स्वतंत्रता दिवस की शान बनेंगे भारतवंशी अमेरिकी सांसद रो खन्ना, जानिए कैसे प्रतिबंधों से दिलाई थी 'आजादी'

Ro Khanna on Independence Day: अमेरिका के भारतवंशी सांसद, रो खन्ना इस साल भारतीय स्वतंत्रता दिवस की शान बनेंगे और वो दिल्ली में स्वतंत्रता दिवस समारोह का हिस्सा बनेंगे। रो खन्ना के साथ माइकल वाल्ट्ज भी मौजूद होंगे और ये दोनों 'हाउस इंडिया कॉकस' के सह-अध्यक्ष भी हैं।

समाचार एजेंसी एएनआई के मुताबिक, अमेरिका के ये दोनों सांसद भारत में एक द्विदलीय कांग्रेस सदस्य प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व करेंगे और स्वतंत्रता दिवस पर लाल किले से प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी के संबोधन में भी शामिल होंगे। इसके अलावा, वे मुंबई, हैदराबाद और नई दिल्ली में व्यापार, टेक्नोलॉजी क्षेत्र, सरकार और बॉलीवुड नेताओं से मुलाकात करेगे और महात्मा गांधी को समर्पित ऐतिहासिक स्मारक राज घाट का दौरा करेंगे।

Ro Khanna on Independence Day

भारत आएंगे भारतवंशी सांसद रो खन्ना

रो खन्ना और वाल्ट्ज भारत और भारतीय अमेरिकियों पर कांग्रेसनल कॉकस के सह-अध्यक्ष हैं। ये कॉकस संयुक्त राज्य अमेरिका और भारत के बीच संबंधों को मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध सांसदों का एक द्विदलीय गठबंधन है। ये कॉकस अमेरिका में भारत के हितों को उठाता है।

रो खन्ना, बाइडेन की डेमोक्रेटिक पार्टी के सांसद हैं और उन्हें भविष्य का राष्ट्रपति भी कहा जाता है।

रिपोर्ट के मुताबिक, सांसद रो खन्ना और वाल्ट्ज के साथ, रेप्स डेबोरा रॉस, कैट कैममैक, श्री थानेदार, और जैस्मीन क्रॉकेट भी भारत का दौरा करेंगे और ये सभी सांसद सदस्य होने के साथ साथ कांग्रेसी कॉकस के सदस्य हैं।

आपको बता दें, जब जून महीने में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अमेरिका का दौरा किया था, उस वक्त अमेरिकी संसद में संबोधन के दौरान सांसद श्री थानेदार ने ही उनका स्वागत किया था और वो भी इस प्रतिनिधिमंडल का हिस्सा हैं, जो भारत का दौरा कर रहा है।

कौन हैं रो खन्ना, कैसा है भारत से नाता?

आपको बता दें, कि रो खन्ना साल 2017 में कैलिफोर्निया से सांसद चुने गये थे और उनके दादा अमरनाथ विद्यालंकार, एक भारतीय स्वतंत्रता सेनानी थे, जिन्होंने महात्मा गांधी के साथ, चार साल जेल में बिताए और बाद में भारत की पहली संसद का हिस्सा भी बने। यानि, रो खन्ना के दादा भारत में सांसद थे और रो खन्ना अमेरिका में सांसद हैं।

अपनी भारत यात्रा को लेकर रो खन्ना ने कहा, कि "भारत और भारतीय अमेरिकियों पर कांग्रेस के कॉकस के सह-अध्यक्ष के रूप में, हमें भारत में एक द्विदलीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व करने पर गर्व है। हम वहां इस बात पर चर्चा करेंगे, कि हमारे दो देशों, सबसे पुराने और सबसे बड़े लोकतंत्रों के बीच आर्थिक और रक्षा संबंधों को कैसे मजबूत किया जाए।"

उन्होंने आगे कहा, कि "हम दोनों का मानना है, कि अमेरिका और भारत का रिश्ता, 21वीं सदी का निर्णायक रिश्ता होगा। भारत एशिया में बहुध्रुवीयता सुनिश्चित करने और चीन को प्रभुत्वशाली मानने से इनकार करने में एक प्रमुख भागीदार है। हमें लोकतंत्र, प्रेस और सभा की स्वतंत्रता और मानवाधिकारों के हमारे साझा संस्थापक मूल्यों के आधार पर प्रगति करने और अपनी साझेदारी बनाने का प्रयास जारी रखना चाहिए। यह प्रतिनिधिमंडल सहयोग को आगे बढ़ाने और साझा लक्ष्यों को आगे बढ़ाने का एक ऐतिहासिक अवसर है।"

इसके अलावा, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को अमेरिकी संसद को फिर से संबोधित करने का मौका मिले, इसके लिए रो खन्ना ने अभियान चलाया था।

हालांकि, राहुल गांधी की जब संसद सदस्यता खत्म कर दी गई थी, तो उन्होंने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से मामले में हस्तक्षेप करने की अपील कर लोगों के निशाने पर आ गये थे और उनकी काफी आलोचना भी की गई थी।

भारत को प्रतिबंधों से दिलाई 'आजादी'

आपको बता दें, कि पिछले साल जुलाई महीने में जब भारत पर अमेरिकी प्रतिबंधों की तलवार लटक रही थी, उस वक्त रो खन्ना ने ही अमेरिकी संसद में, भारत को राहत दिलाने वाला बिल पेश किया था, जिसमें कहा गया था, कि भारत पर रूसी हथियार खरीदने के लिए प्रतिबंध नहीं लगने चाहिए।

पिछले साल जुलाई में यूएस हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव ने उस कानून में बदलाव की मंजूरी दी थी, जो काउंटरिंग अमेरिकाज एडवर्सरीज थ्रू सेंक्शंस एक्ट (सीएएटीएसए) के तहत भारत को लेकर 'विशिष्ट छूट' की सिफारिश करता है।

यानि, CAATSA के तहत भारत को प्रतिबंधों से बचाने वाला बिल अमेरिकी संसद में रो खन्ना ने ही पेश किया था, जिसे अमेरिकी संसद में पास कर दिया गया था।

भारतीय मूल के अमेरिकी सांसद रो खन्ना का कहना है, कि "भारत-प्रशांत क्षेत्र में संयुक्त राज्य के हितों को आगे बढ़ाने के लिए और साझा लोकतांत्रिक मूल्यों के लिए भारत-अमेरिका साझेदारी महत्वपूर्ण है। और दुनिया के सबसे पुराने और सबसे बड़े लोकतंत्रों के बीच यह साझेदारी महत्वपूर्ण है और भारत-प्रशांत क्षेत्रों में बढ़ते खतरों के जवाब में इसे मजबूत करना जारी रखना चाहिए।"

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