Get Updates
Get notified of breaking news, exclusive insights, and must-see stories!

Uzbekistan में तानाशाही! दाढ़ी रखने वालों पर $400 का जुर्माना, क्या है नए फरमान के पीछे उज्बेक सरकार का तर्क?

Uzbekistan Beard Ban: उज़बेकिस्तान ने हाल ही में मुस्लिम शैली की दाढ़ी पर प्रतिबंध लगाने की नीति लागू की है, जिसने देश और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारी विवाद खड़ा कर दिया है। इस नए नियम के तहत, जो पुरुष इस प्रकार की दाढ़ी रखते हैं, उन्हें 400 डॉलर तक का जुर्माना भरना पड़ सकता है।

यह कदम धार्मिक और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के उल्लंघन के रूप में देखा जा रहा है, क्योंकि दाढ़ी को इस्लामी आस्था और पहचान का प्रतीक माना जाता है।

Uzbekistan beard ban

आलोचनाओं से घिरी उज़्बेक सरकार की नई नीति
इस नीति के आलोचक इसे धार्मिक स्वतंत्रता पर हमले के रूप में देखते हैं। मानवाधिकार संगठनों ने उज़्बेकिस्तान पर धार्मिक अभिव्यक्तियों को दबाने का आरोप लगाया है और कहा है कि यह नीति मुसलमानों की धार्मिक स्वतंत्रता को सीमित करती है। ऐसे कदम से आबादी के एक बड़े हिस्से को अलग-थलग करने का खतरा भी है।

इसके अलावा, दाढ़ी रखने पर लगाए गए भारी जुर्माने को आर्थिक बोझ के रूप में देखा जा रहा है। उज़्बेकिस्तान में औसत मासिक वेतन लगभग $390 है, और $400 का जुर्माना एक आम व्यक्ति के लिए भारी साबित हो सकता है।

क्या जेल भेज रही दाढ़ी रखने वालो को पुलिस?
रिपोर्टों के अनुसार, ताशकंद और अन्य शहरों में पुलिस दाढ़ी रखने वाले पुरुषों को हिरासत में ले रही है और उन्हें जबरन दाढ़ी कटवाने के लिए मजबूर कर रही है। कुछ मामलों में, लोगों को चेतावनी दी गई है कि अगर उन्होंने अपनी दाढ़ी नहीं कटवाई, तो उन्हें जेल भेज दिया जाएगा। पुलिस ने इन दावों का खंडन किया है और कहा है कि उनकी उपस्थिति सिर्फ सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने के लिए है।

हालांकि, स्थानीय और अंतर्राष्ट्रीय मानवाधिकार समूहों ने चिंता जताई है कि उज़्बेकिस्तान में धार्मिक स्वतंत्रता को सीमित करने वाली यह नीति नई नहीं है, और यह देश के सुधारवादी कदमों के विपरीत है।

क्या है नए फरमान के पीछे उज़्बेक सरकार का तर्क?

उज़बेक सरकार ने इस प्रतिबंध को चरमपंथ से निपटने और धर्मनिरपेक्षता को बढ़ावा देने के प्रयास के तहत उचित ठहराया है। अधिकारियों का कहना है कि लंबी दाढ़ी जैसे धार्मिक पहचान के कुछ बाहरी प्रतीक चरमपंथ से जुड़े हो सकते हैं। इस नीति का उद्देश्य सार्वजनिक सुरक्षा सुनिश्चित करना और देश की धर्मनिरपेक्ष छवि बनाए रखना है। उज़्बेकिस्तान का इस्लामी पोशाक और प्रथाओं पर नकेल कसने का इतिहास रहा है, और यह प्रतिबंध उसी का विस्तार माना जा रहा है।

धार्मिक स्वतंत्रता पर सरकार की आलोचना
ह्यूमन राइट्स वॉच और अन्य अंतर्राष्ट्रीय संस्थाओं ने उज्बेक सरकार की आलोचना की है कि वह धार्मिक समूहों की मान्यता में बाधा डाल रही है और धार्मिक स्वतंत्रता पर लगाए गए प्रतिबंधों को कम करने के अपने वादों को पूरा नहीं कर रही है। उन्होंने उज़्बेकिस्तान में धार्मिक स्वतंत्रता की मौजूदा स्थिति को चिंताजनक बताया है, जहां लोग अपने विश्वासों को व्यक्त करने से डरते हैं।

उज़्बेकिस्तान में मुस्लिम शैली की दाढ़ी पर प्रतिबंध और इसके तहत की जा रही कार्रवाई ने धार्मिक स्वतंत्रता पर एक गंभीर बहस छेड़ दी है। सरकार इसे चरमपंथ से निपटने का एक उपाय बता रही है, जबकि आलोचक इसे धार्मिक और व्यक्तिगत स्वतंत्रता पर हमला मान रहे हैं। आने वाले समय में देखना होगा कि यह विवाद कैसे सुलझता है और उज़्बेकिस्तान में धार्मिक स्वतंत्रता का भविष्य क्या होता है।

6 पॉइंट्स में जानें उज्बेकिस्तान में दाढ़ी पर कानून क्या कहता है?

उज्बेकिस्तान में दाढ़ी को लेकर कोई सीधा और स्पष्ट कानून नहीं है, लेकिन पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी दाढ़ी रखने पर कुछ नियमों का पालन करने की बात करते हैं। यहां 6 मुख्य पॉइंट्स में जानते हैं कि उज्बेकिस्तान में दाढ़ी रखने को लेकर कानून और स्थिति क्या कहती है?

  • उज्बेकिस्तान में ऐसा कोई कानून नहीं है जो सीधे दाढ़ी रखने पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाता हो। हालांकि, कुछ स्थितियों में दाढ़ी को लेकर नियम लागू किए जाते हैं।
  • अक्टूबर 2023 में प्रशासनिक उत्तरदायित्व संहिता में संशोधन किया गया। इसमें ऐसे चेहरे को ढकने पर रोक लगाई गई जिससे किसी व्यक्ति की पहचान करना मुश्किल हो जाए।
  • पुलिस इस नए कानून का हवाला देकर दाढ़ी रखने वाले लोगों पर कार्रवाई करती है। उनका मानना है कि दाढ़ी से व्यक्ति की पहचान छिप सकती है, जो सुरक्षा के लिहाज से सही नहीं है।
  • इस कानून का उल्लंघन करने पर दुष्कर्म के रूप में 5.1 मिलियन सोम (लगभग 400 डॉलर) तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। यह जुर्माना वहां के औसत मासिक वेतन के करीब है।
  • अगर, कोई व्यक्ति पुलिस के दाढ़ी मुंडवाने के निर्देश का पालन नहीं करता है, तो उसे गुंडागर्दी और पुलिस के विरोध का अतिरिक्त आरोप भी झेलना पड़ सकता है।
  • ह्यूमन राइट्स वॉच की 2023 की एक रिपोर्ट के अनुसार, उज्बेकिस्तान में धार्मिक स्वतंत्रता पर अब भी काफी हद तक पाबंदी है। अधिकारियों का मानना है कि धार्मिकता की कुछ अभिव्यक्तियां "चरमपंथ" का रूप हो सकती हैं।
More From
Prev
Next
Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+