Vinay Mohan Kwatra: विनय मोहन क्वात्रा अमेरिका में भारत के अगले राजदूत नियुक्त, जानें क्या होंगी चुनौतियां?
Vinay Mohan Kwatra: भारतीय विदेश मंत्रालय ने शुक्रवार को घोषणा की है, कि पूर्व विदेश सचिव विनय मोहन क्वात्रा को अमेरिका में भारत का अगला राजदूत नियुक्त किया गया है। उम्मीद है, कि वे जल्द ही यह कार्यभार संभालेंगे और जनवरी में रिटायर्ड हुए अनुभवी राजनयिक तरनजीत सिंह संधू की जगह लेंगे।
संधू के शानदार राजनयिक करियर में फरवरी 2020 से जनवरी 2024 तक संयुक्त राज्य अमेरिका में राजदूत के रूप में कार्य करना शामिल है। अब, क्वात्रा को आगामी भारत-अमेरिका संबंधों को संभालने का काम ऐसे समय में सौंपा जाएगा, जब अमेरिका डोनाल्ड ट्रम्प के नेतृत्व में अमेरिका में प्रशासन में बदलाव की उम्मीद है।

कौन हैं विनय मोहन क्वात्रा? पांच बातें जानिए
1- विनय मोहन क्वात्रा 1988 बैच के भारतीय विदेश सेवा (IFS) अधिकारी हैं, जिन्होंने हर्षवर्धन श्रृंगला के बाद 34वें विदेश सचिव के रूप में पदभार संभाला और 1 मई 2022 से 14 जुलाई 2024 तक सेवा की। उनका कार्यकाल चुनौती भरा रहा, क्योंकि उन्हीं के कार्यकाल के दौरान दुनिया में उथल पुथल मची, यूक्रेन युद्ध शुरू हुआ और भारत की विदेश नीति एक महत्वपूर्ण चुनौती से गुजर रही थी।
2- विदेश सचिव का पदभार संभालने से पहले क्वात्रा नेपाल में भारतीय राजदूत के पद पर कार्यरत थे। उन्हें भारत के पड़ोस के साथ-साथ संयुक्त राज्य अमेरिका, चीन और यूरोप के साथ काम करने में उनकी व्यापक विशेषज्ञता के लिए जाना जाता है।
3- करीब 35 वर्षों से ज्यादा के राजनिक कैरियर के अनुभव वाले क्वात्रा ने, अगस्त 2017 से फरवरी 2020 तक फ्रांस में भारत के राजदूत के रूप में कार्य किया। उन्होंने मई 2010 से जुलाई 2013 के बीच वाशिंगटन डीसी में दूतावास में मंत्री (वाणिज्य) के रूप में भी काम किया।
4- क्वात्रा को दो बार चीन में भी तैनात किया गया, पहले काउंसलर के रूप में और फिर बीजिंग स्थित दूतावास में मिशन के उप प्रमुख के रूप में। उन्होंने जुलाई 2013 से अक्टूबर 2015 के बीच विदेश मंत्रालय के नीति नियोजन एवं अनुसंधान प्रभाग का भी नेतृत्व किया।
5- क्वात्रा अक्टूबर 2015 से अगस्त 2017 के बीच दो साल के लिए प्रधान मंत्री कार्यालय (पीएमओ) में संयुक्त सचिव के पद पर भी कार्यरत रहे हैं। उनकी शादी पूजा क्वात्रा से हुई है और उनके दो बेटे हैं।
क्वात्रा के सामने चुनौतियां क्या होंगी?
भारत इस वक्त नवंबर में होने वाले अमेरिकी राष्ट्रपति चुनावों में निर्णायक नतीजों का इंतजार कर रहा है, जहां डोनाल्ड ट्रंप के जीतने की अच्छी संभावना है। क्वात्रा का पहला काम उन अधिकारियों से संपर्क करना होगा, जो बदलते प्रशासन में भारत से जुड़ी नीतियों में अहम भूमिका निभा सकते हैं।
उल्लेखनीय है कि भारत-अमेरिका संबंधों में तेजी आई है और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ट्रंप के बीच मधुर संबंध रहे हैं। गुरपतवंत सिंह पन्नू की हत्या की नाकाम कोशिश भी भारत और अमेरिका के बीच बातचीत का केंद्र बन सकती है, क्योंकि भारतीय नागरिक निखिल गुप्ता की गिरफ्तारी और प्रत्यर्पण ने दुनिया के सबसे पुराने और सबसे बड़े लोकतंत्रों के बीच कुछ हद तक तनाव पैदा की है।
प्रधानमंत्री मोदी के कार्यकाल में भारत और अमेरिका के बीच संबंध मजबूत हुए हैं। नई दिल्ली वाशिंगटन को चीन की बढ़ती आक्रामकता को रोकने के लिए एक भागीदार के रूप में देख रहा है। अमेरिका, भारत को इंडो-पैसिफिक में एक प्रमुख भागीदार के रूप में भी देखता है, जो चीन के सामने खड़े होने में मददगार है। दोनों देश महत्वपूर्ण और उभरती प्रौद्योगिकियों पर अत्यधिक महत्वाकांक्षी पहल (आईसीईटी) पर भी काम कर रहे हैं।












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