समंदर में सबसे खतरनाक शार्क! हाइपरसोनिक मिसाइल बनाने के करीब पहुंचा US, F-35, F-22 बन जाएंगे विनाशक
F-35, F-22: चीन और रूस को कड़ी टक्कर देने के लिए अमेरिका काफी समय से हाइपरसोनिक मिसाइल बनाने की तैयारी कर रहा है और ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका अब हाइपरसोनिक मिसाइल बनाने के काफी करीब पहुंच गया है।
अमेरिकी डिफेंस कंपनी लॉकहीड मार्टिन ने अपनी नई हाइपरसोनिक मिसाइल, MAKO के बारे में कई जानकारियां सार्वजनिक की है, जिसका नाम 'समुद्र में सबसे तेज शार्क' के नाम पर रखा गया है।

लॉकहीड मार्टिन ने कहा है, कि हाइपरसोनिक मिसाइलों को बनाने में काफी समय लगता है, खासकर उन कॉम्पैक्ट के लिए, जो कम दूरी के प्रक्षेपण के लिए स्टील्थ विमान के अंदर फिट किए जाते हैं।
लॉकहीड मार्टिन ने जो प्रेस रिलीज जारी किया है, उसमें कहा गया है, कि "लॉकहीड मार्टिन की मल्टी-मिशन MAKO मिसाइल निश्चित रूप से कोई उदाहरण नहीं है-यह सात वर्षों से डेवलपमेंट प्रोसेस में है। और हां, यह कॉम्पैक्ट और लेटेस्ट है। इसने अमेरिकी वायु सेना के पहले डिजिटल अधिग्रहण मिसाइल कार्यक्रम का भी समर्थन किया और शानदार प्रदर्शन किया है।"
F-35, F-22 फाइटर जेट में लगाई जाएगी हाइपरसोनिक मिसाइल
यदि अमेरिकी वायुसेना ने लॉकहीड मार्टिन के इस हाइपरसोनिक मिसाइल को अपने बेड़े में शामिल किया, जिसकी ज्यादा संभावना है, तो हवा से लॉंच होने वाली हाइपरसोनिक माको मिसाइल, दुनिया का पहला हाइपरसोनिक हथियार बन जाएगा, जिसे पांचवीं पीढ़ी के स्टील्थ लड़ाकू जेट विमानों, एफ-35 और एफ-22 रैप्टर के अंदर फिट करके उसे हथियार बे से दागा जा सकेगा।
इस मिसाइल को पहली बार इस साल अप्रैल में सार्वजनिक किया गया था, जब लॉकहीड मार्टिन ने रक्षा कंपनी कोएस्पायर के साथ मिलकर सी एयर स्पेस 2024 प्रदर्शनी में इसका अनावरण किया था। उस समय, लॉकहीड मार्टिन के मिसाइल और फायर कंट्रोल डिवीजन के सीनियर प्रोग्राम मैनेजर रिक लॉय ने कहा था, कि विभिन्न लड़ाकू विमानों और समुद्री गश्ती विमानों पर इलेक्ट्रॉनिक और फिजिकल रूप से इसका टेस्ट किया गया है।
वहीं, MAKO हाइपरसोनिक मिसाइल का लेटेस्ट डेवलपमेंट काफी महत्वपूर्ण है, क्योंकि ये हाइपरसोनिक मिसाइल बनाने में अमेरिकी डिफेंस कंपनियों की गंभीरता को दिखाता है, क्योंकि अमेरिका का हाइपरसोनिक मिसाइल कार्यक्रम, उसके दोनों दुश्मनों चीन और रूस से काफी पीछे चल रहा है, जो काफी हैरानी की बात है। अमेरिका के पिछले दोनों आधिकारिक हाइपरसोनिक मिसाइल टेस्ट फेल हो गये थे।
अमेरिका से काफी आगे निकल चुका है चीन
अमेरिका का मुख्य प्रतिद्वंद्वी चीन, यकीनन हाइपरसोनिक क्षमताओं के मामले में दुनिया का अग्रणी देश बन गया है। पिछले साल कम से कम दो चीनी हाइपरसोनिक हथियार सामने आए थे, DF-27 और YJ-21, जो एयरफोर्स वेरिएंट हैं। इस बीच, रूस ने पहले ही अपने दो हाइपरसोनिक हथियारों- किंजल और जिरकोन का इस्तेमाल यूक्रेनी सेना के खिलाफ युद्ध में किया है।
इसके विपरीत, अमेरिका ने अभी तक कोई हाइपरसोनिक हथियार नहीं बनाया है। कई टेस्ट में नाकामी के बाद US एयरफोर्स ने AGM-183 ARRW (एयर-लॉन्च रैपिड रिस्पांस वेपन) को छोड़ दिया और ऑस्ट्रेलिया के साथ मिलकर हाइपरसोनिक अटैक क्रूज मिसाइल (HACM) बनाने पर अपना ध्यान केंद्रित किया है। ऐसी रिपोर्ट है, कि इस मिसाइल का परीक्षण ऑस्ट्रेलिया में सुपर हॉर्नेट लड़ाकू विमान पर किया जाना है।
अमेरिकी सेना और अमेरिकी नौसेना अपने-अपने हाइपरसोनिक कार्यक्रमों पर काम कर रहे हैं। हालांकि, इस साल की शुरुआत में, अमेरिकी कांग्रेस के 'निगरानीकर्ता सरकारी जवाबदेही कार्यालय' ने खुलासा किया था, कि अमेरिकी सेना द्वारा लॉन्ग रेंज हाइपरसोनिक हथियार प्रणाली (LRHWS) की तैनाती को वित्तीय वर्ष 2025 तक के लिए टाल दिया गया है।
चीन और रूस के साथ हाइपरसोनिक हथियार के अंतर को पाटने के अमेरिकी रक्षा विभाग (डीओडी) को काफी देरी का सामना करना पड़ा है।
लिहाजा, लॉकहीड मार्टिन की इस घोषणा से अमेरिका को बड़ी उम्मीद मिली है और माना जा रहा है, कि इस कार्यक्रम के साथ लॉकहीड मार्टिन, हाइपरसोनिक हथियारों की रेस में वापस आ सकता है।
लॉकहीड मार्टिन ने अमेरिकी वायुसेना के स्टैंड-इन अटैक वेपन (SiAW) कार्यक्रम के लिए MAKO हाइपरसोनिक हथियार की पेशकश की है। हालांकि इसने फेज-2 में आगे नहीं बढ़ने का फैसला किया, लेकिन इसने कहा है, कि माको को वायुसेना की पहली पूरी तरह से डिजिटल अधिग्रहण मिसाइल के रूप में इसमें निवेश किए गए इनोवेशन और परिपक्वता प्रयासों से लाभ मिलता है।

