चार दिनों में रूस की चार महीनों की कामयाबी बर्बाद, जानिए युद्ध में कैसे यूक्रेन की हो गई है वापसी?

'ये रूस के रक्षा मंत्रालय ने ये फैसला लिया है और ये फैसला काफी ऊपर से आया है। इस फैसले में कहा गया है कि, खार्किव से रूसी सेना को पूरी तरह से निकाल लिया जाए'

कीव, सितंबर 13: 24 फरवरी को यूक्रेन में सैन्य अभियान शुरू करने वाले रूस को कभी अंदाजा भी नहीं रहा होगा, कि ये लड़ाई 6 महीने से ज्यादा चलेगी और फिर उसकी सेना को उल्टे पैर लौटने के लिए मजबूर होना पड़ेगा। मार्च महीने में राजधानी कीव की घेराबंदी खत्म करने के बाद अब पूर्वी यूक्रेन से भी पैर उखड़ना रूस के लिए बहुत बड़ा झटका है। खासकर पिछले चार दिनों में यूक्रेन ने युद्ध में जबरदस्त वापसी की है और पूर्वी खार्किव में यूक्रेनी सेना की जवाबी कार्रवाई काफी ज्यादा घातक है, जिसकी वजह से कई अहम क्षेत्रों से रूसी सैनिकों के पैर उखड़ने लगे हैं। सिर्फ पिछले चार दिनों में यूक्रेनी सैनिकों ने रूस की पिछले चार महीनों की कामयाबी को बहुत हद तक बर्बाद कर दिया है।

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    युद्ध में यूक्रेन की वापसी

    युद्ध में यूक्रेन की वापसी

    युद्ध के मैदान से आने वाली रिपोर्ट्स के मुताबिक, यूक्रेन ने पिछले चार दिनों में करीब 3 दर्जन कस्बों और गांवों को रूसी सेना से आजाद करवा लिया है और यूक्रेनी राष्ट्रपति ने दावा किया है, कि यूक्रेनी सेना ने 6 हजार वर्ग किलोमीटर क्षेत्र को रूसी सैनिकों से वापस छीन लिया है। जर्मनी के ब्रेमेन विश्वविद्यालय के एक रूसी विशेषज्ञ निकोले मित्रोखिन ने अल जजीरा को बताया कि,"चार दिनों के भीतर, यूक्रेन ने रूसी सेना की चार महीने की सफलता को नेस्तनाबूत कर दिया है, और इस दौरान रूस को युद्ध की भारी कीमत चुकानी पड़ी है।" लेकिन, जिस रफ्तार और सहजता के साथ यूक्रेन ने रूसी सीमा के पश्चिम में और रूस समर्थित अलगाववादी क्षेत्र "लुहांस्क पीपुल्स रिपब्लिक" के उत्तर में स्थित क्षेत्र पर नियंत्रण हासिल करना शुरू किया है, वह सवाल उठा रहा है।

    पीछे हट रही है या भाग रही है रूसी सेना?

    पीछे हट रही है या भाग रही है रूसी सेना?

    सवाल ये उठ रहे हैं, कि आखिरी रूसी सेना अचानक पीछे क्यों हट रही है? खासकर जिन क्षेत्रों को रूसी सेना ने खाली किया है, उस क्षेत्र को ध्यान से देखने पर महसूस होता है, कि वहां से रूसी सेना पीछे हटी है, ना की भागी है। उन क्षेत्रों में ऐसा नहीं दिखता, कि युद्ध में घबराकर रूस के सैनिक पीछे हट रहे हैं। रूसी कब्जे वाले दो महत्वपूर्ण क्षेत्र कुपियांस्क और इजियम को रूस की सीमा से एक संकरी सड़क जोड़ती है। इंजियम को रूसी सैनिकों ने अपना बेस कैंप बना रखा था, जहां से रूसी सैनिकों को रसद सामग्रियों और उपकरणों की सप्लाई होती थी, लेकिन अब रूस ने उन क्षेत्रों को खाली कर दिया है और रास्तों को देखने पर ऐसा लगता है, कि रूसी सेना खुद वापस गई है, क्योंकि उस संकरे रास्ते पर युद्ध के निशान नहीं हैं और रास्ता भी कहीं पर बंद नहीं है। लिहाजा, सवाल ये उठ रहे हैं, कि आखिरी रूस ने इन दोनों सबसे अहम क्षेत्र को क्यों खाली कर दिया और इस सवाल को लेकर रूस के अंदर भी कई विशेषज्ञों ने नाराजगी जताई है। वहीं, पुतिन के अटूट साथी रहे चेचन्या लीडर रामदान ने भी इस रणनीति की आलोचना की है।

    क्या सोच रहा है रूसी नेतृत्व?

