यूक्रेन संकट के बीच भारतीय कारोबार को लाभ मिलने की उम्मीद, इस चीज के निर्यात में तेजी
नई दिल्ली, 7 मार्च: यूक्रेन में रूस के हमलों की वजह से भारत में तेल की कीमतों में भयानक उछाल की आशंकाएं हैं। इसकी वजह से महंगाई में और बढ़ोतरी की संभावनाएं हैं। लेकिन, इन मुश्किल स्थितियों में भी भारत के गेहूं निर्यातकों के लिए अच्छी खबर भी है। इसकी वजह ये है कि रूस और यूक्रेन दोनों ही गेहूं के बड़े निर्यातक हैं, लेकिन युद्ध की वजह से उनके देशों से सप्लाई बाधित होने की आशंका बढ़ने लगी हैं, जिसके चलते अंतरराष्ट्रीय बाजारों में इसकी कीमतों में इजाफा शुरू हो गया है। अकेले शिकागो में ही एक हफ्ते में इसकी बेंचमार्क कीमतों में 40 फीसदी बढ़ोतरी की रिपोर्ट है।

रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच भारत से गेहूं के निर्यात में तेजी
रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच भारत से गेहूं के निर्यात में तेजी आ गई है। इसकी वजह यह है कि वैश्विक चुनौती की वजह से इसका अंतराराष्ट्रीय भाव बढ़ने लगा है। खाद्य सचिव सुधांशु पांडे ने कहा है कि मौजूदा वित्त वर्ष में ही अभी तक ही देश से 66 लाख टन गेहूं निर्यात हो चुका है, जो कि रिकॉर्ड है। उनके मुताबिक भारतीय निर्यातकों के लिए यह एक 'अवसर' है, क्योंकि विश्व के गेहूं उत्पादकों की तुलना में यहां गेहूं की नई फसल 15 मार्च तक उपलब्ध हो जाएगी। हालांकि, मनी कंट्रोल के मुताबिक भारत में गेहूं सरप्लस में है, लेकिन फिर भी यह जरूरी मंजूरी की कमी और रूसी गेहूं के पश्चिम देशों के रास्ते में पड़े होने की वजह से उन देशों को शायद फिलहाल नहीं भेज पाएगा। वैसे भी पश्चिमी देशों ने कृषि कारोबार को प्रतिबंधों के दायरे से अलग रखा है।

पहले ही भारत से गेहूं का रिकॉर्ड निर्यात
खाद्य सचिव ने कहा है कि रूस और यूक्रेन मिलकर दुनिया का 30% गेहूं निर्यात करते हैं। उनकी गेहूं की फसल इस साल अगस्त और सितंबर में तैयार होगी। इसकी वजह से अंतरराष्ट्रीय बाजारों में गेहूं के दाम पहले से ही बढ़ गए हैं और यह 24,000 से 25,000 रुपये प्रति टन के हिसाब से बिक रहा है। उनके मुताबिक, 'भारत का गेहूं निर्यात, इसकी वजह से बढ़ गया है। फरवरी तक ही हम 66 लाख टन गेहूं पहले ही निर्यात कर चुके हैं।' कृषि मंत्रालय के दूसरे एडवांस अनुमानों के मुताबिक साल 2021-22 में भारत में गेहूं का उत्पादन (जुलाई-जून के फसल वर्ष में)नए रिकॉर्ड 11.132 करोड़ टन तक पहुंचने का अनुमान है। जबकि, पिछले वर्ष यह 10.959 करोड़ टन ही रहा था।

शिकागो में एक हफ्ते में 40% उछाल
गेहूं के बाकी वैश्विक उत्पादकों की नई फसल बाद में बाजार में उतरने की संभावना है। पांडे के मुताबिक 'हमारे पास गेहूं का पर्याप्त भंडार होगा और नई फसल भी सामान्य निर्यात के लिए निजी कारोबारियों के पास उपलब्ध होगा।' लेकिन, अंतरराष्ट्रीय कीमतों में उछाल से कारोबारियों के लिए उत्साहित करने वाली स्थिति बन रही है। रूस पर पाबंदियों की वजह से सप्लाई में बाधाओं की आशंका की वजह से शिकागो में ही गेहूं की बेंचमार्क कीमत एक हफ्ते में ही 40% से ज्यादा बढ़ गई है। अंतरराष्ट्रीय कारोबारियों की चिंता काला सागर में शिपमेंट फंसने की वजह से है और वे भारत को वैकल्पिक निर्यातक के रूप में देख रहे हैं।

गेहूं उत्पादकों में कौन कहां है ?
यूनाइटेड नेशंस फूड एंड एग्रीकल्चर ऑर्गेनाइजेशन के आंकड़ों के मुताबिक 2019 में 13.36 करोड़ टन के साथ चीन और 10.36 करोड़ टन के साथ ये दोनों दुनिया में गेहूं के सबसे बड़े उत्पाक रहे हैं। इनके बाद रूस 7.45 करोड़ टन के साथ तीसरे नंबर पर रहा और 2.84 करोड़ टन के साथ यूक्रेन सातवें नंबर पर रहा है।












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