ये हैं दुनिया के 10 सबसे खतरनाक आतंकवादी संगठन, जो बन चुके हैं एक अरब से ज्यादा लोगों के लिए खतरा
World's Deadliest Terrorist Group: पिछले साल 7 अक्टूबर को हमास ने दक्षिणी इजराइल पर हमले के दौरान जिस दरिंदगी का उदाहरण दिया था, वो बताता है, कि ये आतंकवादी संगठन दुनिया और मानवता के लिए कितना बड़ा खतरा बन चुके हैं।
वैसे तो दुनिया में दर्जनों छोटे-बड़े आतंकवादी संगठन हैं, लेकिन कुछ आतंकी संगठन ऐसे हैं, जो वहसीपन की हर सीमा को लांघ जाते हैं। इन आतंकी संगठनों से मानवता या इंसानियत जैसी चीजों की उम्मीद नहीं की जा सकती है। ये आतंकी संगठन खौफ कायम करने के लिए आतंक और मजहब को हथियार के तौर पर इस्तेमाल करते हैं, जिससे ये काफी खतरनाक बन जाते हैं।

आइये कुछ ऐसे ही आतंकी संगठनों के बारे में जानते हैं, जो दुनिया के कम से कम एक अरब से ज्यादा लोगों के लिए खतरा बने हुए हैं।

1- बोको हराम
बोको हराम एक इस्लामी आतंकवादी संगठन है और ये अपनी क्रूरता के लिए कुख्यात है। इसने अफ्रीकी देशों में हजारों लोगों की बड़ी ही बेरहमी से हत्या की है। इसकी स्थापना 2002 में मुहम्मद यूसुफ ने उत्तर-पूर्वी नाइजीरिया के मैडुगुरी शहर में की थी, और ये संगठन 2009 तक काफी शक्तिशाली बन गये, जिसके बाद से इसने अफ्रीकी देशों में बड़े पैमाने पर हत्याएं की हैं।
बोको हराम, पश्चिमी शिक्षा का विरोध करता है और इसका मकसद पैगंबर मोहम्मद की शिक्षा को दुनियाभर में कायम करना है। इसके अलावा, ये नाइजीरिया की सरकार को उखाड़ फेंकना चाहता है, ताकि कठोर इस्लामिक शासन लागू किया जाए। सबसे खतरनाक ये है, कि 18 करोड़ से ज्यादा आबादी वाले नाइजीरिया के मुस्लिम बहुल इलाकों में इसे भारी समर्थन हासिल है, जिसकी वजह से इसे खत्म करना काफी मुश्किल मालूम होता है। बोको हरम सामुहिक नरसंहार के लिए कुख्यात है और इसने एक एक हमले में 100-100 लोगों की हत्याएं की हैं और सैकड़ों लड़कियों को स्कूलों से अगवा किया है।

2- इस्लामिक स्टेट
अलकायदा के बाद जिस आतंकी संगठन ने हजारों बेगुनाहों की हत्या की, वो इस्लामिक स्टेट (ISIS) है, और इसे एक वक्त दुनिया का सबसे शक्तिशाली आतंकी संगठन भी कहा गया था। इस्लामिक स्टेट का मकसद पूरी दुनिया में कठोर शरिया-आधारित इस्लामिक शासन कायम करना था और एक वक्त इसने उत्तरी इराक और पश्चिमी सीरिया पर कब्जा भी कर लिया था और अपनी सरकार बनाने की घोषणा कर दी थी, लेकिन फिर अमेरिकी सेना ने इसे जड़ से उखाड़ फेंका।
ISIS की स्थापना अबु बक्र अल बगदादी ने की थी और ये काफी तेजी से आगे बढ़ा। दुनिया के हर हिस्से से इस्लामिक चरमपंथ में यकीन रखने वाले लोग इससे जुड़े। हालांकि, अब ये कमजोर पड़ गया है, लेकिन ये फिर से अपनी जड़े जमाने की कोशिश कर रहा है। ये अब अफगानिस्तान, सीरिया और इराक के कुछ हिस्सों में सक्रिय है।

3- अलकायदा
अलकायदा को आप दुनियाभर के आतंकवादी संगठनों का ब्रांड एंबेसडर कह सकते हैं और इसकी स्थापना करने वाले ओसामा बिन लादेन को भारी संख्या में कट्टर मुसलमानों का समर्थन मिला। इसकी स्थापना 1989 में ओसामा बिन लादेन ने की थी और इसने अमेरिका में 9/11 का हमला कर पूरी दुनिया में सनसनी मचा दी थी। इस हमले के बाद ही अमेरिका को पहली बार आतंकवाद को लेकर अक्ल ठिकाने लगी और उसने 'आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई' की शुरूआत की थी।
इस हमले के बाद ही अमेरिका ने अफगानिस्तान पर हमला किया था, क्योंकि उस वक्त अफगानिस्तान के तालिबान शासकों ने अलकायदा के आतंकियों को अमेरिका को सौंपने से इनकार कर दिया था। अब ये संगठन काफी कमजोर हो चुका है। इसके तमाम बड़े नेता मारे जा चुके हैं, हालांकि ये अफगानिस्तान में फिर से जड़ें जमाने की कोशिश कर रहा है।

