डोनाल्‍ड ट्रंप की वजह से खतरे में है अमेरिका, विशेषज्ञों को सता रही बड़ी आफत की चिंता

वॉशिंगटन। अमेरिका के 46वें राष्‍ट्रपति डेमोक्रेट जो बाइडेन अब अपने ट्रांजिशन प्रक्रिया को आगे बढ़ाने लगे हैं। राष्‍ट्रपति डोनाल्‍ड ट्रंप की इंटेलीजेंस टीम की मदद के बिना बाइडेन ने अब देश की सुरक्षा से जुड़ी नीतियों के बारे में प्‍लान बनाने शुरू कर दिए हैं। बाइडेन ने बुधवार को व्‍हाइट हाउस के लिए चीफ ऑफ स्‍टाफ की नियुक्ति भी कर डाली है। नए राष्‍ट्रपति पुराने साथी रॉन क्‍लैन को व्‍हाइट हाउस का चीफ ऑफ स्‍टाफ नियुक्‍त किया है। चीफ ऑफ स्‍टाफ नियुक्‍त होने के बाद अब क्‍लैन राष्‍ट्रपति के ऑफिस का जिम्‍मा संभालेंगे और उनके सीनियर एडवाइजर के तौर पर काम करेंगे।

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    क्लिंटन की तरह दिखानी होगी समझदारी

    अमेरिकी राष्‍ट्रपति डोनाल्‍ड ट्रंप हार मानने को तैयार नहीं हैं। राष्‍ट्रीय सुरक्षा और इंटेलीजेंस एक्‍सपर्ट्स को उम्‍मीद है कि ट्रंप अपना विचार जल्‍द बदल देंगे। उनका कहना है कि नए राष्‍ट्रपति पहले दिन से ही राष्‍ट्रीय सुरक्षा के किसी मसले का सामना करने के लिए पूरी तरह से तैयार रहना होता है। साल 2000 में भी जब डेमोक्रेट राष्‍ट्रपति बिल क्लिंटन को व्‍हाइट हाउस से विदाई लेनी थी तो उस समय भी इसी तरह का संकट पैदा हुआ था। तब फ्लोरिडा के गर्वनर जॉर्ज डब्‍लू बुश ने देश की सबसे संवेदनशील इंटेलीजेंस के बारे में डेली ब्रीफिंग हासिल करनी शुरू कर दी थी। क्लिंटन के उप-राष्‍ट्रपति अल गोर ने बुश के खिलाफ चुनाव लड़ा था। गोर चुनाव हार गए थे लेकिन ट्रंप की तरह ही अपी जिद पर अड़े थे। गोर क्‍योंकि उप-राष्‍ट्रपति थे तो आठ साल तक वह क्लिंटन को इंटेलीजेंस के मसले पर डेली ब्रीफ करते थे। मगर उस समय भी क्लिंटन ने इंटेलीजेंस के मसले पर बुश को साथ लेने का फैसला किया था। सुप्रीम कोर्ट में जब केस चला तो बुश जीते और इस तरह से वह देश के राष्‍ट्रपति बने। राष्‍ट्रपति ट्रंप, क्लिंटन से उलट चल रहे हैं। ट्रंप ने अभी तक निर्वाचित राष्‍ट्रपति जो बाइडेन को इंटेलीजेंस ब्रीफ पर नजर तक नहीं फेरने दी है।

    देश के दुश्‍मन इंतजार नहीं करेंगे

    राष्‍ट्रीय सुरक्षा और इंटेलीजेंस एक्‍सपर्ट्स को उम्‍मीद है कि ट्रंप को जल्‍द बुद्धि आएगी। मिशीगन के पूर्व रिपब्लिकन प्रतिनिधि माइक रोजर्स ने कहा, 'हमारे दुश्‍मन ट्रांजिशन प्रक्रिया के शुरू होने का इंतजार नहीं कर रहे हैं।' रोजर्स, इंटेलीजेंस कमेटी के चेयरमैन रह चुके हैं। उन्‍होंने कहा, 'जो बाइडेन को रोजाना राष्‍ट्रपति की डेली ब्रीफिंग हासिल होनी चाहिए। उन्‍हें यह पता लगना चाहिए कि देश पर नया खतरा कौन सा है और उसके मुताबिक वह अपनी योजनाओं को आगे बढ़ाना शुरू करेंगे।।' उनका मानना है कि ट्रंप के इस अड़‍ियल रवैये का फायदा अमेरिका के दुश्‍मन उठा कसते हैं। साथ ही जैसे ही बाइडेन ओवल ऑफिस पहुंचेंगे उस समय से ही अहम विदेशी मुद्दे भी चुनौतीपूर्ण होंगे। रूस के साथ परमाणु हथियारों की डील सबसे बड़ा मुद्दा है। अगर ट्रंप ने इस संधि को बढ़ा दिया या फिर इस पर समझौता कर लिया तो फिर बाइडेन के पास 16 दिन ही बचेंगे जब वह इस पर कोई फैसला ले सकेंगे।

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