खौफनाक अंजाम की तरफ बढ़ रहा यूक्रेन युद्ध, रूस ने परमाणु पनडुब्बियों को नॉर्थ अटलांटिक में उतारा
फेडरेशन ऑफ अमेरिकन साइंटिस्ट यानि एफएएस की रिपोर्ट के मुताबिक, दुनिया में इस वक्त रूस के पास सबसे ज्यादा परमाणु बम मौजूद हैं। परमाणु बम को लेकर एफएएस की लिस्ट के मुताबिक रूस के पास इस वक्त 6257 परमाणु बम हैं
मॉस्को/कीव, मार्च 26: रूस और यूक्रेन के बीच चल रही लड़ाई के एक महीने पूरी हो चुके हैं, लेकिन अब यह लड़ाई धीरे धीरे खौफनाक अंजाम की तरफ बढ़ती जा रही है। कई बैठकों के बाद भी स्थिति सुधरने के बजाए बिगड़ती जा रही है और धीरे धीरे दुनिया पर परमाणु युद्ध का खतरा मंडराने लगा है। नाटो देशों ने पोलैंड में रूस की सीमा के पास हजारों सैनिकों को खड़ा कर दिया है और रूस की एक गलती का इंतजार कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ रूस ने नॉर्थ अटलांटिक सागर में परमाणु पनडुब्बियों को उतार दिया है।

परमाणु पनडुब्बियों के साथ उतरा रूस
रिपोर्ट्स के मुताबिक, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने पश्चिमी देशों के अंजाम भुगतने की धमकी देने के एक दिन बाद ही उत्तरी अटलांटिक सागर में अपनी परमाणु पनडुब्बियों को उतार दिया है। यानि, रूस ने साफ कर दिया है, कि पश्चिमी देश रूस की आक्रामकता को मजाक समझने की भूल ना करे। पुतिन ने यूक्रेन पर आक्रमण के कुछ समय बाद ही अपने न्यूक्लियर डेटरेंट फोर्स को अलर्ट पर रहने का आदेश दे दिया था और अब कई रूसी पनडुब्बियां, जो 16 बैलिस्टिक मिसाइलों को ले जाने में सक्षम हैं, वो नॉर्थ अटलांटिक साहर में उतर चुकी है और किसी भी समय युद्ध में तबाही मचाने के लिए पूरी तरह से तैयार हो चुके हैं। परमाणु विशेषज्ञों ने द मिरर को बताया कि, यह वास्तविक परमाणु खतरे के बजाय "रूस की चेतावनी" है। हालांकि, कुछ रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि, अब रूस की धमकी को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है।

पुतिन के परमाणु जखीरे पर नजर
रिपोर्ट के मुताबिक, पश्चिमी देशों की खुफिया एजेंसियां लगातार व्लादिमीर पुतिन के परमाणु शस्त्रागार पर कड़ी नजर रखे हुए हैं। वहीं, पुतिन के पास दुनिया में सबसे ज्यादा परमाणु हथियार हैं, जो विनाश मचाने के लिए काफी हैं और इन परमाण हथियारों को व्यापक तबाही मचाने के लिए ही तैयार किया गया है। नौसेना के एक सूत्र ने द टाइम्स को बताया कि, "अधिकांश रूसी पारंपरिक हथियारों को लो-यील्ड वाली परमाणु क्षमता के साथ फिर से इस्तेमाल किया जा सकता है।" हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि, परमाणु क्षमता से लैस इन हथियारों का इस्तेमाल करना इतना आसान नहीं है, लेकिन रूस के वैज्ञानिक परमाणु हथियारों के डिजाइन में माहिर माना जाते हैं और रूस साफ तौर पर कह चुका है, कि अगर उसके अस्तित्व पर खतरा आता है, तो फिर वो परमाणु हथियार इस्तेमाल करने से पीछे नहीं हटेगा।

