'भारत ने पैसे नहीं दिए', बाइडेन के साथ बहस के दौरान डोनाल्ड ट्रंप ने भारत पर लगाए आरोप, क्या है ऐसा मुद्दा?
Donald Trump on India: पांच नवंबर को होने वाले अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव से पहले CNN पर अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और मौजूदा राष्ट्रपति जो बाइडेन के बीच हुई बहस के दौरान भारत का भी मुद्दा उठा है।
पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है, कि उनके प्रशासन ने 2017 में ऐतिहासिक पेरिस जलवायु समझौते से इसलिए बाहर निकलने का फैसला किया था, क्योंकि यह एक "धोखा" था, जिससे वाशिंगटन को 1 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर का नुकसान होता। उन्होंने दावा किया, कि भारत, चीन और रूस इसके लिए भुगतान नहीं कर रहे थे।

रिपब्लिकन पार्टी के संभावित उम्मीदवार डोनाल्ड ट्रम्प ने गुरुवार को डेमोक्रेटिक पार्टी के अपने प्रतिद्वंद्वी राष्ट्रपति जो बाइडेन के साथ पहली राष्ट्रपति पद की बहस में ये दावे किए, जहां 2024 के राष्ट्रपति पद के दोनों उम्मीदवारों ने अर्थव्यवस्था, सीमा, विदेश नीति, गर्भपात, राष्ट्रीय सुरक्षा और जलवायु परिवर्तन की स्थिति पर बहस की है।
व्यक्तिगत हमलों से भरी लगभग 90 मिनट की बहस के दौरान, 78 साल के डोनाल्ड ट्रम्प ने दावा किया, कि पेरिस जलवायु समझौते की लागत 1 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर होगी और अमेरिका एकमात्र ऐसा देश है, जिसे भुगतान करना होगा। इसे "धोखाधड़ी" बताते हुए उन्होंने कहा, कि चीन, भारत और रूस भुगतान नहीं कर रहे हैं।
आपको बता दें, कि साल 2017 में डोनाल्ड ट्रम्प ने 2015 के पेरिस जलवायु समझौते से अमेरिका को बाहर निकाल लिया था और उन्होंने ये कहा था, कि वैश्विक तापमान को 2 डिग्री सेल्सियस से नीचे रखने का अंतर्राष्ट्रीय समझौता अमेरिकी मजदूरों के लिए नुकसानदेह था।
पेरिस समझौते के एक भाग के रूप में, 2009 में अमेरिका और अन्य विकसित देशों ने सामूहिक रूप से 2020 तक प्रति वर्ष 100 अरब अमेरिकी डॉलर का योगदान देने की प्रतिबद्धता व्यक्त की थी, ताकि गरीब, विकासशील देशों, मुख्य रूप से ग्लोबल साउथ में, समुद्री जलस्तर में वृद्धि और बढ़ती गर्मी जैसे जलवायु परिवर्तन के प्रभावों के अनुकूल होने में मदद की जा सके।
सीएनएन की रिपोर्ट के मुताबिक, विकसित देशों ने 2022 में अपने सामूहिक लक्ष्य को दो साल देरी से पूरा किया, लेकिन यह आंकड़ा कभी भी उतना ज्यादा नहीं रहा, जितना ट्रंप ने सुझाया था। रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रंप ने जो कहा उसके विपरीत, अमेरिका ने कभी भी अंतरराष्ट्रीय जलवायु वित्त में 1 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर का भुगतान नहीं किया है। ट्रंप द्वारा अमेरिका को पेरिस समझौते से बाहर निकालने के बाद, अमेरिका ने जलवायु परिवर्तन के लिए वैश्विक वित्त लक्ष्य के लिए कुछ भी भुगतान नहीं किया है।
रिपोर्ट में कहा गया है, कि राष्ट्रपति बाइडेन ने अमेरिका से सालाना 11.4 अरब अमेरिकी डॉलर देने का वादा किया है, लेकिन इस स्तर की फंडिंग नहीं हो पाई है। जलवायु परिवर्तन पर संदेह करने वाले ट्रंप ने लगातार तर्क दिया है, कि चीन और भारत जैसे देश पेरिस समझौते से सबसे ज्यादा लाभान्वित हो रहे हैं। चीन दुनिया का सबसे बड़ा कार्बन उत्सर्जक है, उसके बाद अमेरिका, भारत और यूरोपीय संघ का स्थान है।












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