2030 में भारत और UK के बीच क्या होने वाला है? पीएम मोदी ने बधाई संदेश में ऋषि सुनक को दिलाई याद
मजबूत ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संबंध भारत को यूनाइटेड किंगडम से मजबूती से बांधता है। साल 2004 में दोनों देशों के बीच स्ट्रैटजिक पार्टनरशिप विकसित किया गया था, जिसके बाद से दोनों देशों के संबंध तेजी से आगे बढ़े।
INDIA-UK Tie: भारतीय मूल के ऋषि सुनक ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बन गये हैं और इस मौके पर भारतीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने उन्हें बधाई दी है, लेकिन पीएम मोदी ने ऋषि सुनक को बधाई देने के साथ साथ उन्हें साल 2030 की भी याद दिलाई है। भारतीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने ऋषि सुनक को बधाई देते हुए ट्विटर पर लिखा कि, 'ऋषि सुनक, आपको बहुत गर्मजोशी के साथ बधाई। जैसा कि अब आप ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बन गये हैं, तो मैं आपके साथ मिलकर वैश्विक मुद्दों पर और साल 2030 के लिए बनाए गये रोडमैप के लिए काफी करीब से काम करना चाहता हूं।' पीएम मोदी ने अपने बधाई संदेश में आगे लिखा कि, 'दिवाली की स्पेशल बधाई आपको, क्योंकि आप भारत और ब्रिटेन के बीच जीवित ब्रिज का काम कर रहे हैं और हम अपनी एतिहासिक साझेदारी को आधुनिक पार्टनरशिप में बदल रहे हैं।'

बोरिस जॉनसन के वक्त बना रोडमैप
दरअसल, भारत और ब्रिटेन के बीच ये रोडमैप ब्रिटेन के पूर्व प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन के भारत दौरे के वक्त तैयार किया गया था। बोरिस जॉनसन बतौर प्रधानमंत्री जब 21 अरप्रैल को दो दिवसीय भारत यात्रा पर पहुंचे थे, उस वक्त नई दिल्ली में भारत और ब्रिटेन के बीच साल 2030 के लिए रोडमैप पर पहली बार चर्चा की गई थी। इस रोडमैप के तहत भारत और ब्रिटेन के बीच फ्री ट्रेड एग्रीमेंट को पूरा करने, इंडो-पैसिफिक में सहयोग बढ़ाने, रक्षा संबंधों को नेक्स्ट लेवल तक ले जाने का रोडमैप तैयार करने पर बातचीत की गई थी। पूर्व प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन से उस वक्त भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर के साथ हुई बैठक में भारत-यूके रोडमैप 2030 सहित कई प्रमुख कारकों पर चर्चा की थी।

भारत-ब्रिटेन 2030 पार्टनरशिप प्रोग्राम क्या है?
यूके के पूर्व प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन और भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 4 मई 2021 को एक वर्चुअल बैठक के दौरान भारत-यूके संबंधों के लिए 2030 रोडमैप पर हस्ताक्षर किए थे। ये रोडमैप अगले दस सालों में दोनों देशों के बीच साझेदारी की महत्वाकांक्षाओं को रेखांकित करता है। रोडमैप 2030 के तहत भारत-यूके व्यापार को दोगुना करने का लक्ष्य रखा गया है और फ्री ट्रेड एग्रीमेंट के तहत दोनों देशों के बीच के व्यापार को काफी तेज करने का लक्ष्य रखा गया था। ये रोडमैप भारत और यूनाइटेड किंगडम के बीच एक 'एडवांस व्यापार साझेदारी' की शुरुआत की शुरुआत करता है। साल 2005 में दोनों देशों के बीच औपचारिक 'कॉम्प्रिहेंसिव स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप एग्रीमेंट-2005' के समझौते के बाद यह पहला भी है। मई में दोनों नेताओं के बीच हुई बैठक के दौरान दिवाली तक फ्री ट्रेड एग्रीमेंट को फाइनल करने का लक्ष्य रखा गया था, लेकिन बोरिस जॉनसन के इस्तीफे के बाद ब्रिटिश राजनीति में मची उथलपुथल ने इसे काफी लेट किया। वहीं, बोरिस जॉनसन के बाद प्रधानमंत्री बनी लिज ट्रस ने फ्री ट्रेड एग्रीमेंट को काफी लेट कर दिया।

