ट्रंप से अलग अमेरिकी एनएसए का मानना, चरमपंथी इस्लामिक आतंकवाद एक गलत शब्द
अमेरिकी राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) का मानना चरमपंथी इस्लामिक आतंकवाद एक सही शब्द नहीं है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से अलग है नए एनएसए की राय और हो सकता है।
वॉशिंगटन। अमेरिका के नए राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) एचआर मैक्मास्टर के एक नए बयान के बाद साफ है कि आने वाले समय में उनके और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच विरोधाभास हो सकता है। मैक्मास्टर का मानना है कि चरमपंथी इस्लामिक आतंकवाद एक सही शब्द नहीं है। सीबीएस न्यूज की ओर से इस बात की जानकारी दी गई है।

ट्रंप की राय में इस्लाम और आतंकवाद एक ही
ट्रंप ने हमेशा ही यह बात कही है कि अमेरिका पर आतंकवादी खतरा बढ़ गया है और उन्होंने हमेशा आतंकवाद को इस्लाम से जोड़ा है। ट्रंप ने अपने चुनावी अभियान में तो इस बात पर हैरानी जताई थी कि क्या पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा चरमपंथी इस्लामिक आतंकवाद शब्द क जिक्र करेंगे। फिर उन्होंने कहा था कि अगर वह ऐसा नहीं करेंगे तो फिर उन्हें तुरंत ही इस्तीफा दे देना चाहिए। मैक्मास्टर को एक ऐसे एनएसए के तौर पर देखा जा रहा है जो साइबर वॉर के जरिए अमेरिका पर आतंकवाद के खतरे को कम कर सकते हैं। टाइम मैगजीन ने लेफ्टिनेंट जनरल मैक्मास्टर को दुनिया के 100 प्रभावशाली लोगों की लिस्ट में 14वें नंबर पर रखा था। जहां अमेरिका के पूर्व एनएसए माइकल फ्लिन कई बार पाकिस्तान की आलोचना कर चुके हैं, लेकिन नए एनएसए का रुख पाकिस्तान को लेकर साफ नहीं है।
मैक्मास्टर नहीं रखते कोई इत्तेफाक
जो बात सबसे अहम है वह यह है कि जनरल एचआर मैक्मास्टर इस बात की वकालत करते आए हैं कि आतंकवाद से लड़ाई इस तरह से न हो कि वह इस्लाम के खिलाफ लड़ाई लगने लगे। वह विएतनाम वॉर पर अमेरिका की अलोचना कर चुके हैं और साथ ही इराक वॉर को लेकर नकारात्मक टिप्पणियां कर चुके हैं। कई लोगों को इस बात पर संदेह है कि जनरल मैक्मास्टर की राष्ट्रपति ट्रंप से बन भी पाएगी या नहीं? ट्रंप जहां इस्लाम को आतंकवाद के लिए दोषी ठहराते हैं तो वहीं उनके एनएसए इस बात से इत्तेफाक नहीं रखते हैं।












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