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यूनाइटेड नेशंस में इस्लाम पर बड़ा प्रस्ताव पास, भारत और फ्रांस ने जताई गहरी चिंता, पाकिस्तान गदगद

यूनाइटेड नेशंस में पेश किए गये इस प्रस्ताव का भारत, फ्रांस और यूरोपीय संघ के प्रतिनिधियों ने भी अपनी आपत्ति दर्ज कराई है।

न्यूयॉर्क, मार्च 16: यूनाइटेड नेशंस में इस्लाम को लेकर पाकिस्तान का बड़ा प्रस्ताव पारित हो गया है, जिसके तहत हर साल 15 मार्च को इस्लामोफोबिया से निपटने के लिए अंतर्राष्ट्रीय दिवस मनाया जाएगा। यूनाइटेड नेशंस में मंगलवार को पाकिस्तान द्वारा पेश किए इस प्रस्ताव को पास किया गया है, जिसको लेकर भारत ने अपनी चिंता जाहिर की है और इस प्रस्ताव का फ्रांस ने विरोध किया था।

इस्लाम पर बड़ा प्रस्ताव पास

इस्लाम पर बड़ा प्रस्ताव पास

संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) ने मंगलवार को सर्वसम्मति से इस्लामिक सहयोग संगठन (OIC) की ओर से पाकिस्तान द्वारा पेश किए इस्लामोफोबिया पर प्रस्ताव को अपना लिया गया है। जिसके तहत 15 मार्च को इस्लामोफोबिया का मुकाबला करने के लिए अंतर्राष्ट्रीय दिवस के रूप में घोषित करता है। पाकिस्तान द्वारा पेश किए गये इस प्रस्ताव को 57 इस्लामिक देशों के साथ साथ चीन और रूस सहित आठ अन्य देशों द्वारा प्रायोजित किया गया था। हालांकि, पाकिस्तान के इस प्रस्ताव का भारत और फ्रांस के साथ साथ यूरोपीय संघ के प्रतिनिधियों ने विरोध करते हुए अपनी आपत्ति जताई थी।

भारत-फ्रांस-ईयू की आपत्ति की वजह

भारत-फ्रांस-ईयू की आपत्ति की वजह

यूनाइटेड नेशंस में पेश किए गये इस प्रस्ताव का भारत, फ्रांस और यूरोपीय संघ के प्रतिनिधियों ने यह कहते हुए आपत्ति व्यक्त की थी, कि धार्मिक असहिष्णुता पूरी दुनिया में प्रचलित है, लेकिन प्रस्ताव में केवल इस्लाम को ही शामिल किया गया है, जबकि, कई दूसरे धर्मों को इससे बाहर रखा गया है। भारत ने कहा कि, दुनिया में हिंदू, बौद्ध और सिख धर्मों के खिलाफ भी फोबिया बढ़ रहा है, ऐसे में किसी एक धर्म को लेकर ही फोबिया पेश किया जा रहा है और इसके लिए अंतर्राष्ट्रीय दिवस घोषित करना पड़ा है। यूएन में भारत के स्थायी प्रतिनिधि टीएस त्रिमूर्ति ने आपत्ति जताते हुए कहा कि, प्रस्ताव में अन्य धर्मों के अलावा हिंदू विरोधी भय को शामिल नहीं किया गया है। वहीं, फ्रांस की तरफ से प्रस्ताव का विरोध करते हुए कहा गया कि, 'किसी खास धर्म के का चयन, धार्मिक असहिष्णुता के खिलाफ जारी जंग में विभाजन पैदा करता है'।

