सऊदी दरबार में आज विश्व के सबसे शक्तिशाली नेता, प्रिंस सलमान को क्यों नहीं झुका पाया अमेरिका?
राष्ट्रपति का पद संभालने के बाद जो बाइडेन ने सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान से टेलीफोन पर बात करने से इनकार कर दिया था।
वॉशिंगटन, जुलाई 15: सऊदी अरब के शक्तिशाली क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान चार साल पहले पत्रकार जमाल खशोगी की हत्या पर अंतरराष्ट्रीय आक्रोश के बावजूद और भी ज्यादा शक्तिशाली बनकर उभरे हैं और इन चार सालों में अमेरिका समेत तमाम पश्चिमी देशों ने सऊदी क्राउन प्रिंस को झुकाने के लिए हर दांव खेल लिया, लेकिन सारे साम-दाम-दंड और भेद फेल हो गये और अब वही देश सऊदी क्राउन प्रिंस का साथ चाह रहे हैं। अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडेन, जिन्होंने सऊदी क्राउन प्रिंस से बात तक करने से इनकार कर दिया था, वो अब खुद अमेरिका से उड़कर प्रिंस के दरबार में हाजिरी लगाने पहुंच रहे हैं, ताकि प्रिंस पिघल जाएं, लेकिन सवाल ये है, कि क्या प्रिंस सलमान अमेरिका की मनुहार से पिघलेंगे?

प्रिंस सलमान के सामने झुक गये बाइडेन!
राष्ट्रपति का पद संभालने के बाद जो बाइडेन ने सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान से टेलीफोन पर बात करने से इनकार कर दिया था। वहीं, बाइडेन ने उस फाइल को भी खुलवाया, जिसमें सऊदी अरब के पत्रकार जमाल खशोगी की हत्या की कहानी दर्ज थी और बाइडेन ने कहा, कि वो राजकुमार सलमान हैं, जिनके हाथ जमाल खशोगी के खून से रंग हैं, लेकिन अब जो बाइडेन खुद चलकर सऊदी अरब जा रहे हैं, जहां वो प्रिंस सलमान के सामने पेट्रोलियम पदार्थों के लिए मनुहार करेंगे। अमेरिका से सऊदी अरब को 'अछूत' बनाने की हर कोशिश कर लगी, लेकिन वो प्रिंस सलमान को झुका नहीं पाया। अमेरिका के राष्ट्रपति बाइडेन यूरोपीय नेताओं के नक्शेकदम पर चलते हैं, जिन्होंने 2018 में इस्तांबुल में जमाल खशोगी की हत्या में सऊदी राज परिवार का हाथ बताकर निंदा की थी, लेकिन अब उन्होंने कहा कि, कि वे वैश्विक ऊर्जा दिग्गज और इसके वास्तविक शासक की अनदेखी नहीं कर सकते हैं।

राजा बगैर बिना ही छोड़ी अमिट छाप
सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान, जो अभी सिर्फ 36 साल के हैं, वो अभी भी अपने बुजुर्ग पिता किंग सलमान से सत्ता अपने हाथ में लेने के लिए प्रतिक्षा कर रहे हैं, लेकिन इस 'राजकुमार' ने पहले ही अपने राज्य और मध्य पूर्व के साथ साथ पूरी दुनिया पर अपनी छाप छोड़ी है। उन्होंने इस क्षेत्र में एक अधिक सशक्त विदेश नीति का पालन करते हुए घर पर नियंत्रण के लिए अविश्वसनीय काम किया है, जिन्हें अमेरिका लाख कोशिशों के बाद भी झुका नहीं पाया और जिन्होंने अपने घर में अपने विरोधियों को बहुत ही बारीकि से सफाया कर दिया। उन्होंने ऐसे कदम उठाए हैं, जिन्होंने प्रशंसकों को प्रसन्न किया है, रियाद के पारंपरिक सहयोगियों को परेशान किया है और मानवाधिकार अधिवक्ताओं को चौंका दिया है। हालांकि, जमाल खशोगी की हत्या निश्चित तौर पर प्रिंस सलमान के सफेद लिबास पर लाल धब्बा है, लेकिन उन्होंने अपने ऊपर लगे आरोपों को नकारा है, लेकिन एक नेता के तौर पर उन्होंने इसकी अंतिम जिम्मेदारी स्वीकार की है।