    क्या सोच रहा है रूसी नेतृत्व?

    दो अहम क्षेत्रों को खाली करने के फैसले को लेकर निकोले मित्रोखिन ने कहा कि, 'शायद ये रूस के रक्षा मंत्रालय ने ये फैसला लिया है और ये फैसला काफी ऊपर से आया है। इस फैसले में कहा गया है कि, खार्किव से रूसी सेना को पूरी तरह से निकाल लिया जाए और उन्हें पूरी तरह से एकजुट कर पूर्वी यूक्रेन के दो अहम क्षेत्र लुहान्स्क और डोनेत्स्क में तैनात कर दिया जाए।' रूस की ये रणनीति अप्रैल महीने में राजधानी कीव की घेराबंदी खत्म करने की तरह है, जिसमें रूस ने कहा था, कि अब उसका ध्यान पूर्वी यूक्रेन की तरफ है, लेकिन यूक्रेन के विश्लेषकों ने कहा था, रूस ने युद्ध को लेकर गलत गणित लगाया, जिसमें रूस के भारी सैन्य उपकरणों का नुकसान हुआ। हालांकि, कुछ रक्षा विश्लेषकों का कहना है कि, फिलहाल जो रूसी सेना पीछे हट रही है, उसके पीछे की सबसे बड़ी वजह ये है, कि रूसी सैनिकों को काफी खराब ट्रेनिंग मिली हुई थी और अब उन्हें लुहान्स्क और डोनेत्स्क में पिछली पंक्ति में तैनात किया जा रहा है।

    रूस को हो रहा है भारी नुकसान

    रूस को हो रहा है भारी नुकसान

    इस बात के सबूत मिल रहे हैं, कि रूसी सैनिकों को भारी जनशक्ति का नुकसान हुआ है और अभी तक दसियों हजार सैनिक मारे जा चुके हैं, जिसकी भरपाई के लिए क्रेमलिन ने अपने अप्रशिक्षित सैनिकों की तैनाती शुरू कर दी है। इन सैनिकों को कई लुभावने वादे के साथ तैनात किया गया है। वहीं, रूस ने जेल में बंद कैदियों को भी माफी और भुगतान का वादा कर जंग लड़ने भेज दिया है। शुक्रवार को फेसबुक पर रूसी जेलों की निगरानी करने वाले रूस सिद्याश्या मानवाधिकार समूह के ओल्गा रोमानोवा ने यूक्रेन में लड़ने के लिए 7,000 से 10,000 कैदियों की भर्ती की है। रोमानोवा ने लिखा कि, रूसी सेना की कमजोरी शीर्ष अधिकारियों के भयानक गलत अनुमानों से और बढ़ गई है, जिन्होंने खार्किव में सैनिकों की आक्रामकता को पूरी तरह से खत्म कर दिया और उनकी सहायता के लिए अतिरिक्त बलों को तैनात नहीं किया।

    रूस के लीडरशिप में दरार

    रूस के लीडरशिप में दरार

    रूस के एक पूर्व सैनिक मारत गैबिदुलिन, जो भाड़े की लड़ाई में शामिल हो चुके हैं और जिनके कई भाई यूक्रेन में भाड़े की लड़ाई लड़ रहे हैं, उन्होंने कहा कि, ये हार रूस के शीर्ष अधिकारियों के भीतर बहुत गहरी समस्या को दर्शाती है। उन्होंने कहा कि, "इस जगह (खार्किव में) ने दिखाया कि कैसे हमारे जनरलों ने पूरी तरह से लापरवाही दिखाई है, जिसकी वजह से वास्तकिता से हम काफी दूर चले गये और हमने इस युद्ध को खो दिया। इस युद्ध में कई इकाइयां ऐसी हैं, जो अनिवार्य रूप से लड़ाई लड़ने में कमजोर हैं'। सीरिया के राष्ट्रपति बशर अल-असद की सेना के लिए लड़ने के अपने अनुभव के बारे में लिखने वाले गैबिदुलिन ने कहा कि, "रूस का रक्षा मंत्रालय नकली रिपोर्टिंग और आंख धोने का साम्राज्य है।" वहीं, इस हार ने रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के सबसे करीबी सहयोगियों में से एक से सार्वजनिक आलोचना का एक दुर्लभ मामला शुरू किया। चेचन्या नेता रमजान कादिरोव ने कहा कि, "अगर आज या कल विशेष सैन्य अभियान की रणनीति में कोई बदलाव नहीं होता है, तो मुझे रक्षा मंत्रालय के प्रमुखों और रूस के नेताओं से उन्हें स्थिति के बारे में बताने के लिए संपर्क करना होगा।"

