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USA Debt Crisis के कारण राष्ट्रपति जो बाइडेन के दौरे रद्द, G-7 के बाद एशिया टूर नहीं कर सकेंगे

अमेरिका में आर्थिक संकट गहराने की आशंका है। राष्ट्रपति जो बाइडेन के टूर कैंसिल होने की बात सामने आई है। व्हाइट हाउस की स्टेटमेंट के अनुसार USA Debt Crisis के कारण बाइडेन G-7 के बाद एशिया टूर नहीं कर सकेंगे।

USA Debt Crisis

USA Debt Crisis से जूझ रहा है। लंबी अटकलों के बाद अब व्हाइट हाउस से जारी बयान में साफ हो गया है कि राष्ट्रपति जो बाइडेन के दौरे रद्द हो चुके हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार बाइडेन G-7 के बाद एशिया टूर नहीं कर सकेंगे।

पापुआ न्यू गिनी, ऑस्ट्रेलिया यात्रा कैंसिल

अमेरिकी राष्ट्रपति के टूर कैंसिल होने पर समाचार एजेंसी ANI की रिपोर्ट के अनुसार, बाइडेन केवल जापान में G7 शिखर सम्मेलन में भाग लेने जाएंगे। पापुआ न्यू गिनी, ऑस्ट्रेलिया यात्रा कैंसिल हो गई है।

जी-7 बैठक के बाद स्वदेश लौट जाएंगे बाइडेन

बाइडेन इस सप्ताह जापान के हिरोशिमा में होने वाले ग्रुप ऑफ सेवन (जी7) शिखर सम्मेलन में शामिल होंगे। इसके बाद रविवार को अमेरिका लौट आएंगे। इसका मकसद कांग्रेस के नेताओं के साथ बैठकों में शामिल होना है।

कांग्रेस की बैठक में डेडलाइन का ध्यान जरूरी

मीटिंग का मकसद यह सुनिश्चित करने की कोशिश है कि कांग्रेस डिफ़ॉल्ट को टालने के लिए समय सीमा के भीतर कार्रवाई करे। आगामी दौरे के संबंध में राष्ट्रपति बाइडेन ने प्रधानमंत्री अल्बानीज से बात की।

पीएम मोदी कंगारुओं के देश नहीं जाएंगे

ऑस्ट्रेलिया के पीएम को यह सूचित किया गया कि वह ऑस्ट्रेलिया की अपनी यात्रा को स्थगित कर रहे हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री को आधिकारिक राजकीय यात्रा के लिए एक समय पर टीमों के बीच सहमति के लिए आमंत्रित किया।

जुड़ने के अन्य तरीके खोजने का प्रयास

राष्ट्रपति बाइडेन की टीम ने पापुआ न्यू गिनी की टीम के प्रधानमंत्री के साथ भी बातचीत कर दौरा रद्द होने की बात शेयर की। व्हाइट हाउस के प्रेस सचिव काराइन जीन-पियरे ने बयान में कहा, "हम आने वाले वर्ष में ऑस्ट्रेलिया, क्वाड, पापुआ न्यू गिनी और पैसिफिक आइलैंड्स फोरम के नेताओं के साथ जुड़ने के अन्य तरीके खोजने के लिए तत्पर हैं।"

दौरा कैंसिल होने से पहले ही सहमी अमेरिकी मीडिया

अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन ने ऑस्ट्रेलिया और पापुआ न्यू गिनी की अपनी प्रस्तावित यात्रा रद्द होने से पहले व्हाइट हाउस ने बाइडेन की यात्रा रद्द करने का संकेत दिया था। इसकी खबर अमेरिकी मीडिया में आई थी।

डिफेंस प्रवक्ता ने बताया- बाइडेन के जापान रवाना होने का समय

व्हाइट हाउस के राष्ट्रीय सुरक्षा प्रवक्ता जॉन किर्बी के इस बयान के बारे में कहा था गया कि बाइडेन निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार बुधवार को जापान के लिए प्रस्थान करेंगे, लेकिन ऑस्ट्रेलिया की यात्रा आगे खिसकाने का पुनर्मूल्यांकन किया जा रहा है।

