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UK की नई सरकार की 'इंडिया फर्स्ट पॉलिसी'? PM कीर स्टार्मर ने विदेश मंत्री को पहले दौरे पर ही भारत क्यों भेजा?

UK-India FTA Deal: यूनाइटेड किंगडम में इस महीने हुए चुनाव में लेबर पार्टी ने विशाल बहुमत हासिल करते हुए सरकार बनाई है और कीर स्टार्मर यूके के प्रधानमंत्री बने हैं। लेबर पार्टी को हमेशा से एंटी-इंडिया छवि वाली पार्टी माना जाता रहा है, लेकिन इस बार कीर स्टार्मर ने बहुत पहले ही संकेत दे दिया था, कि अगर उनकी सरकार बनती है, तो भारत को लेकर उनकी पॉलिसी अलग होगी।

और शायद उन्होंने अपनी विदेश नीति में भारत को सबसे ऊपर जगह भी दी है, क्योंकि यूके में नई सरकार के गठन के बाद नये विदेश मंत्री का पहला दौरा भारत का हो रहा है, जो काफी महत्वपूर्ण है।

uk india relations

भारत पहुंचे यूके के विदेश मंत्री

ब्रिटिश विदेश मंत्री डेविड लैमी बुधवार को भारत पहुंच गये हैं। इस महीने की शुरुआत में लेबर पार्टी की सरकार बनने के बाद से यह उनकी पहली आधिकारिक यात्रा है। माना जा रहा है, कि वे भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर के साथ-साथ अन्य मंत्रियों और नेताओं से मिलेंगे। उम्मीद है, कि वे लंबे समय से चल रहे भारत-ब्रिटेन मुक्त व्यापार समझौते (FTA) के साथ-साथ घरेलू और वैश्विक सुरक्षा पर भी बातचीत करेंगे।

भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर कहा, कि "ब्रिटेन के विदेश मंत्री डेविड लैमी का गर्मजोशी से स्वागत है, जो पदभार ग्रहण करने के बाद अपनी पहली आधिकारिक यात्रा पर नई दिल्ली पहुंचे हैं। यह यात्रा दोनों देशों के बीच व्यापक रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करेगी और भारत और ब्रिटेन के बीच 'जीवित पुल' को और मजबूत बनाएगी।"

विदेश, राष्ट्रमंडल और विकास कार्यालय (एफसीडीओ) के एक बयान के मुताबिक, लैमी अपने भारतीय समकक्ष जयशंकर के साथ-साथ अन्य मंत्रियों और व्यापार जगत के नेताओं के साथ बैठक करेंगे। लैमी की नई दिल्ली की पहली यात्रा के केंद्र में आर्थिक, घरेलू और वैश्विक सुरक्षा होगी।

डेविड लैमी के भारत दौरे का एजेंडा क्या है?

लैमी ने यात्रा शुरू करने से पहले कहा था, कि "मैं विदेश सचिव के रूप में अपने पहले महीने में भारत की यात्रा कर रहा हूं, क्योंकि ग्लोबल साउथ के साथ हमारे संबंधों को फिर से स्थापित करना, इस बात का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, कि यह सरकार ब्रिटेन को हमारे घर में सुरक्षा और समृद्धि के लिए कैसे जोड़ेगी।"

यूके के श्रम कैबिनेट मंत्री ने भारत को 21वीं सदी की उभरती हुई महाशक्ति, 1.4 अरब लोगों के साथ दुनिया का सबसे बड़ा देश और दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में से एक बताया।

दिल्ली में भारतीय नेताओं के साथ बातचीत के दौरान, लैमी ग्लोबल साउथ और छोटे द्वीप राज्यों में स्वच्छ ऊर्जा पहुंच और जलवायु लचीलापन बनाने के लिए भारत के नेतृत्व वाली, वैश्विक पहलों पर साझेदारी पर चर्चा कर सकते हैं। इसके अलावा वे एक टेक्नोलॉजी कंपनी का दौरा भी करेंगे, जहां वे व्यापारिक नेताओं के साथ बातचीत करेंगे और इस बात पर प्रकाश डालेंगे, कि कैसे भारत और यूके साझा महत्वाकांक्षाओं, जैसे "इनोवेशन को प्रोत्साहित करने, व्यापार को बढ़ावा देने और दोनों देशों में कामकाजी लोगों की आजीविका में सुधार करने के लिए अत्याधुनिक विज्ञान" पर एक साथ काम कर रहे हैं।

एफसीडीओ ने एक बयान में कहा है, कि "विदेश सचिव यूके और भारत के बीच लिविंग ब्रिज के महत्व को रेखांकित करेंगे।"

एफसीडीओ ने कहा, कि "यूके में 17 लाख भारतीय रहते हैं, जिन्होंने यूके को अपना घर बनाया है और ब्रिटिश जीवन में एक असाधारण योगदान दिया है।" उन्होंने कहा कि विदेश सचिव दोनों देशों के बीच 'लिविंग ब्रिज' के महत्व को रेखांकित करेंगे।

भारत-यूके फ्री ट्रेड एग्रीमेंट क्या है?

भारत और यूके के बीच FTA वार्ता जनवरी 2022 में शुरू हुई थी, और पूर्व ब्रिटिश प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन ने दिवाली 2022 से पहले इस डील को फाइनल करने की तारीख तय की थी, लेकिन उससे पहले ही घरेलू विवाद की वजह से उन्हें इस्तीफा देना पड़ गया और उसके बाद दो प्रधामंत्री लिज ट्रस और ऋषि सुनक, एफटीए डील पर समझौते पर नहीं पहुंच सके।

ऋषि सुनक आम चुनाव से पहले भारत के साथ ये डील फाइनल करना चाहते थे, लेकिन फिर घरेलू राजनीति की वजह से उन्होंने वक्त से 6 महीने पहले चुनाव की घोषणा कर दी और चुनाव में उनकी पार्टी को करारी हार का सामना करना पड़ा।

भारत और यूके के बीच जो FTA पर बातचीत चल रही है, उसका लक्ष्य दोनों देशों के बीच के कारोबार को 38.1 पाउंड तचक पहुंचाना है।

भारत और यूके ने एफटीए पर 13 दौर की वार्ता की है और 14वां दौर जनवरी में शुरू हुआ, जहां वर्किंग फ्रोफेशनल्स की आवाजाही के साथ साथ कुछ वस्तुओं पर आयात शुल्क रियायतों और कुछ विवादास्पद मुद्दों पर मतभेदों को दूर करके इसे सील करने पर विचार कर रहे थे। इस समझौते में 26 अध्याय हैं, जिनमें माल, सेवाएं, निवेश और बौद्धिक संपदा अधिकार शामिल हैं।

यूके के नये विदेश मंत्री लैमी पहले ही "हमारे मुक्त व्यापार समझौते को अंततः पूरा करने और आगे बढ़ने" के लिए अपना दृढ़ संकल्प जता चुके हैं। एफसीडीओ ने कहा है, कि भारत को जलवायु संकट पर त्वरित कार्रवाई के लिए एक "अपरिहार्य भागीदार" के रूप में देखा जाता है और मंत्री स्तरीय यात्रा का मकसद, स्वच्छ ऊर्जा संक्रमण एजेंडे को आगे बढ़ाना और ब्रिटिश और भारतीय व्यवसायों के लिए नये अवसर पैदा करना है।

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