दुनिया में बज रहा मार्कोस का डंका.. सोमाली लुटेरों के खिलाफ एक्शन देख अमेरिकी मीडिया हैरान, नौसेना की जय-जयकार
US Reaction on Indian Navy: हूती विद्रोहियों के लाल सागर में लगातार हो रहे हमलों और अचानक से फिर से एक्टिवेट हुए सोमाली लुटेरों के कहर से दुनिया के व्यापारिक जहाजों को बचाकर भारतीय नौसेना ने पूरी दुनिया में अपना डंका बजा दिया है।
भारत के खिलाफ हमेशा से निगेटिव रिपोर्टिंग करने वाले अमेरिकी अखबार भी इंडियन नेवी के स्पेशल फोर्स 'मार्कोस' की तारीफों में कसीदे गढ़ रहे हैं और अमेरिकी एक्सपर्ट्स ने माना है, कि भारतीय नौसेना के स्पेशल कमांडो मार्कोस दुनिया की सबसे बेहतरीन फोर्स है।

मार्कोस की फैन हुई अमेरिकी मीडिया
अमेरिकी एक्सपर्ट्स का कहना है, कि भारतीय नौसेना ने पिछले हफ्ते सोमालिया के तट पर समुद्री डाकुओं से एक वाणिज्यिक जहाज को जिस तरह से बचाया है, उससे पता चलता है, कि कैसे दिल्ली की सेना ने दुनिया के कुछ सर्वश्रेष्ठ स्पेशल फोर्स के बराबर क्षमताएं विकसित कर ली हैं।
भारतीय नौसेना ने कहा है, कि करीब दो दिनों तक चले समुद्री डकैती रोधी अभियान के दौरान जहाज एमवी रुएन के चालक दल के 17 सदस्यों को बचाया गया है, लेकिन इस ऑपरेशन में कोई भी घायल नहीं हुआ। नेवी ने कहा है, कि दर्जनों समुद्री लुटेरों को हिरासत लिया गया है।
इंडियन नेवी के इस ऑपरेशन में एक नौसेना विध्वंसक, एक गश्ती जहाज, एक भारतीय वायु सेना सी-17 ट्रांसपोर्टर, जो समुद्री कमांडो को हवाई मार्ग से ड्रॉप करने के लिए 1,500 मील से ज्यादा दूरी तक उड़ान भर रहा था, एक नौसैनिक ड्रोन, एक टोही ड्रोन और एक पी-8 निगरानी जेट शामिल थे।
सीएनएन से बात करते हुए काउंसिल ऑन फॉरेन रिलेशंस इंटरनेशनल अफेयर्स के फेलो जॉन ब्रैडफोर्ड ने कहा, "ऑपरेशन की कामयाबी भारतीय नौसेना को प्रशिक्षण, कमांड और नियंत्रण और अन्य क्षमताओं के मामले में एक सर्वश्रेष्ठ फोर्स बनाती है।"
अमेरिकी एक्सपर्ट ने कहा, कि "इस ऑपरेशन की सबसे खास बात ये है, कि इसमें जोखिम को इंडियन नेवी ने किस हद तक कम कर दिया था और इस ऑपरेशन में युद्धपोत, ड्रोन, फिक्स्ड- और रोटरी-विंग विमान और समुद्री कमांडो का इस्तेमाल किया गया था।"

