जनरल कासिम सुलेमानी: ईरान का एक साधारण मजदूर से बना टॉप कमांडर, जिसने अमेरिका की नाक में कर दिया दम

तेहरान। अमेरिका की तरफ से बगदाद इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर हुए हवाई हमले में ईरान के टॉप जनरल कासिम सुलेमानी की मौत हो गई है। सुलेमानी की मौत के बाद ईरान के सुप्रीम लीडर अयोतल्‍ला खेमनेई की तरफ से देश में तीन दिनों के शोक का ऐलान कर दिया गया है। सुलेमानी को ईरान ने शहीद का दर्जा दिया है। ईरान के टेलीविजन पर घटना के बाद आधिकारिक बयान जारी किया गया। इस बयान में कहा गया है, 'रेवाल्‍यूशनरी गार्ड्स इस बात का ऐलान करती है कि इस्‍लाम के महान कमांडर हज, कासिम सुलेमानी बगदाद पर इस सुबह हुए अमेरिकी हमले में शहीद हो गए हैं।' आइए आपको बताते हैं कि कौन थे जनरल सुलेमानी और क्‍यों थे इतने लोकप्रिय।

शुरुआत में बस एक मजदूर थे सुलेमानी

शुरुआत में बस एक मजदूर थे सुलेमानी

ईरान के कनात-ए-मालेक गांव में एक गरीब किसान के घर 11 मार्च 1957 को कमांडर कासिम सुलेमानी का जन्‍म हुआ। अपने पिता के सिर पर लदे कर्ज का बोझ कम करने के लिए उन्‍होंने शुरुआत में केरमान शहर में मजदूरी की। इसके बाद सन् 1975 में वह केरमान वॉटर ऑर्गनाइजेशन के साथ बतौर कांट्रैक्‍टर काम करने लगे। उन्‍होंने जिम में वजन उठाने तक का काम किया। सन् 1979 में वह ईरान की रेवोल्‍यूशनरी वॉर गार्ड (आईआरजीसी) में शामिल हुआ। ईरानी क्रांति के दौरान सेना का हिस्‍सा बने और फिर 80 के दशक से उनका सैन्‍य कद बढ़ता ही गया।

कभी न डरने वाला सैनिक

कभी न डरने वाला सैनिक

22 सितंबर 1980 को जब ईरान में सद्दाम हुसैन की सेनाएं दाखिल हुईं। ईरान और इराक के बीच आठ साल तक चलने वाले युद्ध की शुरुआत हुई तो सुलेमानी ने मिलिट्री कंपनी के लीडर के तौर पर मोर्चा संभाला। इस कंपनी में सुलेमानी की तरफ से ट्रेन्‍ड जवान थे। यहां से सुलेमानी को देश में के एक बहादुर और कभी से न डरने वाला सैनिक करार दिया जाने लगा। सुलेमानी की कंपनी ने उस जमीन को वापस लिया जिस पर ईराक ने कब्‍जा कर लिया था। साल 2003 में जब अमेरिकी सेनाएं इराक में दाखिल हुईं और साल 2011 में जब सीरिया में युद्ध की शुरुआत हुई, जनरल सुलमानी ने इसे अपने लिए एक बेहतरीन मौकों के तौर पर देखा। जनरल ने अपने जवानों को लेबनान और फिर यमन में ईरान के समर्थन वाली सेनाओं को तैयार करने के लिए भेजा। उन्‍होंने इस पर जमकर पैसा भी खर्च किया।

राष्‍ट्रपति के तौर पर देखने लगे थे लोग

राष्‍ट्रपति के तौर पर देखने लगे थे लोग

कोई नहीं जानता था कि सिर्फ एक जवान के तौर पर अपना फौजी करियर शुरू करने वाले कमांडर सुलेमानी एक दिन जनरल बन जाएंगे। उन्‍हें कुछ लोग ईरान के अगले राष्‍ट्रपति के तौर पर मानने लगे थे। जनरल सुलेमानी जिस कुद्स सेना से जुड़े थे, उसे अमेरिका आतंकी संगठन मानता था। इसी संगठन पर विदेशी जमीन पर ईरान के प्रभाव को मजबूत करने की जिम्‍मेदारी थी। इस फोर्स का नेतृत्‍व करके जनरल सुलेमानी ने यमन से लेकर सीरिया तक और इराक से लेकर दूसरे मुल्कों तक रिश्तों का एक मजबूत नेटवर्क तैयार किया ताकि इन देशों में ईरान का असर बढ़ाया जा सके।

कई बार आ चुकी थी मौत की खबर

कई बार आ चुकी थी मौत की खबर

कई बार जनरल सुलेमानी के मारे जाने की अफवाहें फैली थीं। साल 2006 में ईरान के उत्‍तर-पश्चिम में एक प्‍लेन क्रैश हो गया था। इस क्रैश में दूसरे मिलिट्री ऑफिसर्स समेत सुलेमानी के मारे जाने की बात कही गई। मगर वह गलत साबित हुई। इसके बाद साल 2012 में सीरिया के दमिश्‍क में हुए बम हमलों में असद के करीबियों की मौत हो गई थी। कहा गया कि सुलेमानी भी इसमें मारे गए थे। लेकिन फिर यह बस अफवाह साबित हुई। नवंबर 2015 में फिर अफवाह फैली कि सुलेमानी, सीरिया के अलप्‍पो में मारे गए हैं।

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