अफगानिस्तान में आखिरी ड्रोन स्ट्राइक, क्या अमेरिका ने एक बेगुनाह को गलती से उड़ाया? वीडियो में सबूत

क्या अमेरिका ने काबुल में गलत ड्रोन स्ट्राइक किया था, जिसमें एक बेगुनाह की मौत हो गई थी?

काबुल, सितंबर 11: अफगानिस्तान से अमेरिका निकल चुका है, लेकिन एक वीडियो ने अमेरिका के आतंकियों पर किए गये ड्रोन अटैक को सवालों के घेरे में ला दिया है। दावा किया जा रहा है कि अमेरिका ने अफगानिस्तान में किए गये आखिरी ड्रोन स्ट्राइक में एक बेगुनाह को उड़ा दिया। दावा किया गया है कि आखिर ड्रोन स्ट्राइक में अमेरिका ने एक निर्दोष व्यक्ति को मार दिया है। ये दावा न्यूयॉर्क टाइम्स ने कई परिवारों से बात करने के बाद की है।

अमेरिका का दावा गलत

अमेरिका का दावा गलत

दरअसल, न्यूयॉर्क टाइम्स ने करीब एक दर्जन परिवारों, उनके दोस्तों और ड्राइवर्स से बात करने के बाद रिपोर्ट तैयार की है। जिसमें कहा गया है कि अमेरिकी सेना ने एक निर्दोष सहायता कर्मी को ड्रोन हमले में उड़ा दिया। न्यूयॉर्क टाइम्स ने अपनी रिपोर्ट में दावा किया है एयरस्ट्राइक के बाद पेंटागन ने झूठ बोला है। आपको बता दें कि अमेरिका ने आईएसआईएस-खुरासन के आतंकियों पर हमले का दावा किया था, जिसमें 11 लोग मारे गये थे। बाद में रिपोर्ट आई थी कि अमेरिकी हमले में एक ही परिवार के 10 लोग मारे गये थे। मरने वाले लोगों में एक ही परिवार के 7 बच्चे शामिल थे। अमेरिकी ड्रोन हमले में अहमदी नाम के शख्स भी मारे गये थे, जिन्होंने बतौर टेक्निकल इंजीनियर के तौर पर अफगानिस्तान के न्यूट्रिशन एंड एजुकेशन इंटरनेशनल चैरिटी ग्रुप के साथ काम किया था। इस सगठन का काम अफगानिस्तान के भूखे लोगों को खाना खिलाना था।

पानी ले जाते वक्त गिरा बम

पानी ले जाते वक्त गिरा बम

दरअसल, अमेरिका ने ड्रोन हमले के बाद कहा था कि उसने एक ऐसे आतंकवादी को मार गिराया है, जो अमेरिकी सैनिकों की तरफ कार में बम लेकर आ रहा था और उसका संबंध आईएसआईएस के साथ था। लेकिन, न्यूयॉर्क टाइम्स ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि मृतक एक निर्दोष इंजीनियर था, जिसका आतंकी संगठन आईएसआईएस से कोई संबंध नहीं था और वो अपने परिवार के लिए पानी लेकर जा रहा था। इसके साथ ही अमेरिकी सैनिकों के इस दावे को भी न्यूयॉर्क टाइम्स ने झूठा कहा है, जिसमें अमेरिका की तरफ से दावा किया गया था कि हमले में सिर्फ 3 लोग ही मारे गये हैं। अमेरिकी अखबार ने कहा है कि अमेरिका के हमले में 10 और लोग मारे गये थे, जिनमें 7 बच्चे शामिल थे। वहीं अमेरिका के ज्वाइंट चीफ ऑफ स्टाफ मार्क मिले ने कहा था कि एक सेकेंडरी विस्फोट इस बात की पुष्टि करती है कि अहमदी की कार में विस्फोटक भरा हुआ था। ऐसे में सवाल ये उठता है कि आखिर सच क्या है? क्या अमेरिकी सेना एयरस्ट्राइक के बारे में झूठ बोल रही है

अमेरिका की बहानेबाजी?

अमेरिका की बहानेबाजी?

वहीं, फॉक्स न्यूज के मुताबिक अमेरिकी सेन्ट्रल कमांड को विश्वास है कि अमेरिकी सेना ने जो एयरस्ट्राइक की थी वो खुफिया जानकारी पर आधारित थी और सैनिकों को पूरा यकीन था कि जो ड्राइवर कार चला रहा था, उसके इरादे काफी बुरे थे। न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट पर टिप्पणी करते हुए पेंटागन के प्रवक्ता जॉन किर्बी ने कहा कि यूएस सेंट्रल कमांड ने "हमले का आकलन करना" जारी रखा है।'' उन्होंने कहा कि, 'एयरस्ट्राइक खुफिया जानकारी के आधार पर आधारित थी, और हमारा मानना है कि इस ड्रोन अटैक के बाद हमने बहुत बड़े हमले को रोकने का काम किया है। ये हमला काबुल एयरपोर्ट पर होने वाला था और हमने बहुत बड़े हमले को रोकने का काम किया है'। न्यूयॉर्क टाइम्स ने हालांकि, अपनी रिपोर्ट में ये भी कहा है कि इस्लामिल स्टेट के आतंकियों ने हमला करने के लिए जिस कार का इस्तेमाल किया था, वो कार हूबहू मृतक अहमदी के टोयोटा कोरोला जैसा ही था।

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