अमेरिकी एक्सपर्ट ने चिंता जताते हुए कहा है, कि "कॉमर्शियल जहाजों पर हूती विद्रोहियों के हमलों की वजह से लाल सागर अस्थिर हो रहा है और पास के हॉर्न ऑफ अफ्रीका में सोमाली समुद्री डाकुओं के लिए भी एक खिड़की खुल गई है, जिससे वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए अरबों डॉलर का खतरा पैदा हो सकता है।"
हूती और सोमाली लुटेरों का खतरा
यमन और सोमालिया इस क्षेत्र के सबसे गरीब देशों में से हैं, और ये दोनों देश सालों से चले आ रहे गृहयुद्ध की वजह से तबाह हो गए हैं। पिछले साल दिसंबर में एमवी रूएन पर सोमाली समुद्री डाकुओं ने कब्जा कर लिया था, जो 2017 के बाद से किसी जहाज का पहला सफल अपहरण था।
यूरोपीय संघ नौसेना बल की दिसंबर की रिपोर्ट में कहा गया है, कि स्पेनिश, जापानी और भारतीय युद्धपोतों ने माल्टा-ध्वजांकित, बल्गेरियाई-प्रबंधित जहाजों पर कड़ी नजर रखी थी, क्योंकि इन्हें सोमाली क्षेत्रीय जल से ले जाया जा रहा था। लेकिन, इससे पहले की इन जहाजों का अपहरण किया जाता, इंडियन नेवी के स्पेशल कमांडो ने ऑपरेशन को अंजाम देते हुए उन्हें आजाद करवा लिया।
इंडियन नेवी ने कहा है, कि इस ऑपरेशन के दौरान INS कोलकाता का इस्तेमाल किया गया है।
इंडियन नेवी ने कहा है, कि समुद्री डाकुओं ने ड्रोन पर गोलीबारी की थी और नष्ट करने की कोशिश की थी। इसके अलावा, लुटेरों ने भारतीय युद्धपोत पर भी गोलाबीरी की थी, जिसके बाद INS कोलकाता ने भी जवाबी कार्रवाई की। जिससे समुद्री लुटेरों का स्टीयरिंग और नेविगेशन सिस्टम नाकाम हो गया। लेकिन, भारी गोलाबारी के बाद भी कोई भी इस ऑपरेशन में घायल नहीं हुआ, जो इस ऑपरेशन की कामयाबी को दर्शाता है।
इस ऑपरेशन के दौरान भारतीय मार्कोस कमांडों ने करीब 10 घंटे का ऑपरेशन चलाया और फिर सोमाली लुटेरे सरेंडर करने के लिए मजबूर हो गये। नौसेना ने कहा है, कि 35 समुद्री लुटेरों को गिरफ्तार किया गया है।
इस ऑपरेशन के लिए बुल्गारिया के राष्ट्रपति रुमेन राडेव ने भी इंडियन नेवी की तारीफ की है और भारतीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को उन्होंने धन्यवाद कहा है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, कि "अपहृत बल्गेरियाई जहाज 'रुएन' और 7 बल्गेरियाई नागरिकों समेत उसके चालक दल को बचाने में नौसेना की बहादुरीपूर्ण कार्रवाई के लिए मैं (मोदी) के प्रति हार्दिक आभार व्यक्त करता हूं।"
मार्कोस की दिवानी हुई दुनिया
वहीं, अमेरिकी नौसेना के पूर्व कप्तान और एक्सपर्ट कार्ल शूस्टर ने कहा है, कि इस घटना ने भारतीय नौसेना के प्रोफेशनल रवैये को दुनिया के सामने रखा है। उन्होंने कहा, कि दिल्ली के समुद्री कमांडो बल, जिसे मार्कोस के नाम से जाना जाता है, उसने अपने अमेरिकी और ब्रिटिश समकक्षों के समान ऑपरेशन चलाया है।
शूस्टर ने कहा, "भारतीय नौसेना अपने आप में एक उच्च प्रशिक्षित और अनुशासित पेशेवर बल है।"
उन्होंने कहा, कि "मार्कोस ने करीब 8 महीने की ट्रेनिंग ब्रिटिश SSA के समान ली है और इसमें भर्ती काफी कठिन टेस्ट के आधार पर होता है और इसके ट्रेनिंग प्रोग्राम में जितने लोग जाते हैं, उनमें से महज 10 से 15 प्रतिशत ही आखिरी स्टेज को पार कर पाते हैं।"












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