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US Election 2024: कॉकस के बाद प्राइमरी भी जीत गए डोनाल्ड ट्रंप, जानिए दोनों चुनावों में क्या है अंतर?

US Election 2024: विश्व की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था अमेरिका में इस साल 5 नवंबर को राष्ट्रपति चुनाव होने जा रहा है। 5 नवंबर को होने वाले चुनाव को लिए रिपब्लिकन और डेमोक्रेटिक पार्टी में उम्मीदवारी के लिए चुनाव चल रहे हैं।

पिछले सप्ताह आयोवा कॉकस जीतने के बाद डोनाल्ड ट्रंप ने मंगलवार को न्यू हैंपशायर में हुआ प्राइमरी चुनाव भी जीत लिया है। वोट की गिनती पूरी होने से पहले ही उन्हें लगभग 55 फीसदी वोट मिल चुके थे, जबकि भारतीय मूल की निक्की हेली को 42 फीसदी वोट हासिल हुए।

Difference between caucus and primary

डोनाल्ड ट्रंप के इस चुनाव में जीतने की उम्मीद पहले से की जा रही थी। हालांकि ये अंतर बहुत बड़ा नहीं है। इसलिए आगे भी हेली ने मैदान में टिके रहने की घोषणा की है। लेकिन अगर कुछ अप्रत्याशित न हुआ तो हम उम्मीद कर सकते हैं कि एक बार दुनिया फिर से ट्रंप और बाइडेन के बीच मुकाबला देखने जा रही है।

इस चुनाव पर सिर्फ अमेरिका ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया की नजर होगी। लिहाजा, हम अमेरिकी चुनाव को लेकर अपने पाठकों के लिए स्पेशल सीरिज चला रहे हैं। इसमें हम अमेरिकी चुनाव से संबंधित महत्वपूर्ण और दिलचस्प जानकारियां आपसे शेयर कर रहे हैं। आज इस सीरिज का सातवां भाग हम प्रकाशित कर रहे हैं। हमें उम्मीद है, कि हमारी ये सीरिज आपको काफी पसंद आ रही होगी। आज हम आपको कॉकस और प्राइमरी चुनाव में अंतर के बारे में बताएंगे।

Caucus vs. Primary

आपको बता दें कि अमरीकी चुनाव में राष्ट्रपति पद के लिए नामांकन प्रक्रिया बेहद जटिल, लंबी और महंगी है। हर चार साल बाद डेमोक्रेटिक और रिपब्लिकन पार्टी की उम्मीदवारी हासिल करने के लिए लोग प्रयास करते हैं। इसके लिए उन्हें आम चुनाव से पहले सभी राज्यों में प्राइमरी और कॉकस चुनाव में बेहतर प्रदर्शन करना होता है। इस साल प्राइमरी-कॉकस चुनाव 25 जनवरी से शुरू हुआ जो 5 जून तक चलेगा।

2024 में कॉकस कैलेंडर की शुरुआत 15 जनवरी को और प्राइमरी कैलेंडर की शरुआत 23 जनवरी को हुई। दोनों ही चुनावों में डोनालंड ट्रंप पहले नंबर पर रहे। आपको बता दें कि हर राज्य में प्राइमरी और कॉकस चुनाव जीतने के बाद उम्मीदवारों को निश्चित संख्या में डेलिगेट्स का समर्थन हासिल होता है।

जो उम्मीदवार महीनों चलने वाली इस प्रक्रिया में अपनी पार्टी के डेलिगेट्स की तय संख्या अपने पक्ष में कर लेता है वह नॉमिनेशन हासिल कर लेता है। इसका अर्थ है कि उसे पार्टी का औपचारिक उम्मीदवार घोषित कर दिया जाता है। इसके बाद से ही अमरीका में चुनाव कैंपेन शुरू हो जाता है।

कॉकस क्या है?

कॉकस किसी पार्टी का अपना एक इवेंट होता है। कॉकस का आयोजन स्कूल जिम, टाउन हॉल समेत अन्य सार्वजनिक स्थानों पर होता है। इनका आयोजन दोनों प्रमुख पार्टियां करती हैं। कॉकस में होने वाले खर्च भी पार्टियों को ही वहन करना होता है। इस बैठक में रजिस्टर्ड पार्टी मेंबर्स जुटते हैं और राष्ट्रपति उम्मीदवारों के चयन को लेकर समर्थन देने पर बात करते हैं।

कॉकस में पार्टी के प्रतिनिधि हाथ उठाकर या पर्ची डालकर वोटिंग कर सकते हैं। इसमें पार्टी की ही एक टीम ऑब्जर्वर की तरह काम करती है। कॉकस में हिस्सा लेने वाले लोग तकनीकी रूप से राष्ट्रपति प्रत्याशी नहीं चुनते हैं बल्कि वे डेलिगेट्स का चुनाव करते हैं।

70 के दशक के पहले अधिकतर राज्यों में डेलिगेट्स का चुनाव कॉकस के जरिए होता था लेकिन 1972 में सुधार के बाद नामांकन प्रक्रिया को अधिक समावेशी और पारदर्शी बनाया गया। इसके बाद अधिकांश राज्यों ने प्राइमरी को अपना लिया।

जैसा कि बताया गया है कि अधिकांश राज्यों में प्राइमरी चुनाव होते हैं लेकिन लेकिन आयोवा, लुइसियाना, मिनेसोटा, अलास्का, कोलोराडो, हवाई, कंसास, नॉर्थ डकोटा, व्योमिंग, नेवादा और मेन जैसे राज्य कॉकस सिस्टम का उपयोग करते हैं।

कॉकस के बारे में कहा जाता है कि ये प्रारूप उन उम्मीदवारों के पक्ष में जाता है जिनके पास समर्पित और संगठित अनुयायी हैं क्योंकि समर्पित स्वयंसेवकों का एक छोटा समूह कॉकस की खुली सेटिंग में एक बड़ा प्रभाव डाल सकता है। ऐसा कहा जा सकता है कि ट्रंप जैसे कद्दावर नेताओं के लिए कॉकस बेहतर विकल्प है।

donald trump Election

प्राइमरी क्या है?

प्राइमरी को कॉकस की तुलना में अधिक उदार चुनाव माना जाता है। इसका चुनाव कहीं भी नहीं हो सकता बल्कि इसके लिए एक नियमित पोलिंग स्टेशन होता है। इसमें जो खर्च आता है उसका भुगतान पार्टी नहीं बल्कि स्टेट करती है।

प्राइमरी इलेक्शन में बिल्कुल वही वोटिंग प्रोसेस होता है, जो आम चुनाव में अपनाया जाता है। हालांकि कुछ राज्य केवल पंजीकृत पार्टी सदस्यों को ही वोट देने की अनुमति देते हैं। वहीं, कुछ राज्य सभी लोगों को वोट की अनुमति देते हैं। ऐसे में प्राइमरी में एक पार्टी का कार्यकर्ता दूसरी पार्टी के चुनाव में भी वोट डाल सकता है।

जिन राज्यों में कॉकस चुनाव नहीं होता वहां प्राइमरी चुनाव होते हैं। कुछ राज्य ऐसे भी हैं जहां प्राइमरी-कॉकस दोनों का संयोजन होता है।

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