चांद पर तबाही मचाने की इंसानों की तैयारी, चंद्रमा की कक्षा में विध्वंसक हथियारों की होगी तैनाती

एयरफोर्स रिसर्च लैबोरेट्री स्पेस वैहिकल निदेशालय ने एक हालिया रिपोर्ट में कहा है कि अमेरिकन सेना का मिलिट्री इंट्रेस्ट लगातार बढ़ रहा है और वो अब पृथ्वी की सतह से 10 गुना ज्यादा बढ़कर 2 लाख 72 हजार मील ऊपर चला जाएगा।

वॉशिंगटन, जून 28: चांद पर अभी इंसानों ने सिर्फ कदम रखा है, लेकिन चांद के लिए युद्ध की आशंका पूरी दुनिया पर मंडराने लगी है। रिपोर्ट है कि चांद पर जमीन के लिए बहुत बड़ी लड़ाई हो सकती है। और ये लड़ाई धरती पर नहीं, बल्कि या तो अंतरिक्ष में होगी या फिर चांद पर। यानि, इंसानों ने ब्रह्मांड में तबाही लाने का इंतजाम करना शुरू कर दिया है।

चांद पर लड़ेगा इंसान

चांद पर लड़ेगा इंसान

एयरफोर्स रिसर्च लैबोरेट्री स्पेस वैहिकल निदेशालय ने एक हालिया रिपोर्ट में कहा है कि अमेरिकन सेना का मिलिट्री इंट्रेस्ट लगातार बढ़ रहा है और वो अब पृथ्वी की सतह से 10 गुना ज्यादा बढ़कर 2 लाख 72 हजार मील ऊपर चला जाएगा। जिसकी वजह से प्राइवेट और पब्लिक हितों का भारी टकराव होने की संभावना बन रही है और इस बात की पूरी संभावना बन रही है कि चांद के लिए अगला युद्ध हो सकता है, क्योंकि अमेरिकी सैनिक अपनी मिलिट्री ताकत की दम पर चांद पर अपना वर्चस्व बनाने की कोशिश करेंगे। 'ए प्राइमर ऑन सिस्लुनर स्पेस' शीर्षक के साथ रिपोर्ट में कहा गया है कि, स्पेस फोर्स को 'अंतरिक्ष में अमेरिकी हितों की रक्षा और सुरक्षा' का काम सौंपा गया था, और इसे पहली बार दिसंबर 2019 में स्थापित किया गया था। लेकिन, अब अंतरिक्ष में काफी ज्यादा प्राइवेट और पब्लिक ऑपरेशंस होने लगे हैं और इसका दायरा बढ़ता हुआ चांद तक जा पहुंचा है, जिसकी वजह से अमेरिकन स्पेस फोर्स का प्रभाव अब चांद तक जा पहुंचा है, और अमेरिका इसे 'सुरक्षा और बचाने' के नाम पर अपने हितों की रक्षा कर रहा है।

चांद के रास्ते में हथियारों की तैनाती

चांद के रास्ते में हथियारों की तैनाती

futurism.com ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि अमेरिका आगे-आगे जा रहा है तो चीन ने चांद पर कब्जा करने की कोशिश के लिए अपनी रफ्तार काफी तेज कर दी है। इसके साथ ही पृथ्वी से चांद तक पहुंचने का जो रास्ता है, जिसे सिस्लुनर स्पेस कहा जाता है, उसी रास्ते से चीन भी चांद पर अपने कदम जमाना जमाना चाहता है और माना जा रहा है कि इस रास्ते को बचाने के नाम पर अमेरिका अपने स्पेसक्राफ्ट की तैनाती कर सकता है। जिसके जवाब में चीन भी अपने मिलिट्री एयरक्राफ्ट भेजेगा और फिर एक दिन पृथ्वी से चंद्रमा के रास्ते में लड़ाई की स्थिति बन जाएगी।

अमेरिका से एक कदम आगे चीन

अमेरिका से एक कदम आगे चीन

रिपोर्ट में कहा गया है कि अमेरिका तो फिर भी बात सुनने को तैयार हो जाता है, लेकिन चीन किसी की बात सुनता नहीं है। वहीं, 2018 में एयरफोर्स नेशनल एयर एंड स्पेस इंटेलीजेंस के स्पेस एंड मिसाइल एनालिसिस ग्रुप के सीनियर इंटेलीजेंस इंजीनियर ने कहा था कि उन्होंने एक 'ओपेन प्रेस' में एक रिपोर्ट देखी है, जिसमें कहा गया है कि 'चीनियों के पास एक रिले उपग्रह है जो चंद्रमा के फ़्लिपसाइड के चारों ओर उड़ रहा है और यहीं से खतरे की कहानी शुरू होती है।' उन्होंने कहा कि 'आप किसी हथियार को चंद्रमा की कक्षा में उड़ा सकते हैं और वो वापस आपके पास आ जाता है' उन्होंने कहा कि 'ये कोई भी देश कर सकता है और चंद्रमा की कक्षा में विध्वंसक हथियार छोड़ सकता है, और इसपर नजर नहीं रखी जा सकती है।' रिपोर्ट के मुताबिक एआरएफएल ने एक स्पेसफ्लाइट को एक्सपेरिमेंट के तौ पर सिस्कुलर स्पेस डोमेन में भेजा है, ताकि चांद की कक्षा में घूमने वाले किसी ऑब्जेक्ट पर नजर रखा जा सके, लेकिन अभी यह एक्सपेरिमेंट के दौर में ही है।

कैसा होगा अंतरिक्ष में युद्ध ?