अर्थव्यवस्था को कुशलता से संभाला
हालांकि, जमाल खशोगी की हत्या ने दुनियाभर के आलोचकों को विचलित कर दिया, लेकिन दूसरी तरफ क्राउन प्रिंस ने 'इस्लाम के सबसे पवित्र घर में' इस्लामिक रूढ़िवादियों की ही चूलें हिला दीं और देश में सुधार के लिए नये मिशन पर काम किया, जिसने आलोचकों को हैरान कर दिया, कि भला एक मुस्लिम देश में मस्जिदों के ऊपर लगे लाउडस्पीकर की आवाज कैसे खामोश हो सकती है। वो क्राउन प्रिंस का आदेश था, कि अजान पढ़ते वक्त लाउडस्पीकर बजाना जरूरी नहीं है और क्राउन प्रिंस ने ही आदेश दिए, कि रोजा के महीने में अब रेस्टोरेंट को बंद करने की जरूरत नहीं है और वो क्राउन प्रिंस का ही आदेश था, कि अब सऊदी अरब के बच्चे अपनी किताबों में हर धर्म के बारे में पढ़ाई करेंगे, गीता और रामायण पढ़ेंगे, योग करेंगे और अंग्रेजी सीखेंगे। उन्होंने अपने आलोचकों को दिखा दिया, कि वो देश की अर्थव्यवस्था को भी संभाल सकते हैं और आगे बढ़ा सकते हैं।

बाइडेन की सऊदी यात्रा का मतलब
कंसल्टेंसी यूरेशिया ग्रुप के आयहम कामेल ने इकोनॉमिक टाइम्स से कहा कि, 'जमाल खशोगी हत्याकांड के बाद पश्चिम ने एमबीएस(मोहम्मद बिन सलमान) के साथ बातचीत को सीमित कर दिया था, लेकिन बाइडेन की यात्रा के बाद अब एमबीएस से मिलने वालों का तांता लग जाएगा।' उन्होंने कहा कि, "वह (बाइडेन) सऊदी-अमेरिका संबंधों को पुनर्जीवित करने के लिए आए हैं, जो वर्तमान भू-राजनीतिक वातावरण में, यूक्रेन युद्ध के कारण, चीन प्रतिस्पर्धा की वजह से, ऊर्जा मुद्दों और सऊदी अरब के क्षेत्रीय प्रभाव के कारण, इस संबंध को ठीक करने की आवश्यकता है।" क्राउन प्रिंस की ही निगरानी में सऊदी सरकार की तेल कंपनी आरामको में सुधार लाया गया है, महिला कार्यकर्ताओं को जेल से बाहर किया गया है और महिलाओं को अधिकार दिए गये हैं और अब सऊदी अरब में किसी गैराज में किसी महिला कर्मचारी का दिख जाना आश्चर्य की बात नहीं रही। हालंकि, सऊदी क्राउन प्रिंस पर देश को यमन युद्ध में झोंकने का भी आरोप लगता है। हालांकि, अमेरिका अभी तक सऊदी अरब के साथ हथियार सौदा करने के लिए तैयार नहीं हो पाया है। लेकिन, जब मार्च 2020 में द अटलांटिक ने एक इंटरव्यू के दौरान प्रिंस से पूछा, कि बाइडेन ने आपको गलत समझा है, इसपर आप क्या कहेंगे, तो उनका एक लाइन का जवाब था, 'मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता है।'

सऊदी अरब में कैसे उभरे क्राउन प्रिंस?
साल 2015 में अपने पिता सलमान के सत्ता पर बैठने के बाद मोहम्मद बिन सलमान का सऊदी अरब में उदय हुआ और साल 2017 में सऊदी सत्ता का तख्तापलट करने की कोशिश करने वाले अपने बड़े चचेरे भाई को रास्ते से हटाकर क्राउन प्रिंस ने शाही परिवार के बाकी सभी सदस्यों को हाशिये पर डाल दिया। इसके साथ ही क्राउन प्रिंस का सऊदी की सरकार, सेना, पुलिस और खुफिया एजेंसियों पर पूर्ण नियंत्रण हो गया। उसी सास एमबीएस ने अपने परिवार के ही कई लोगों को गिरफ्तार किया और उन्हें भ्रष्टाचार विरोधी अभियान के तहत रियाद के रिट्ज-कार्लटन होटल में महीनों तक बंद रखा, जिससे देश और विदेश में सदमे की लहर दौड़ गई। हालांकि, इस दौरान अर्थव्यवस्था का विकास करने के लिए और रोजगार के अवसर मुहैया करने के लिए उन्होंने देश में वित्तीय सुधारों का लागू किया और नए उद्योगों को विकसित करने के उद्देश्य से व्यापक बदलावों की घोषणा की।

