तुर्की में भूकंप के दौरान नर्सों ने जान की बाजी लगाकर नवजातों को कैसे बचाया ? देखिए Video

तुर्की में भूकंप के दौरान कुछ लोगों ने अपनी ड्यूटी निभाने के अपनी जान की भी परवाह नहीं की। एक ऐसा ही वीडियो सोशल मीडिया पर अब खूब वायरल हो रहा है। इसमें दो नर्स अस्पताल में नवजातों को बचाने के लिए जान पर खेल गईं।

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तुर्की और सीरिया में भूकंप के 6 दिनों बाद भी चमत्कार की खबरें मिल रही हैं। इतने दिनों बाद भी मलबे से किसी का जीवित निकलना बहुत ही सुखद एहसास देता है। इसके साथ ही साथ रोज नए-नए वीडियो, तस्वीरें और कहानियां सामने आ रही हैं कि उस खौफनाक मंजर के दौरान भी कुछ लोग किस तरह से अपनी जान की परवाह न करके अपनी जिम्मेदारियों को निभाने में मुस्तैदी से डटे हुए थे। एक ऐसा ही वीडियो एक अस्पताल का आया है, जिसमें दो नर्स इमारत से बाहर भागने के बजाए वार्ड में जा कर नवजातों और भूकंप के बीच चट्टान की तरह डटी रहीं।

नवजातों और भूकंप के बीच चट्टान की तरह डटी रहीं नर्स

नवजातों और भूकंप के बीच चट्टान की तरह डटी रहीं नर्स

तुर्की और सीरिया में आए भयानक भूकंप के 6 दिन बाद इस त्रासदी में मरने वालों की तादाद 28,000 से ज्यादा हो चुकी है। लेकिन, प्राकृतिक आपदा के इतने दिन बाद भी उससे जुड़ी तस्वीरें और वीडियो दुनिया भर के लोगों को हिला रही हैं। अब एक नया वीडियो एक अस्पताल की इमारत के भीतर का आया है, जिसमें दिख रहा है कि इसके neo-natal यूनिट में इन्क्यूबेटर में पड़े नवजातों को सुरक्षित रखने के लिए दो नर्सों ने किस तरह से अपनी जान की परवाह किए बगैर उन्हें उसे जमीन पर गिरने से बचाए रखा। जितना भयानक भूकंप था, नर्स चाहतीं तो वहां से भागकर पहले खुद को सुरक्षित कर सकती थीं, लेकिन वह बाहर से वार्ड में भाग कर आईं और मासूमों और भूकंप के बीच चट्टान बनकर खड़ी हो गईं।

नर्सों ने इन्क्यूबेटर्स को गिरने से रोके रखा

नर्सों ने इन्क्यूबेटर्स को गिरने से रोके रखा

तुर्की में एक अस्पताल के नवजात शिशुओं के एक वार्ड का वीडियो पूरी दुनिया में वायरल हो रहा है। बताया जा रहा है कि यह तुर्की के गाजियांटेप शहर का वीडियो है, जो कि इस भूकंप में सबसे ज्यादा प्रभावित इलाकों में से एक है। तुर्की के एंड्रयू हॉपकिंस नाम के एक पत्रकार ने ट्विटर पर वीडियो शेयर करते हुए लिखा है, 'तुर्की के भूकंप वाली रात का यह वीडियो है, जिसमें 2 बहादुर नर्स.....भागने के बजाए- गाजियांटेप अस्पताल में दौड़ते हुए neo-natal केयर यूनिट में पहुंचीं ताकि बेबी इन्क्यूबेटर्स को गिरने से रोक सकें। '

'पहले बिल्ली को बचाओ, फिर मुझे निकालना'

'पहले बिल्ली को बचाओ, फिर मुझे निकालना'

इसी तरह की एक और भावनात्मक घटना में बचावकर्मी तब काफी भावुक हो गए जब यूनिवर्सिटी के छात्र केरेस सेटिन ने कई दिनों तक मलबे में फंस रहने के बावजूद भी राहत कर्मियों से कहा कि पहले उसकी बिल्ली को सुरक्षित निकालें। बचावकर्मियों ने भी वैसा ही किया और पहले स्ट्रॉबेरी नाम की उस बिल्ली को मलबे से निकाला और फिर सेटिन की बांह पकड़ी और उसे भी बाहर सुरक्षित निकाल लाने में कामयाब हुए।

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    सात साल की बच्ची मासूम भाई के लिए बनी ढाल

    सात साल की बच्ची मासूम भाई के लिए बनी ढाल

    इसी तरह से सात साल की उस बच्ची का चेहरा भी कोई नहीं भूल सकता, जो भारी पत्थर के बीच दबे होने के बावजूद अपने छोटे भाई के लिए शील्ड बनकर डटी हुई थी। तब उस बच्ची का वीडियो सोशल मीडिया पर शेयर करके एक युवक ने लिखा था कि 'अपने गिरे हुए घर के मलबे में दबे होने के बावजूद 7 साल की सुंदर सीरियाई बच्ची ने अपने छोटे भाई को बचाने के लिए अपना हाथ उसके ऊपर रखे रहा। दोनों बहादुर बच्चों ने इस संघर्ष को जीत लिया।'

    नर्सों वाला यह वीडियो है वायरल

    अस्पताल वाले वीडियो में दिख रहा है कि दो नर्स किस तरह से भूकंप के दौरान इन्क्यूबेटर को पकड़ कर रखी हुई हैं और बीच में किसी तरह से दो-दो इन्क्यूबेटर को थामने की कोशिश भी कर रही हैं। यह वीडियो सोशल मीडिया पर खूब शेयर किया जा रहा है और खबर लिखने तक इसे 2 लाख 27 हजार के करीब व्यूज मिल चुके हैं। आपदा के समय सामने वाले ऐसे वीडियो मुश्किल घड़ी के बावजूद लोगों को जीने का नया हौसला देता है।


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