कैसा होगा अंतरिक्ष में युद्ध ?

द ड्राइव ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि 'हम आशा करते हैं, उम्मीद करते हैं कि यह ज्यादा से ज्यादा शीत युद्ध जैसा हो और हम उम्मीद करते हैं कि कोई भी देश अंतरिक्ष में विनाशकारी हथियारों की तैनाती ना करे। हम सिर्फ आशा ही नहीं कर रहे हैं, बल्कि हम उस दिशा में काम भी कर रहे हैं कि अंतरिक्ष में विनाशकारी युद्ध की दिशा में दुनिया कदम बढ़ाना शुरू नहीं करे।' उन्होंने कहा कि 'अंतरिक्ष का युद्ध अलग तरह का होगा और इसमें वही जीतेगा, जो पहला वार करेगा। इसमें डिफेंड करने वालों के हाथ में कुछ नहीं रहेगा। जो पहला हमला करेगा, उसी को फायदा होगा। और हमने ऐसा पहले भी देखा है, जब दुनिया में न्यूक्लियर बम गिराया गया था, जिसमें एक देश के पास जवाबी कार्रवाई करने की क्षमता ही नहीं रही। और अंतरिक्ष युद्ध तो उससे भी भयंकर होगा।'

चंद्रमा के रास्ते में मिलिट्री प्लानिंग

चंद्रमा के रास्ते में मिलिट्री प्लानिंग

22 जून को पब्लिश रिपोर्ट में बताया गया है कि चंद्रमा की कक्षा में लड़ाई लड़ने के लिए किस तरह की मिलिट्री प्लानिंग हो रही है, पृथ्वी की कक्षा के बाहर किस तरह के स्पेसक्राफ्ट तैनात किए जाएंगे, और किस तरह से उस क्षेत्र में यात्रा की जाएगी, जो चंद्रमा के वातावरण से जुड़ा हुआ है। इस रिपोर्ट को मिलिट्री स्पेस प्रोफशनल्स के लिए लिखा गया है, जिन्हें उस रहस्यमयी और पूरी तरह से अंजाम रास्तों के लिए स्पेसक्राफ्ट तैयार करने पड़ सकता है। इस रिपोर्ट से उन्हें बेहतर समझ मिलेगी कि सिस्लुनर स्पेस क्या है और वहां पर उन्हें किस तरह की चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा। रिसर्च के बाद जारी रिपोर्ट के मुताबिक सिस्लुनर स्पेस में प्रवेश करने के लिए, अंतरिक्ष यान और उपग्रहों की प्लानिंग और ट्रैकिंग के लिए नए मॉडल की आवश्यकता होगी और सैन्य और नागरिक अंतरिक्ष एजेंसियों को अपने 'अंतर्ज्ञान और दूरी और समय की भावना' के मुताबिक बदलना होगा और उन्हें किस हद तक विस्तार करना है, उसका पता सिस्लुनर स्पेस में पहुंचने पर ही पता चल पाएगा।

स्पेस फोर्स का निर्माण

स्पेस फोर्स का निर्माण

अमेरिका में जब डोनाल्ड ट्रंप राष्ट्रपति हुआ करते थे, उस वक्त यानि 2019 में स्पेस फोर्स का निर्माण किया गया था। इसके लिए अमेरिका की मिलिट्री के एक हिस्से को सिर्फ स्पेस में काम करने और युद्ध की प्लानिंग के लिए तैनात किया गया था। उस वक्त अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा था कि 'बात जब अमेरिका की रक्षा की आता है, तो स्पेस में सिर्फ अमेरिका की उपस्थिति ही होना काफी नहीं है इसीलिए, स्पेस में अमेरिका का प्रभुत्व होना चाहिए।' डोनाल्ड ट्रंप ने कहा था कि 'हमारे पास अंतरिक्ष के लिए अलग वायुसेना होगी, हमारे पास अलग से स्पेस सैनिक होंगे और यह भविष्य के लिए काफी ज्यादा महत्वपूर्ण होने वाला है'। स्पेस फोर्स के गठन के लिए 2019 में डोनाल्ड ट्रंप की सरकार ने 738 बिलियन डॉलर का डिफेंस फंड जारी किया था। जिसमें कहा गया था कि एयरफोर्स में ट्रेनिंग लेने वाले नये छात्रों को शुरू से ही स्पेस में भेजा जाए और उन्हें नये तरह से तैयार किया जाए।

नासा के साथ स्पेस फोर्स

नासा के साथ स्पेस फोर्स

रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिका की स्पेस एजेंसी नासा के साथ अमेरिकन स्पेस फोर्स ने पिछले साल एक समझौता भी किया है। जिसके तहत नासा ने इस साल 13 जून को स्पेस फोर्स के 'स्पेस डोमेन अवेयरनेश' मिलिट्री सैटेलाइट को कामयाबी के साथ लॉन्च किया है। वहीं माना जा रहा है कि अगर अमेरिका ने स्पेस फोर्स का निर्माण किया हुआ है तो भला चीन कब तक पीछे रह सकता है। चीन अगले साल तक अपना अलग स्पेस स्टेशन तैयार कर लेगा और इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता है कि चीन ने भी स्पेस के लिए अलग सेना और हथियार का निर्माण करना शुरू कर चुका हो।

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