व्लादिमीर पुतिन जल्द आएंगे भारत, क्या दिल्ली को रूसी राष्ट्रपति को गिरफ्तार करने पर होना पड़ेगा मजबूर?
Vladimir Putin India Visit: रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन दुनिया के कई हिस्सों में वांटेड व्यक्ति हैं। उनके ऊपर 'युद्ध अपराधी' होने का आरोप है। हालांकि, वह भारत को एक "स्वाभाविक सहयोगी" के रूप में देखते हैं और अब वो दिल्ली का दौरा करने वाले हैं।
हालांकि, उनकी यात्रा की तारीखें अभी तय नहीं हुई हैं, लेकिन क्रेमलिन के प्रेस सचिव दिमित्री पेसकोव ने मंगलवार (19 नवंबर) को नई दिल्ली में रूस की सरकारी समाचार एजेंसी स्पुतनिक द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में वीडियो संबोधन के दौरान कहा, "हमने इस साल प्रधानमंत्री मोदी का दो बार स्वागत किया और हमें उम्मीद है कि जल्द ही हम राष्ट्रपति पुतिन की भारत यात्रा की तारीखें तय कर लेंगे।"

राष्ट्रपति पुतिन के खिलाफ है गिरफ्तारी वारंट
पुतिन ने आखिरी बार 2021 में भारत-रूस वार्षिक शिखर सम्मेलन के लिए भारत का दौरा किया था। तब से बहुत कुछ बदल गया है। 24 फरवरी 2022 को रूस ने यूक्रेन पर आक्रमण किया और राष्ट्रपति की आगामी यात्रा युद्ध के बाद पहली होगी। यूक्रेन में कथित युद्ध अपराधों के लिए पुतिन के खिलाफ अंतर्राष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय (ICC) द्वारा गिरफ्तारी वारंट जारी किया गया है, जिसे मार्च 2023 में जारी किया गया था।
लेकिन क्या यह भारत पर लागू होता है? क्या नई दिल्ली रूसी नेता के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए बाध्य है? इसका उत्तर है नहीं। हम बताते हैं कि ऐसा क्यों है।
ICC क्या है? इसने पुतिन के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट क्यों जारी किया है?
द हेग में अंतर्राष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय (ICC) एक वैश्विक न्यायालय है, जिसके पास "अंतर्राष्ट्रीय समुदाय के लिए चिंता के सबसे गंभीर अपराधों" के लिए नेताओं और अन्य व्यक्तियों पर मुकदमा चलाने की शक्ति है। यह नरसंहार, युद्ध अपराध, मानवता के खिलाफ अपराध और आक्रामकता के आरोप में जांच करता है और जरूरत पड़ने पर उन पर मुकदमा भी चलाता है।
ICC की स्थापना 2002 में एक ऐसी प्रणाली स्थापित करने के वर्षों की कोशिशों के बाद की गई थी, जो विश्व नेताओं को अत्याचारों के लिए जिम्मेदार ठहरा सके। बीबीसी की रिपोर्ट के मुताबिक, यूगोस्लाव युद्धों और रवांडा नरसंहार के बाद इस तरह के निकाय के गठन की मांग बढ़ रही थी।
ICC- जिसे विश्व न्यायालय के नाम से भी जाना जाता है, वो राष्ट्रीय न्यायालयों की जगह लेने के बजाय उनका पूरक बनना चाहता है। यह तब कदम उठाता है, जब राष्ट्रीय अधिकारी मुकदमा चलाने में असमर्थ होते हैं या ऐसा करने के लिए तैयार नहीं होते हैं, जैसा कि पुतिन जैसे सत्तावादी नेताओं के मामले में हुआ।
अदालत ने मार्च 2023 में पुतिन के खिलाफ कथित युद्ध अपराधों के लिए गिरफ्तारी वारंट जारी किया था, जिसमें आरोप लगाया गया था, कि रूस ने यूक्रेन से बच्चों को जबरन अपहरण किया है। आईसीसी के अनुसार, पुतिन और उनके बाल अधिकार आयुक्त "कथित तौर पर आबादी (बच्चों) के गैरकानूनी निर्वासन और यूक्रेन के कब्जे वाले क्षेत्रों से रूसी संघ में आबादी (बच्चों) के गैरकानूनी हस्तांतरण के युद्ध अपराध के लिए जिम्मेदार हैं।"
लेकिन गिरफ्तारी वारंट के बावजूद पुतिन को किसी दूसरे देश में हिरासत में लिए जाने की संभावना बहुत कम है।
रूस और यूक्रेन आईसीसी के हस्ताक्षरकर्ता नहीं हैं। वारंट के बाद क्रेमलिन के प्रवक्ता पेसकोव ने कहा, "रूस, कई अन्य राज्यों की तरह, इस न्यायालय के अधिकार क्षेत्र को मान्यता नहीं देता है, और इसलिए इसके कोई भी फैसले कानूनी दृष्टिकोण से रूसी संघ के लिए महत्वहीन हैं।"
क्या भारत को आईसीसी के आदेश का पालन करना होगा?
ICC रोम संविधि नामक एक अंतर्राष्ट्रीय संधि के तहत बनाया गया है, जिसे 124 देशों ने अनुमोदित किया था। हालाकि, भारत ICC का हिस्सा नहीं है और नई दिल्ली ने मुख्य समझौते पर हस्ताक्षर नहीं किए हैं। इसलिए, यह इसके सिद्धांतों से बंधा नहीं है।
भारत ने अतीत में ऐसे नेताओं की मेजबानी की है, जिन्हें ICC के खिलाफ कार्रवाई का सामना करना पड़ा है। 2015 में, तत्कालीन सूडानी राष्ट्रपति उमर हसन अल-बशीर ने भारत-अफ्रीका शिखर सम्मेलन के लिए नई दिल्ली का दौरा किया था। वह ICC द्वारा डारफुर में नागरिक आबादी के खिलाफ जानबूझकर हमले करने के लिए अभियोग लगाए जाने वाले पहले राष्ट्राध्यक्ष हैं। उन पर मानवता के खिलाफ अपराध: हत्या, विनाश, जबरन स्थानांतरण, यातना और बलात्कार; युद्ध अपराधों के दो मामले दर्ज हैं।
आईसीसी ने मार्च 2009 और 2010 में अल-बशीर के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किए थे। उनकी भारत यात्रा से पहले, अदालत ने नई दिल्ली को अफ्रीकी नेता को गिरफ्तार करने के लिए कहा था, लेकिन ऐसा कोई कदम नहीं उठाया गया। इसी तरह, भारत पुतिन के खिलाफ कार्रवाई नहीं करेगा।












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