क्या है आर्टेमिस समझौता और इसका मकसद? जिनके सहारे पूरी होगी भारत की तमन्ना
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आर्टेमिस समझौते पर दस्तखत कर दिए हैं। जिसके बाद अब भारत भी 26 देशों के ग्रुप में शामिल हो गया है, जो अंतरिक्ष में नई खोज में लगा हुअ है।
चंद्रमा, मंगल और स्पेस में उससे आगे की खोज में अब भारत भी 26 देशों के ग्रुप में शामिल हो गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आर्टेमिस समझौते पर दस्तखत कर दिए हैं। आर्टेमिस एकॉर्ड अमेरिकी स्पेस एजेंसी, नेशनल एयरोनॉटिक्स एंड स्पेस एडमिनिस्ट्रेशन (NASA) का एक हिस्सा है।
'आर्टेमिस प्रोग्राम' के तहत नासा चंद्रमा पर पहली महिला यात्री को उतरेगा। फिर चंद्रमा की जमीन से ही मंगल ग्रह पर पहले मानव मिशन की तैयारी शुरू होगी। आर्टेमिस एकॉर्ड को 8 देशों ने मिलकर शुरू किया था। आर्टेमिस समझौते को 13 अक्टूबर, 2020 को 8 देशों ने मिलकर शुरू किया था। इसके बाद संख्या बढ़ती गई।

26 देश इस समझौते का हिस्सा
आर्टेमिस समझौते में सबसे पहले ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, इटली, जापान, लक्जमबर्ग, संयुक्त अरब अमीरात, यूनाइटेड किंगडम और संयुक्त राज्य अमेरिका शामिल हुए। फिर ब्राजील, कोलंबिया, चेक रिपब्लिक, इक्वाडोर, फ्रांस, इजरायल, मैक्सिको, न्यूजीलैंड, नाइजीरिया, पोलैंड, साउथ कोरिया, रोमानिया, रवांडा, सिंगापुर, सऊदी अरब, स्पेन, यूक्रेन, आइल ऑफ मैन ने इस समझौते पर दस्तखत किए। 21 जून, 2023 को इस समझौते पर दस्तखत करने वाला 26वां देश इक्वाडोर था। लेकिन, उससे पहले ही प्रधानमंत्री मोदी ने भी समझौते में शामिल होने के घोषणा की थी।
क्या है इस समझौते का मकसद?
दरअसल, यह आर्टेमिस समझौता एक आपसी सहमति है। जिसका मकसद है कि स्पेस में आपसी सहयोग से नई खोज को अंजाम देना। साथ ही भविष्य में स्पेस और धरती पर बेवजह किसी तरह का संघर्ष न करना पडे। यह समझौता एक पुरानी संधि पर आधारित है। जिसे आउटर स्पेस ट्रीटी 1967 से जाना जाता है।












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