कई क्षेत्र में सहयोग के लिए समझौता
भारत और यूनाइटेड किंगडम एक ऐसी साझेदारी के लिए समर्पित हैं, जिससे दोनों देशों को उच्चतम फायदा हो। साल 2030 के लिए जो रोडमैप बनाया गया है, उसमें दोनों देशों के बीच के सक्रिय व्यापार की रफ्तार को तेज करने, इन्वेस्टमेंट और टेक्नोलॉजिकल सहयोग बढ़ाने पर खास जोर दिया गया है, ताकि दोनों देशों के नागरिकों के जीवन और आजीविका में सुधार करती हो। इसके साथ ही इस रोडमैप में रक्षा और सुरक्षा सहयोग बढ़ाने और जलवायु परिवर्तन को लेकर एथ मिलकर काम करने के बारे में प्रतिबद्धता जताई गई है। भारत और यूनाइटेड किंगडम, दोनों ही देश गतिशील लोकतंत्र हैं और मानव संसाधन, इन्फ्रास्ट्रक्चर, इनोवेशन, रिसर्च, एजुकेशन, अंतरिक्ष, रक्षा, और हरित प्रौद्योगिकियों, और स्वच्छ ऊर्जा, अन्य क्षेत्रों में प्रभावशाली प्रगति के साथ दुनिया की अग्रणी अर्थव्यवस्थाएं हैं। इस महत्वाकांक्षी रोडमैप के माध्यम से, भारत और यूनाइटेड किंगडम एक व्यापक रणनीतिक साझेदारी को बढ़ावा देने और कई प्रमुख क्षेत्रों को मजबूत करने का इरादा रखते हैं।

रोडमैप-2030 की मुख्य बातें
फ्री ट्रेड एग्रीमेंट- भारत-यूके व्यापार साझेदारी में फ्री ट्रेड एग्रीमेंट को सबसे ऊपर और महत्वपूर्ण बताया गया है। इस एग्रीमेंट में दोनों देशों के बीच व्यापारिक भागीदारी बढ़ाने पर जोर दिया गया है। दस्तावेजों के मुताबिक, फ्री ट्रेड एग्रीमेंट को तहत यूनाइटेड किंगडम मस्त्य पालन उद्योग में ज्यादा से ज्यादा भारतीय प्लेयर्स को शामिल करेगा। वहीं, दोनों देशों के बीच नर्सिंग संभावनाओं का विस्तार किया जाएगा। वहीं, ब्रिटेन भारतीय नाविकों की सेवा में विस्तार करेगा। वहीं, इस रोडमैप के हिस्से के रूप में सामाजिक सुरक्षा समझौते पर एक सहकारी संवाद में शामिल होगा। बदले में, भारत ने यूनाइटेड किंगडम के फलों, चिकित्सा उपकरणों और मास्टर डिग्री की पारस्परिक मान्यता के अनुरोधों के साथ-साथ पारस्परिक कानूनी सेवाओं को खोलने की दिशा में काम करने के लिए सहमति दी है।

माइग्रेशन और मोबिलिटी पार्टनरशिप
भारत और ब्रिटेन के बीच रोडमैप-2030 को लेकर जो दस्तावेज साइन किया गया है, उसके मुताबिक माइग्रेशन और मोबिलिटी पार्टनरशिप को लेकर साझेदारी करने का फैसला किया गया है। ये समझौता भारत के लिए काफी अहम माना जाता है। इस समझौते के तहत दोनों देशों ने अपने छात्रों और प्रोफेशनल्स को कानूनी रूप से आगे बढ़ाने और उनकी पढ़ाई और काम करने के लिए आसान माहौल बनाने पर समझौता किया है। इसके साथ ही, अवैध प्रवास के खिलाफ लड़ाई में भारत-यूके सहयोग में सुधार करना भी शामिल है। यह युवा प्रोफेशनल्स के आदान-प्रदान के लिए एक नई योजना भी बनाता है जिसके तहत 3,000 युवा भारतीय प्रोफेशनल्स दो साल की अवधि के लिए लेबर मार्केट टेस्ट पास किए ब्रिटेन में रोजगार की तलाश कर सकते हैं। हालांकि, लिज ट्रस प्रशासन को इस एग्रीमेंट को लेकर एतराज था, जिसको लेकर दोनों देशों के बीच बहसबाजी भी हो गई थी।

