'हजारों साल में नहीं, कुछ ही घंटों में बन सकता है चंद्रमा', वैज्ञानिकों ने अब अपनी ही थ्योरी पर उठाए सवाल
Moon Formation: पृथ्वी (Earth) से दूर ऊपर अंतरिक्ष में चंद्रमा, ग्रह सहित कई ऐसी चीजें हैं, जो हमेशा से ही वैज्ञानिकों के लिए रिसर्च का विषय रहा है। वहीं लोगों के अंदर भी इनसे जुड़ी जानकारी हासिल करने को लेकर उत्सुकता बनी रहती है। अब तक की वैज्ञानिकों की थ्योरी की अनुसार पृथ्वी के चंद्रमा (Moon) का निर्माण अरबों साल पहले पृथ्वी और मंगल के आकार के ग्रह के बीच प्रलयकारी भिडंत से बाहरी अंतरिक्ष में भेजे गए मलबे के हजारों लाखों सालों की प्रोसेस चलने के बाद हुआ था। लेकिन अब नए अध्ययन में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। नई स्टडी में दावा किया गया है कि चांद कुछ ही घंटों में बन गया होगा, हजारों सालों का लंबा वक्त इसमें नहीं लगा होगा।

हजारों लाखों साल में नहीं इतने वक्त में हुआ निर्माण
हमेशा से यही बताया गया है कि पृथ्वी के चंद्रमा का निर्माण 4.5 अरब साल पहले मंगल के आकार के थिया ग्रह (Theia) की पृथ्वी से प्रलयकारी टक्कर से बाद उसके अवशेष, पत्थर के टुकड़े भारी मात्रा में अंतरिक्ष में भेजे गए, जिसके बाद लंबी प्रक्रिया के बाद चंद्रमा का निर्माण हुआ था। इन घटनाओं को आम तौर पर स्वीकृत किया गया है कि इनकी समयरेखा हजारों वर्ष है, लेकिन नई अवधारणा ज्यादा बेहतर विभेदन के जरिए सुपर कंप्यूटर के हाई रिजॉल्यूशन सिम्यूलेशन्स का सुझाव है कि इसमें सिर्फ कुछ घंटे लग सकते हैं। द एस्ट्रोफिजिकल जर्नल लैटर्स में पब्लिश स्टडी में कहा गया है कि चंद्रमा के निर्माण की प्रक्रिया कुछ ही घंटों में पूरी हो गई थी, ना कि हजारों लाखों साल।

डरहम यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं की स्टडी
यूके में डरहम यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं की एक टीम ने 'द एस्ट्रोफिजिकल जर्नल लैटर्स' में सिमुलेशन से अपना निष्कर्ष पब्लिश किया है। जिसमें शोधकर्ताओं ने कहा है कि चंद्रमा के बनने का प्रोसेस बहुत ही धीमे चलने की जगह कुछ ही घंटों में पूरा हो गया था। टकराव के बाद पृथ्वी का बड़ा हिस्सा टूटकर अंतरिक्ष में चला गया होगा, जिससे कुछ ही घंटों में चांद का निर्माण हो गया होगा। अपोलो-युग के अंतरिक्ष यात्रियों द्वारा एकत्र किए गए नमूने चांद और पृथ्वी चट्टानों के बीच संरचनात्मक समानता का पहला सबूत पेश करते हैं।

जैकब किगेरिस ने दी जानकारी
दरअसल, पिछले सिमुलेशन यह मानते हैं कि पृथ्वी से ज्यादातर मलबे से बने चंद्रमा की निश्चित रूप से अलग कक्षा (orbit) होगी। वैज्ञानिक COSMA नामक एक सुपर कंप्यूटर का इस्तेमाल करके चंद्रमा के निर्माण के विभिन्न संभावित परिदृश्यों की जांच करने में सक्षम थे, जो कि 100 मिलियन कणों तक सिम्युलेटेड थे। डरहम यूनिवर्सिटी के कम्प्यूटेशनल कॉस्मोलॉजिस्ट जैकब किगेरिस ने लाइव साइंस को बताया, " हाई रिजॉल्यूशन के साथ हम और अधिक विस्तार से अध्ययन कर सकते हैं - जैसे कि एक बड़ा टेलीस्कोप आपको दूर के ग्रहों या आकाशगंगाओं की हाई रिज़ॉल्यूशन छवियों को नई डिटेल की खोज करने देता है।"

पृथ्वी के विकास के बारे में जानेंगे?
अध्ययन के दौरान शोधकर्ताओं ने ऐसे सैकड़ों हाई-रिजॉल्यूशन सिमुलेशन चलाए, जो कोण, स्पिन और गति सहित प्रमुख मापदंडों की सीमा को हिलाते थे। जिससे अनुमान लगाना बहुत मुश्किल था। उन्होंने पाया कि पृथ्वी-थिया की टक्कर के कुछ ही घंटों में चंद्रमा बन गया हो सकता है, जिसने हमारे ग्रह के बेदखल टुकड़ों को हटा दिया और अंतरिक्ष में थिया के टुकड़े टुकड़े कर दिए। अध्ययन के सह-लेखक विंसेंट एके ने एक बयान में कहा, "हम जितना अधिक सीखते हैं कि चंद्रमा कैसे बना, उतना ही हम अपनी पृथ्वी के विकास के बारे में जानेंगे। उनके इतिहास आपस में जुड़े हुए हैं।












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