US Iran War: कौन थे अली मोहम्मद नैनी? अमेरिका को दी थी धमकी तो 24 घंटे में हुआ काम तमाम, कौन लेगा जगह?
US Iran War: ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के प्रवक्ता ब्रिगेडियर-जनरल अली मोहम्मद नैनी की अमेरिका-इजरायल के ज्वॉइंट हमलों में मौत हो गई। ईरानी मीडिया ने शुक्रवार को इस खबर की न सिर्फ जानकारी दी बल्कि पुष्टि भी कर दी। यह घटना मिडिल ईस्ट में चल रही जंग में ईरान के लिए एक और बड़ा झटका मानी जा रही है।
खास बात यह है कि नैनी ने अपनी मौत से कुछ ही घंटे पहले अमेरिका को चेतावनी दी थी और अमेरिकी नौसेना को फारस की खाड़ी में आने की चुनौती दी थी। उन्होंने एक आधिकारिक बयान जारी कर नैनी की मौत की पुष्टि की। संगठन ने इसे अमेरिकी-इजरायल द्वारा किया गया कायरतापूर्ण आतंकवादी हमला बताया।
कौन थे अली मोहम्मद नैनी?
नैनी 2024 से अपनी मौत तक IRGC के मुख्य प्रवक्ता थे। वे सिर्फ एक सैन्य अधिकारी नहीं थे, बल्कि संगठन के मीडिया फेस भी थे। वह ईरानी मीडिया और विदेशी प्रेस के साथ IRGC के संबंधों को संभालते थे। इस पद से पहले उन्होंने ब्रिगेडियर-जनरल रमजान शरीफ की जगह ली थी।

सैनिक और प्रोफेसर: दोहरी पहचान
नैनी की एक खास बात उनकी दोहरी पहचान थी। एक तरफ वे सैन्य अधिकारी थे, वहीं दूसरी तरफ तेहरान के इमाम हुसैन यूनिवर्सिटी में सोशल साइंस के प्रोफेसर भी थे। यह यूनिवर्सिटी b से जुड़ा हुआ है। उनकी एकेडमिक बैकग्राउंड के कारण उन्हें एक रणनीतिक सोच वाले व्यक्ति के रूप में देखा जाता था।
मौत से पहले अमेरिका को दी खुली चुनौती
अपने आखिरी घंटों में नैनी ने अमेरिका के दावों का मजाक उड़ाया था। उन्होंने कहा था, "अगर अमेरिका कहता है कि हमारी नौसेना खत्म हो गई है, तो हिम्मत है तो अपने जहाज फारस की खाड़ी में भेजकर देखे।" यह बयान उनकी आक्रामक शैली को दिखाता है।
मिसाइल ताकत पर भी जताया था गर्व
नैनी ने ईरान के मिसाइल प्रोग्राम की तारीफ करते हुए कहा था कि "हमारा मिसाइल उद्योग शानदार है और युद्ध जैसी परिस्थितियों में भी हम उत्पादन जारी रखते हैं।" यह बयान उनकी सैन्य सोच और आत्मविश्वास को दर्शाता है।
पहले से ही प्रतिबंधों के घेरे में थे नैनी
अक्टूबर 2024 में यूनाइटेड किंगडम ने नैनी पर प्रतिबंध लगाए थे। इन प्रतिबंधों में उनकी संपत्ति फ्रीज करना और यात्रा पर रोक शामिल थी। ब्रिटेन ने उनके बयानों को शत्रुतापूर्ण गतिविधियों का हिस्सा माना था।
समर्थकों और विरोधियों की नजर में अलग-अलग
IRGC और उसके समर्थकों के लिए नैनी एक शहीद हैं, जो शासन की ताकत का प्रतीक थे। वहीं, विरोधियों के लिए वे एक ऐसे प्रवक्ता थे, जिनके बयान तनाव को और बढ़ाते थे। उनकी मौत के बाद IRGC के कम्युनिकेशन सिस्टम में एक बड़ी कमी आ गई है।
IRGC के टॉप कमांडर भी निशाने पर
IRGC के कमांडर-इन-चीफ मोहम्मद पाकपुर के भी अमेरिकी-इजरायली हमलों में मारे जा चुके हैं। इसके अलावा मार्च 2026 में अली लारीजानी को भी तेहरान में सटीक हमले में मार दिया गया था।उसी हमले में बासिज कमांडर घोलमरेज़ा सुलेमानी की भी मौत हो गई। बसीज, IRGC का एक अर्धसैनिक बल है। इसके अलावा कई अन्य सीनियर ऑफीसर भी मारे गए।
लंबी है मरने वालों की लिस्ट
इनमें मेजर जनरल मोहम्मद शिराज़ी, अब्दोलरहीम मौसवी, सालेह असदी, अजीज नासिरज़ादे, हुसैन जबल अमेलियन और रेजा मुजफ्फर-निया जैसे बड़े नाम शामिल हैं। ये सभी रक्षा और IRGC से जुड़े वरिष्ठ अधिकारी थे।
सरकार के अंदर भी नुकसान
मार्च 2026 में राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियान ने भी पुष्टि की थी कि एक वरिष्ठ मंत्री की हत्या हो गई है। इसे ईरान की लीडरशिप को कमजोर करने की बड़ी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।
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