ईज ऑफ डूइंग बिजनेस
ये रोडमैप बताता है, कि कैसे दोनों देश व्यापार प्रतिबंधों को कम करने या उसे खत्म करने के लिए मिलकर काम करेंगे। इसके तहत भारतीय कंपनियों को यूके में और यूके की कंपनियों को भारत में जिन कठिन परिस्थितियों और दिक्कतों का सामना करना पड़ता है, उन्हें मिलकर दूर करने का फैसला किया गया है। भारत सरकार ने इसके लिए अपने ईज ऑफ डूइंग बिजनेस प्रोग्राम में ब्रिटेन के लिए स्पेशल विंडो बनाने का फैसला किया है। यूके-इंडिया ईज ऑफ डूइंग बिजनेस एमओयू के माध्यम से दोनों पक्ष रेग्यूलेटरी रिफॉर्म करने, टैक्स एडमिनिस्ट्रेशन और ट्रेड फैसिलिटी स्टैंडर्ट बढ़ाने का फैसला लिया है।

शिक्षा क्षेत्र में फैसले
इसके साथ ही ये रोडमैप, भारत की नई शिक्षा नीति के ढांचे के भीतर दोनों देशों के शैक्षणिक संस्थानों के बीच सहयोग के विस्तार की रूपरेखा तैयार करता है। हजारों भारतीय छात्रों ने यूनाइटेड किंगडम को अपने पसंदीदा शैक्षिक गंतव्य के रूप में चुना है। इस कार्यक्रम के परिणामस्वरूप भारतीयों के लिए 6,500 से अधिक नए रोजगार सृजित होने की उम्मीद है।

भारतीय स्टार्ट-अप को बढ़ावा
भारत और यूनाइटेड किंगडम का लक्ष्य भारतीय स्टार्ट-अप, प्रारंभिक चरण और हरित उद्यमों और अन्य नवीन उद्यमों में दोतरफा निवेश को बढ़ावा देना है, जिसका उद्देश्य लगातार विकास में योगदान करना है। दोनों देश मिलकर भारत को स्वच्छ, ग्रीन और मजबूत बेसिक इन्फ्रास्ट्रक्चर ढांचे के विकास में मदद करने के लिए यूके के रियायती वित्त प्रस्ताव के लिए लंबी अवधि की संभावनाओं पर गौर करने की भी योजना बना रहे हैं।
भारत-यूके संबंध
यहां यह उल्लेख करना महत्वपूर्ण है, कि मजबूत ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संबंध भारत को यूनाइटेड किंगडम से मजबूती से बांधता है। साल 2004 में दोनों देशों के बीच स्ट्रैटजिक पार्टनरशिप विकसित किया गया था, जिसके बाद से यूनाइटेड किंगडम के साथ भारत के बहुआयामी द्विपक्षीय संबंध काफी मजबूत हो गए। साल 2004 में दोनों देशों के बीच किए गये सामरिक साझेदारी के बाद से प्रधानमंत्री स्तर पर यात्राओं का नियमित आदान-प्रदान होता रहा है। भारत, यूनाइटेड किंगडम का दूसरा सबसे बड़ा विदेशी निवेशक बन चुका है। जबकि यूनाइटेड किंगडम भारत का 18वां सबसे बड़ा व्यापारिक भागीदार है और मॉरीशस और सिंगापुर के बाद तीसरा सबसे बड़ा निवेशक है। इसके अलावा, संबंधों को मजबूत करने के लिए दोनों देशों के बीच कई द्विपक्षीय व्यापार समझौते मौजूद हैं। लिहाजा, ऋषि सुनक, जो अपने इस कार्यकाल में अगले दो सालों तक ब्रिटेन के प्रधानमंत्री रहने वाले हैं, वो भारत के लिए काफी अहम हैं और रोडमैप-2030 का विकास उनकी सरकार की नीतियों पर काफी निर्भर करता है, इसीलिए पीएम मोदी ने ऋषि सुनक को अपने बधाई संदेश में रोडमैप-2030 का जिक्र किया है।












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