सऊदी युवाओं में काफी लोकप्रिय हैं एमबीएस
प्रिंस सलमान सऊदी अरब में युवाओं के बीच काफी लोकप्रिय माने जाते है और राजघराने के अंदर भी उनके काफी समर्थक हैं। हालांकि, इस दौरान शाही परिवार के कुछ लोग प्रिंस सलमान की सत्ता पर पकड़ को लेकर सवाल उठाते रहे हैं, साल 2019 में सऊदी तेल संयंत्रों पर अभूतपूर्व हमलों के बाद उनके नेतृत्व पर सवाल उठाया गया। मार्च 2020 में, अधिकारियों ने उनके चचेरे भाई, पूर्व क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन नायेफ और राजा के भाई प्रिंस अहमद को शाही कनेक्शन के साथ एक चाल में हिरासत में लिया, जिसका उद्देश्य सत्ता के आगे के हर 'कांटे' को हटाना था। लेकिन,अब जो बाइडेन की दो दिवसीय सऊदी अरब यात्रा पर पूरी दुनिया की निगाहें टिकी हैं। और सऊदी गैजेट ने अपनी रिपोर्ट में लिखा है, कि 'सऊदी यात्रा का उद्देश्य ऐतिहासिक द्विपक्षीय संबंधों और सऊदी अरब और अमेरिका के बीच प्रतिष्ठित रणनीतिक साझेदारी और सभी क्षेत्रों में उन्हें विकसित करने की आम इच्छा को और मजबूत करना है'। किंग सलमान द्वारा बुलाई गई अपनी तरह के पहले अरब-अमेरिकी शिखर सम्मेलन में शनिवार को बाइडेन भाग लेंगे। शिखर सम्मेलन में खाड़ी सहयोग परिषद (जीसीसी) राज्यों के नेताओं के साथ-साथ जॉर्डन के राजा अब्दुल्ला द्वितीय, मिस्र के राष्ट्रपति अब्देल फत्ताह अल-सीसी और इराकी प्रधान मंत्री मुस्तफा अल-कदीमी भी शामिल होंगे। शिखर सम्मेलन से पहले बाइडेन इन क्षेत्रीय नेताओं के साथ बैठक भी करेंगे।

बाइडेन की सउदी यात्रा का मकसद
अमेरिका के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जेक सुलिवन ने बुधवार को कहा कि, बाइडेन सऊदी अरब की यात्रा के दौरान किंग सलमान और क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान से मुलाकात करेंगे। सुलिवन ने पुष्टि की कि एक "द्विपक्षीय कार्यक्रम" शुक्रवार रात को आयोजित किया जाएगा, जब बाइडडेन पहुंचेंगे, और र इसमें किंग सलमान, क्राउन प्रिंस और "सऊदी सरकार के अन्य मंत्री" शामिल होंगे। सुलिवन ने खुलासा किया कि बाइडेन उनके साथ आगामी शिखर सम्मेलन से पहले कई क्षेत्रीय नेताओं के साथ द्विपक्षीय बैठकें करेंगे, और इन बैठकों के क्रम के बारे में एक सवाल का जवाब देने से इनकार कर दिया। जीसीसी +3 शिखर सम्मेलन में बिडेन क्या कहेंगे, इसका अवलोकन देने के लिए पूछे जाने पर, सुलिवन ने कहा, "राष्ट्रपति मध्य पूर्व के बारे में अपने दृष्टिकोण के बारे में व्यापक और मजबूत बयान और रणनीति देंगे।" उन्होंने यह भी कहा कि बिडेन सुरक्षा, अर्थव्यवस्था और क्षेत्र में अमेरिका की ऐतिहासिक भूमिका और मध्य पूर्व में मजबूत अमेरिकी नेतृत्व के साथ आगे बढ़ने की उनकी प्रतिबद्धता पर चर्चा करेंगे।












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