China की सबसे कमजोर नस को अमेरिका ने दबाया, ड्रैगन के 'चिप' को मारने खर्च करेगा $280 अरब

चीन भी इस सेक्टर को अपने कंट्रोल में करना चाहता है और अगले करीब 20 से 25 साल दुनिया के बाजारों पर उसी का राज होगा, जो सेमीकंडक्टर का सबसे बड़ा निर्माता होगा।

वॉशिंगटन, अगस्त 10: चीन की हलक से अगर चीख निकालनी है, तो उसके लिए उसके बाजार पर चोट करना सबसे ज्यादा जरूरी है और अमेरिका ने पहली बार चीन के 'चीप' को खत्म करने के लिए विशालकाय प्लान तैयार किया और इसके लिए अमेरिका ने 280 अरब डॉलर खर्च करने की मंजूरी दे दी है। अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन ने 280 अरब डॉलर के द्विदलीय विधेयक पर हस्ताक्षर कर दिए हैं, जो चीन के लिए बहुत बड़ा झटका साबित होने वाला है।

चीन को बहुत बड़ा झटका

चीन को बहुत बड़ा झटका

अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडेन ने 'डोमेस्टिक हाईटेक मैन्यूफैक्चरिंग' को बढ़ावा देने के लिए 280 अरब डॉलर के द्विदलीय विधेयक पर साइन कर दिए हैं, जिसका मकसद चीन के खिलाफ अमेरिकी प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देने के साथ साथ उसके चिप मार्केट का वर्चस्त खत्म कर देना है। सबसे खास बात ये है, कि इस कानून का समर्थन अमेरिका के नेताओं के साथ साथ अधिकारी, स्थानीय राजनेता औक व्यापारिक वर्ग कर रहा था और इसीलिए बाइडेन प्रशासन यह कानून लेकर आया है और इस कानून के तहत अमेरिका में सेमीकंडक्टर इंडस्ट्री सेक्टर को बढ़ावा देने के लिए निवेश को प्रोत्साहित किया जाएगा, ताकि अत्याधुनिक सेमीकंडक्टर तैयार किया जा सके।

सेमीकंडक्टर को लेकर 'जंग'

सेमीकंडक्टर को लेकर 'जंग'

चीन भी इस सेक्टर को अपने कंट्रोल में करना चाहता है और अगले करीब 20 से 25 साल दुनिया के बाजारों पर उसी का राज होगा, जो सेमीकंडक्टर का सबसे बड़ा निर्माता होगा। चीन ताइवान पर इसलिए भी कब्जा करना चाहता है, क्योंकि वहां की सिर्फ कंपनी ही दुनिया की 65 प्रतिशत सेमीकंडक्टर का उत्पादन करती है। लिहाजा, अब बाइडेन प्रशासन ने चिप इंडस्ट्री को अमेरिका का भविष्य बनाने का फैसला लिया है।

चिप इंडस्ट्री बनेगा अमेरिका का भविष्य

चिप इंडस्ट्री बनेगा अमेरिका का भविष्य

राष्ट्रपति बाइडेन ने रोज गार्डन समारोह में कहा कि, स्मार्टफोन से लेकर कंप्यूटर तक ऑटोमोबाइल तक सब कुछ को चलाने के लिए सेमीकंडक्टर की जरूरत है, लिहाजा अब अमेरिका में ही सेमीकंडक्टर का निर्माण होगा। इस कानून के तहत विशेष रूप से यू.एस. कंप्यूटर चिप क्षेत्र को मजबूत करने के लिए 52 अरब अमरीकी डालर का अलग से प्रावधान किया गया है। इस बिल को बनने में एक साल से ज्यादा का समय लगा है , लेकिन पिछले महीने के अंत में महत्वपूर्ण द्विदलीय मार्जिन के साथ कांग्रेस के दोनों सदनों में इसे मंजूरी दे दी गई। सीनेट ने इसे 64-33 पारित किया, जिसमें 17 जीओपी सीनेटरों ने इसका समर्थन किया, जबकि सदन ने जल्दी से 243-187 वोट के साथ इसे पारित कर दिया, जिसमें 24 हाउस रिपब्लिकन पक्ष में थे।

सेमीकंडक्टर की तत्काल बिक्री की मांग

सेमीकंडक्टर की तत्काल बिक्री की मांग

वहीं, व्हाइट हाउस ने मंगलवार को सेमीकंडक्टर माप के तत्काल प्रभावों की बिक्री शुरू करने की मांग की है। व्हाइट हाउस ने यह मांग उस वक्त की है, जब अमेरिका की मेमोरी चिप बनाने वाली एक प्रमुख कंपनी माइक्रोन ने मेमोरी चिप्स के घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए 40 अरब अमेरिकी डॉलर की योजना की घोषणा करने वाला है। वहीं, न्यूयॉर्क में चिप प्लांट का विस्तार करने के लिए क्वालकॉम और ग्लोबलफाउंड्रीज़ ने 4.2 अरब डॉलर का अतिरिक्त निवेश करने की घोषणा की है। बाइडेन प्रशासन ने बार-बार इस कानून को, चीन के बढ़ते प्रभाव का मुकाबला करने में एक महत्वपूर्ण घटक के रूप में चित्रित किया है और यह सुनिश्चित किया है, कि यू.एस. बीजिंग के खिलाफ प्रतिस्पर्धा में बढ़त बनाए रख सकता है, खासकर सेमीकंडक्टर निर्माण में।

चीन ने की बिल रोकने की कोशिश

चीन ने की बिल रोकने की कोशिश

अमेरिकी राष्ट्रपति दो बाइडेन ने इस बिल को अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए बेहद जरूर बताया और उन्होंने मंगलवार को एक और बड़ा खुलासा करते हुए कहा कि, चीन की सरकार ने अमेरिकी व्यापारिक घरानों के बीच इस बिल को रोकने के लिए जबरदस्त लॉबी बनाने की कोशिश की, लेकिन उसके बाद भी ये कानून बना और चीन की कोशिश नाकाम हो गई। चीन इस बात को बहुत अच्छे से जानता है, कि अभी भी टेक्नोलॉजी के मामले में अमेरिका, चीन से काफी आगे हैं और अगर अमेरिका चिप मार्केट में इतना बड़ा निवेश करेगा, तो चिप मार्केट में चीन बेचारा बन जाएगा, लिहाजा ड्रैगन के कमजोर नस पर इसबार अमेरिका ने पैर रख दिया है।

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