इस्लामिक देशों द्वारा था प्रायोजित

इस्लामिक देशों द्वारा था प्रायोजित

193 देशों वाले यूनाइटेड नेशंस में पेश किए गये इस प्रस्ताव को इस्लामिक सहयोग संगठन ने प्रायोजित किया था। जिसका समर्थन तमाम इस्लामिक देशों ने किया था। वहीं, इस प्रस्ताव के पास होने के बाद सबसे ज्यादा खुश पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान हैं, क्योंकि इन दिनों वो अपनी सरकार बचाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं और पाकिस्तानी मीडिया के मुताबिक, इमरान खान की सरकार एक हफ्ते में गिरने वाली है। लेकिन, माना जा रहा है कि, इस्लामोफोबिया को लेकर पारित इस प्रस्ताव का इस्तेमाल वो पाकिस्तान में होने वाले अगले चुनाव के लिए कर सकते हैं। इमरान खान ने यूएन में प्रस्ताव पास होने के बाद मुस्लिम उम्माह को बधाई दी है। उन्होंने ट्वीट करते हुए कहा कि, "इस्लामोफोबिया के बढ़ते ज्वार के खिलाफ हमारी आवाज सुनी गई है और संयुक्त राष्ट्र ने पाकिस्तान द्वारा पेश किए गए एक ऐतिहासिक प्रस्ताव को अपनाया है।"

किन देशों ने किया प्रस्ताव का समर्थन

किन देशों ने किया प्रस्ताव का समर्थन

इस्लामिक सहयोग संगठन (OIC) द्वारा प्रायोजित इस प्रस्ताव का, अफगानिस्तान, बांग्लादेश, चीन, मिस्र, इंडोनेशिया, ईरान, इराक, जॉर्डन, कजाकिस्तान, कुवैत, किर्गिस्तान, लेबनान, लीबिया, मलेशिया, मालदीव, माली द्वारा सह-प्रायोजित था। , पाकिस्तान, कतर, सऊदी अरब, तुर्की, तुर्कमेनिस्तान, युगांडा, संयुक्त अरब अमीरात, उज्बेकिस्तान और यमन ने समर्थन किया था।

भारत ने धार्मिक भेदभाव पर जताई चिंता

भारत ने धार्मिक भेदभाव पर जताई चिंता

प्रस्ताव को अपनाने पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि टीएस तिरुमूर्ति ने संयुक्त राष्ट्र महासभा में कहा कि, भारत को उम्मीद है कि अपनाया गया प्रस्ताव "एक मिसाल कायम नहीं करता" जो चुनिंदा धर्मों और विभाजन के आधार पर फोबिया पर कई प्रस्तावों को जन्म देगा। उन्होंने कहा कि, "हिंदू धर्म के 1.2 अरब से अधिक अनुयायी हैं, बौद्ध धर्म के साढ़े पांच करोड़ से अधिक और सिख धर्म के 3 करोड़ से अधिक अनुयायी दुनिया भर में फैले हुए हैं। यह समय है कि, हम केवल एक धर्म को अलग करने के बजाय धार्मिक भय के प्रसार को स्वीकार करें।"

‘हर भेदभाव का विरोध करता है भारत’

‘हर भेदभाव का विरोध करता है भारत’

मसौदा प्रस्ताव को अपनाने के बाद भारत के स्थायी प्रतिनिधि टीएस तिरुमूर्ति ने कहा कि, भारत यहूदी-विरोधी, क्रिस्टियानोफोबिया या इस्लामोफोबिया से प्रेरित सभी कृत्यों की निंदा करता है, ऐसे फोबिया केवल अब्राहमिक धर्मों तक ही सीमित नहीं हैं। उन्होंने कहा कि, "वास्तव में इस बात के स्पष्ट प्रमाण हैं कि, दशकों से इस तरह के धार्मिक भय ने वास्तव में गैर-अब्राहम धर्मों के अनुयायियों को भी प्रभावित किया है। उन्होंने कहा कि, 'यूएन के सदस्य देशों को नहीं भूलना चाहिए कि, साल 2019 में पहले से ही यह तय हो चुका है कि, 22 अगस्त को धार्मिक हिंसा के शिकार हुए लोगों के लिए अंतर्राष्ट्रीय दिवस मनाया जाएगा, और इस प्रस्ताव में हर धर्म के लोग शामिल हैं।'

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