तुर्की ने फिर से संयुक्त राष्ट्र में उठाया कश्मीर का मुद्दा, पाकिस्तान को खुश करने के लिए क्या बोल गए अर्दोआन?
तुर्की के राष्ट्रपति रेसेप तैयप अर्दोआन ने संयुक्त राष्ट्र महासभा(UNGA) में एक बार फिर से कश्मीर का राग अलापा है। UNGA के 78वें सत्र में विश्व नेताओं को दिए गए संबोधन में अर्दोआन ने कहा कि भारत और पाकिस्तान के बीच बातचीत और सहयोग से ही कश्मीर में स्थायी और न्यायपूर्ण शांति आ सकती है।
अर्दोआन ने कहा कि दक्षिण एशिया में क्षेत्रीय शांति, स्थायित्व और समृद्धि का मार्ग स्थापित करने के लिए यह होना बेहद जरूरी है। उन्होंने कहा कि कश्मीर में शांति के लिए जो भी कदम उठाए जाएंगे, उसका वे समर्थन करेंगे।

इससे पहले तुर्की के राष्ट्रपति रेसेप तैयप अर्दोआन ने नई दिल्ली में हुए जी-20 शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री मोदी से मुलाकात के बाद संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की स्थाई सदस्यता का समर्थन किया था।
हालांकि UNGA में भी उन्होंने भारत का समर्थन करते हुए कहा कि ये देश संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में एक अहम भूमिका निभा रहा है और ये गर्व की बात है। उन्होंने कहा कि UNSC के अस्थाई सदस्यों को भी स्थायी सदस्य बनाया जाना चाहिए।
तुर्की के राष्ट्रपति ने कहा कि दुनिया 5 देशों से बड़ी है। ये अब सिर्फ अमेरिका, ब्रिटेन, रूस, चीन और फ्रांस की बात नहीं है। अर्दोआन ने कहा, कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के इन 15 अस्थाई और 5 स्थाई देशों को UNSC में बदल-बदलकर स्थायी सदस्यता दी जानी चाहिए।
पहले देता रहा है कश्मीर पर बयान
आपको बता दें कि तुर्की लगातार कश्मीर को लेकर विवादित बयान देता आया है। इससे पहले मार्च में UNHRC की बैठक में भी अर्दोआन ने UN रिजॉल्यूशन के जरिए कश्मीर मुद्दा सुलझाने की बात कही थी। इस पर भारत ने तुर्किये को देश के आंतरिक मामलों से दूर रहने को कहा था।
इससे पहले पिछले साल भी UNGA 77वीं बैठक में तुर्की ने कश्मीर पर बयान दिया था।
साल 2019 में कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाने के बाद तुर्की ने पाकिस्तान का साथ दिया था। इससे पहले 2020 में भी उन्होंने महासभा में चर्चा के दौरान कश्मीर पर बात की थी। हालांकि, भारत ने अर्दोआन के बयानों की निंदा की थी और देश की स्वायत्ता का सम्मान करने की मांग की थी।












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