकेत मिलता है, कि आईआरजीसी ने मतदान से पहले डर का माहौल कायम कर दिया था। जिसकी वजह से कई उम्मीदवारों ने अपनी उम्मीदवारी वापल बताई थी।

इसके अलवा, IRGC ईरान की अर्थव्यवस्था में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। ऐसा माना जाता है, कि यह सहायक कंपनियों और ट्रस्टों की एक सीरिज के माध्यम से ईरान की लगभग एक तिहाई अर्थव्यवस्था को ये नियंत्रित करता है। सेंटर फॉर स्ट्रैटेजिक एंड इंटरनेशनल स्टडीज की 2020 की रिपोर्ट के अनुसार, "आईआरजीसी पूरे ईरान में सभी महत्वपूर्ण आर्थिक क्षेत्रों का सबसे शक्तिशाली कंट्रोलर बन गया है।" और अपनी मर्जी से ज्यादातर फैसले करने लगा है।

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