यात्रा रद्द होने से पहले का बयान

किर्बी ने कहा था, "हम अभी पूरी यात्रा पर काम कर रहे हैं, बाकी यात्रा पर विचार कर रहे हैं।" बयान में कहा गया, "यह देखते हुए कि अमेरिका की वर्तमान स्थिति क्या है, राष्ट्रपति के लिए टूर पर दोबारा विचार करना अविश्वसनीय रूप से विवेकपूर्ण और जिम्मेदारी भरा फैसला है।"

जापान के प्रधानमंत्री से मुलाकात

किर्बी ने कहा, राष्ट्रपति बाइडेन का दौरा स्थगित होना उनकी प्राथमिकताओं के बारे में स्पष्ट बयान के कम नहीं है। किर्बी ने जोर देकर कहा कि बाइडेन हिरोशिमा में जी-7 शिखर सम्मेलन में जापानी प्रधानमंत्री फुमियो किशिदा के साथ मुलाकात करेंगे। जब वह आर्थिक सभा में होंगे उसी समय बाइडेन भारत के प्रधानमंत्री- नरेंद्र मोदी और ऑस्ट्रेलिया के एंथनी अल्बानीज - के साथ भी जुड़ेंगे।

बाइडेन को किन देशों के टूर पर जाना था

रिपोर्ट्स के अनुसार, बाइडेन शुक्रवार से शुरू हो रहे जी7 नेताओं के तीन दिवसीय शिखर सम्मेलन में शामिल होने वाले थे। बाद में, उन्हें पापुआ न्यू गिनी की ऐतिहासिक यात्रा पर जाना था। इसके बाद जापान, ऑस्ट्रेलिया, भारत और क्वाड देशों के रूप में जाने जाने वाले अमेरिकी समूह की बैठक के लिए ऑस्ट्रेलिया की यात्रा करनी थी।

31.4 ट्रिलियन USD की ऋण सीमा

भारत, जापान और ऑस्ट्रेलिया के नेताओं के साथ सिडनी में QUAD शिखर सम्मेलन में भाग लेने का भी कार्यक्रम था। अमेरिका में ऋण सीमा संकट के बीच रिपब्लिकन और डेमोक्रेट सांसद 31.4 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर की ऋण सीमा को और बढ़ाने उठाने के लिए एक समझौते पर पहुंचने में विफल रहे हैं, क्योंकि बातचीत जारी है।

एक जून से पहले ही करना होगा सबकुछ

बता दें कि अमेरिकी ट्रेजरी ने आगाह किया है कि अगर बाइडेन प्रशासन / अमेरिकी सरकार 1 जून से पहले कोई बड़ा सौदा नहीं कर सकी तो देश डिफॉल्ट हो सकता है। अगर ऐसा हुआ तो अमेरिका समेत वैश्विक अर्थव्यवस्था के गंभीर परिणाम हो सकता है।

ऐतिहासिक अमेरिकी डिफॉल्ट को टालने की कवायद

रिपोर्ट्स के अनुसार, अमेरिका में ऐतिहासिक डिफ़ॉल्ट को टालने के लिए देश की उधार सीमा बढ़ाने की बातचीत अभी तक हल नहीं हुई है। व्हाइट हाउस ने स्पष्ट कर दिया था कि अमेरिका दायित्वों पर डिफॉल्टर बना तो इसके बेहद हानिकारक प्रभाव होंगे। ये आर्थिक चिंताओं से परे हैं।

राष्ट्रीय सुरक्षा के मोर्चे पर भी बड़ी चुनौती

किर्बी ने संभावित अमेरिकी डिफ़ॉल्ट पर कहा था कि "यह निश्चित रूप से, राष्ट्रीय सुरक्षा के दृष्टिकोण से, हानिकारक प्रभाव होगा।" उन्होंने कहा, इससे अमेरिका की प्रतिष्ठा और दुनिया भर में खड़े होने के संदर्भ में रूस और चीन जैसे राष्ट्रों को भी भयानक मौके मिलेंगे।

चीन और रूस अमेरिका का मजाक बनाएंगे

अमेरिका के कंगाल होने की तरफ इशारा कर रूस-चीन इसे हाइलाइट कर सकेंगे, उन्हें इससे बेहतर कुछ भी नहीं आएगा और वे दुनिया से कहेंगे- 'देखा? अमेरिका एक विश्वसनीय नहीं है। अमेरिका दुनिया भर में शांति और सुरक्षा का एक स्थिर नेता भी नहीं है।"

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