क्या परमाणु हथियार चल सकता है रूस?
विशेषज्ञों के अनुसार, यूक्रेन पर हमला करने के लिए पुतिन का औचित्य "डी-नाज़िफाई" था, देश को नष्ट नहीं करना नहीं। पुतिन का मदसद यूक्रेन के तमाम हथियारों भंडारो को नष्ट कर देना था, लेकिन क्रेमलिन का मकसद यूक्रेन के लोगों को मारना नहीं है और क्रेमलिन परमाणु हथियार लॉन्च करने की तैयारी नहीं कर रहा है। एक पश्चिमी अधिकारी के अनुसार, संघर्ष में अब तक यूक्रेन के लिए निर्धारित मिसाइलों पर परमाणु हथियार लोड होने का कोई सबूत नहीं मिला है। अटलांटिक काउंसिल में स्कोक्रॉफ्ट स्ट्रैटेजी इनिशिएटिव के निदेशक डॉ मैथ्यू क्रोनिग ने द मिरर ऑनलाइन को बताया कि, पुतिन ने दो कारणों से अपने परमाणु बलों को हाई अलर्ट पर रखा था। उन्होंने कहा कि, ऐसा इसलिए है कि पुतिन परमाणु हमले के प्रति कम संवेदनशील होंगे और यदि तमाम परमाणु हथियार एक ही स्थान पर होंगे तो फिर उन्हें रणनीतिक स्थानों पर पहुंचाया जा रहा होगा, जहां से उन्हें लॉन्च किया जा सकता है। हालांकि, उन्होंने कहा कि, "यह रूसी रणनीति का एक हिस्सा है और मुझे नहीं लगता कि हम परमाणु युद्ध की तैयारी कर रहे हैं।
अस्तित्व पर खतरा, तो चलेगा परमाणु बम
इसी हफ्ते व्लादिमीर पुतिन के प्रवक्ता दिमित्री पेसकोव ने पूरी दुनिया को चेतावनी देते हुए कहा है कि, रूस परमाणु हथियारों का इस्तेमाल तभी करेगा जब उसके अस्तित्व को खतरा होगा। रूस द्वारा यूक्रेन में अपनी सेना भेजने के लगभग चार सप्ताह बाद यह टिप्पणी पश्चिमी चिंता के बीच आई है, कि यूक्रेन संघर्ष पूर्ण पैमाने पर परमाणु युद्ध में बदल सकता है। रूसी राष्ट्रपति के प्रवक्ता ने कहा कि, 'हमारे पास घरेलू सुरक्षा का अपना कंसेप्ट है, जो सार्वजनिक है।' पुतिन के प्रवक्ता पेसकोव ने कहा कि, 'हमारे पास जो घरेलू सुरक्षा के लिए नियमावली है, उसमें आप परमाणु हथियारों का इस्तेमाल करने के सभी कारणों के बारे में पढ़ सकते हैं और उसमें लिखा है, कि अगर हमारे देश के अस्तित्व को खतरा आता है, तो घरेलू सुरक्षा के लिए परमाणु बम का इस्तेमाल किया जा सकता है।' प्रवक्ता पेसकोव ने कहा कि, 'इसके अलावा परमाणु बम इस्तेमाल करने के और कोई कारण नहीं है'।

क्या होता है ‘न्यूक्लियर डिटरेंस फोर्स’?
'न्यूक्लियर डिटरेंस फोर्स' शब्द अमेरिका और रूस के बीच हुई शीत युद्ध के बीच आया था और 'न्यूक्लियर डिटरेंस फोर्स' परमाणु हमले करने और परमाणु हमलों से बचाने वाले स्पेशल फोर्स को कहा जाता है। जिस वक्त रूस और अमेरिका के बीच शीत युद्ध चल रही थी, उस वक्त अमेरिका ने 'न्यूक्लियर डिटरेंस फोर्स' शब्द का इस्तेमाल किया था और अमेरिका के इस शब्द का मतलब ये था कि, अगर कोई देश या खुद रूस ही, अमेरिका के ऊपर परमाणु हमला करने की कोशिश करता है, तो ये स्पेशल फोर्स उस हमले को रोकने की कोशिश कर सके। अब इस वक्त जब रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध चल रहा है, तो रूस ने अमेरिका की ही नीति को कॉपी कर लिया है और साफ कर दिया है कि, अगर रूस पर ऐसे प्रतिबंध लगाए जाते हैं, या फिर नाटो देश यूक्रेन की मदद के लिए आते हैं, तो फिर रूस परमाणु हमला करने से पीछे नहीं रहेगा।

रूस के पास सबसे ज्यादा परमाणु बम
फेडरेशन ऑफ अमेरिकन साइंटिस्ट यानि एफएएस की रिपोर्ट के मुताबिक, दुनिया में इस वक्त रूस के पास सबसे ज्यादा परमाणु बम मौजूद हैं। परमाणु बम को लेकर एफएएस की लिस्ट के मुताबिक रूस के पास इस वक्त 6257 परमाणु बम हैं, जिनमें से 1600 परमाणु बम को रूस ने तैनात करके रखा हुआ है जबकि 4497 परमाणु बम को रूस ने रिजर्व करके रखा हुआ है। वहीं, रूस ने 1700 परमाणु बमों को रिटायर्ड कर दिया है। वहीं, एफएएस की रिपोर्ट में कहा गया है कि अमेरिका के पास इस वक्त कुल 5550 परमाणु बम हैं, जिनमें से अमेरिका ने इस वक्त 1800 परमाणु बमों को तैनात करके रखा है। वहीं, अमेरिका ने 3800 परमाणु बमों को रिजर्व करके रखा है, जबकि साढ़े 1700 परमाणु बम को अमेरिका रिटायर्ड कर चुका है। वहीं, एक्टिव परमाणु बमों की अगर बात की जाए तो तीसरे नंबर पर फ्रांस और चौथे नंबर पर ब्रिटेन शामिल हैं।












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