    पश्चिमी हथियारों से रूस का खेल खराब

    पश्चिमी हथियारों से रूस का खेल खराब

    पश्चिमी देशों ने यूक्रेन को भले ही सैनिक ना भेजे हों, लेकिन पश्चिमी देशों के हथियारों ने रूस की नाक में दम कर दिया है। अब तक 30 से ज्यादा यूरोपीय देश यूक्रेन की मदद कर रहे हैं, इसमें यूरोपीय यूनियन अभी तक एक अरब यूरो की मदद दे चुका है, तो अमेरिका ने यूक्रेन को 1.7 अरब डॉलर की सहायता दी है। अमेरिका ने यूक्रेन को कंधे पर रखकर मार करने वाली जेवलिन मिसाइलें दी हैं, जो रूसी हेलीकॉप्टर्स के लिए काल बन गई। इसे ऑपरेट करना इतना आसान है, कि किसी घर के छत से इसे आराम से चलाया जा सकता है। वहीं, स्टिंगर मिसाइलें भी यूक्रेन को दी गई हैं, जिसे एक सैनिक अपने कंधे पर रखकर फायर कर सकता है। इन मिसाइलों के साथ यूक्रेन ने रूसी सैनिकों को शहरी युद्ध में खींच लिया, जहां रूसी सैनिक बेदम होते चले गये। वहीं, यूक्रेन ने आम नागरिकों के हाथों में रायफल थमा दिए, जिससे सैकड़ों रूसी सैनिक गलियों की लड़ाई में मारे गये हैं। इससे रूसी सैनिकों का मनोबल बुरी तरह से टूटा है।

    यूक्रेन की क्या है रणनीति?

    यूक्रेन की क्या है रणनीति?

    इज़ियम और कुपियानस्क शहर का अपने हाथ में आना यूक्रेन के लिए सबसे महत्वपूर्ण लाभ हैं। इन शहरों ने लुहान्स्क और डोनेट्स्क में रूसी फोर्स के लिए रसद केंद्र के रूप में काम किया है, और यूक्रेन के दूसरे सबसे बड़े शहर खार्किव के लगभग दैनिक गोलाबारी के लिए उपयोग किया जाता था। यूक्रेन ने रूसी सीमा पर कई क्षेत्रों और चौकियों पर भी नियंत्रण हासिल कर लिया, जिनका उपयोग आपूर्ति लाइनों के रूप में किया गया था। पिछले दो दिनों में करीब 2 हजार वर्ग किलोमीटर क्षेत्र पर यूक्रेन ने वापस नियंत्रण हासिल कर लिया है। वहीं, उन क्षेत्रों में अब यूक्रेन ने युद्ध अपराध के सबूत तलाशने शुरू कर दिए हैं। राष्ट्रपति वलोडिमिर ज़ेलेंस्की ने शुक्रवार को कहा कि, "मैं मुक्त क्षेत्रों में यूक्रेनियाई लोगों से यूक्रेन की भूमि पर रहने वालों के अपराधों के बारे में हमारे बलों को सूचित करने के लिए आग्रह कर रहा हूं।" वहीं, नगर परिषद के प्रमुख मक्सिम स्ट्रेलनिकोव ने टेलीविजन पर टिप्पणी करते हुए कहा कि, अकेले इज़ियम में कम से कम एक हजार आम नागरिक मारे गए हैं और ज्यादातर लोगों की मौत स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच नहीं होने की वजह से हुई है। इसके अलावा उन्होंने कहा कि, गोलाबारी ने शहर की लगभग 80 प्रतिशत इमारतों को नष्ट कर दिया है।

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