लॉकहीड मार्टिन के MAKO हाइपरसोनिक मिसाइल को जानिए
22 जुलाई को लॉकहीड ने जो जानकारियां सार्वजनिक की हैं, उसके मुताबिक "समुद्र में सबसे तेज शार्क के नाम पर रखा गया MAKO, हर एक सेकंड में संवेदनशील लक्ष्यों पर हमला करता है।" मिशन की जरूरत के आधार पर, यह हाइपरसोनिक स्पीड से या उससे कम स्पीड पर हाई-वैल्यू टारगेट पर हमला कर सकता है। इसके अलावा, ये लेटेस्ट एयर डिफेंस सिस्टम को भी ध्वस्त कर सकता है।
लॉकहीड के मुताबिक, माको एक खुली, मल्टी-पर्पस हाइपरसोनिक मिसाइल है, जिसका उपयोग काउंटरएयर डिफेंस, समुद्री हमलों और अन्य हमलों के लिए किया जा सकता है। यह ऑपरेशल रूप से महत्वपूर्ण दूरी पर लॉन्च हो सकता है जो विमानों के बीच सुरक्षित स्टैंडऑफ दूरी सुनिश्चित करता है और इसे स्टैंड-इन स्ट्राइक के लिए पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमानों से तैनात किया जाता है।
1,300 पाउंड वजनी MAKO अपनी मल्टी-मिशन क्षमता को 13 इंच के चौड़े और 13 फीट लंबे एयरफ्रेम में फिट करने में कामयाब होता है। इसे F-35, F-22, F-15, F-16, F/A-18, P-8 और 30-इंच के लग्स से लैस किसी भी विमान में इस्तेमाल किए जाने लायक बनाया गया है। इसके अलावा इसे BRU-32 हेवी-ड्यूटी इजेक्टर रैक सहित कई विमानों में एकीकृत किया जा सकता है।
जब इस साल अप्रैल में कोएस्पायर बूथ पर पहली बार इसका अनावरण किया गया था, तो माको मिसाइल का एक मॉकअप F-35 लाइटनिंग II पांचवी पीढ़ी के स्टील्थ फाइटर जेट के ग्राफिक्स के साथ दिखाया गया था। माको, लॉकहीड मार्टिन की पहली पीढ़ी की मिसाइलों में से एक है जिसे पूरी तरह से डिजिटल इंजीनियरिंग इको-सिस्टम के भीतर बनाया गया है, जो उम्मीद दिखाता है, कि अमेरिका के पास जल्द ही हाइपरसोनिक मिसाइल होंगे।












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