4- तालिबान
तालिबान अब एक हकीकत है और अफगानिस्तान में शासन करता है। तालिबान अब डिप्लोमेसी के जरिए दुनिया के साथ संबंध बनाने में लगा है, लेकिन अभी भी किसी भी देश ने तालिबान शासन को मान्यता नहीं दी है। लेकिन, ये अपनी मजहबी कट्टरता और आतंकवादी हमलों के लिए कुख्यात रहा है।
तालिबान एक पश्तो शब्द है, जिसका मतलब छात्र होता है, लेकिन ये संगठन लड़कियों की शिक्षा के सख्त खिलाफ है। इससे 1996 में पहली बार अफगानिस्तान पर शासन शुरू किया था, लेकिन 2001 में अमेरिका के हमले के बाद इसके नेता काबुल छोड़कर भाग गये। इसकी स्थापना 90 के दशक में मुल्ला उमर ने की थी और अब इसने अफगानिस्तान में कट्टर इस्लामिक शासन की स्थापना कर दी है।

5- हक्कानी नेटवर्क
हक्कानी नेटवर्क अब तालिबान के साथ अफगानिस्तान की शासन को संभालता है, लेकिन 15 अगस्त 2021 को काबुल पर कब्जे से पहले ये अफगानिस्तान में दर्जनों बम धमाकों में सैकड़ों लोगों को मार चुका है। ये कट्टर इस्लामिक विचारधारा वाला संगठन है, जिसके नेताओं को पाकिस्तान में ट्रेनिंग मिली है।
ऐसा कहा जाता है, कि पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी ISI की मदद से हक्कानी नेटवर्क की स्थापना जलालुद्दीन हक्कानी (Jalaluddin Haqqani) ने की थी और इसने ISI की शह पर सोवियत संघ और अमेरिकी सैनिकों के खिलाफ लड़ाई लड़ी। जब अमेरिका ने अफगानिस्तान पर हमला किया था, उस वक्त इसके नेताओं को पाकिस्तान ने उत्तरी वजीरिस्तान में पनाह दी थी। अब ये संगठन खुद को अफनागिस्तान तक ही सीमित रखना चाहता है और तालिबान के साथ मिलकर अफगानिस्तान में शासन चला रहा है।

6- हमास
हमास के पॉलिटिकल विंग के नेता इस्माइल हानिया को एक दिन पहले ईरान की राजधानी तेहरान में मार दिया गया है और उसकी हत्या के आरोप इजराइल की खुफिया एजेंसी मोसाद पर लगे हैं, जिससे मध्य-पूर्व में तनाव काफी बढ़ गया है। हमास को अमेरिका और इजराइल आतंकवादी संगठन मानते हैं, लेकिन ज्यादातर मुस्लिम देश इसे एक आंदोलन मानते हैं, जिसका मकसद फिलीस्तीन को आजाद करवाना है।
हमास की स्थापना 1980 के दशक में की गई थी और इसने पहली बार 1987 में इजराइल के खिलाफ 'पहले इंतिफादा' की घोषणा की थी, जिसका मतलब 'इस्लामिक रेजिसटेंस मूवमेंट' होता है। शेख अहमद यासीन ने हमास की स्थापना की थी, जिसे 2004 में इजराइल ने मार गिराया था। गाजा पट्टी पर हमास का ही शासन रहा है और ये हथियार के दम पर इजराइल को खत्म करना चाहता है। ये कूटनीति में यकीन नहीं रखता है।

7- इस्लामिक जिहाद
फिलिस्तीनी इस्लामिक जिहाद (PIJ), हमास की तरह ही गाजा से ही ऑपरेट होता है और पिछले दो-तीन सालों में इस्लामिक जिहाद ही इजराइल पर हमले करते आया है। इस्लामिक जिहाद के पास लंबी दूरी तक मार करने वाले रॉकेट नहीं हैं, लेकिन पीआईजे के पास छोटे हथियारों, मोर्टार, रॉकेट और टैंक-रोधी मिसाइलों का एक महत्वपूर्ण शस्त्रागार और अल-कुद्स ब्रिगेड नामक एक सक्रिय सशस्त्र विंग है।
फिलिस्तीनी इस्लामिक जिहाद को इजराइल-फिलिस्तीन के बीच होने वाली शांति प्रक्रिया को भंग करने वाला माना जाता है और ये शांति प्रक्रिया का विरोध भी करता है। ये इजरायल के साथ किसी भी तरह की बातचीत का विरोध करता है और यह हमास की तरह ही इजरायल के 'कब्जे' के खिलाफ सशस्त्र विरोध चलाता है'। इस्लामिक जिहाद को भी ईरान से समर्थन मिलता है। फिलिस्तीनी इस्लामिक जिहाद की स्थापना 1981 में मिस्र में फिलिस्तीनी छात्रों ने की थी, जिसका मकसद इजराइल के कब्जे वाले वेस्ट बैंक, गाज़ा और अब इज़राइल के अन्य क्षेत्रों को मिलाकर एक फ़िलिस्तीनी राज्य की स्थापना करना था। इस्लामिक जिहाद को भी हमास और हिज्बुल्लाह की तरह ईरान का प्रॉक्सी कहा जाता है।

8- हिज्बुल्लाह
हिज्बुल्लाह को ईरान का प्रॉक्सी माना जाता है और अब ये काफी शक्तिशाली आतंकवादी संगठन बन चुका है, जिसके हथियार भंडार में रॉकेट और मिसाइलों की भरमार है। हिज्बुल्लाह एक शिया मुस्लिमों का आतंकवादी संगठन है और लेबनान के एक बड़े हिस्से पर इसका कंट्रोल है।
इजराइल ने जब दक्षिणी लेबनान पर 1980 के दशक में हमला किया था, उस वक्त इस आतंकी संगठन की नींव रखी गई थी और इसकी स्थापना 1985 में की गई थी। हिज्बुल्लाह का कंट्रोल 1992 में हसन नसरूल्ला है, जो ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई का करीबी है। हालांकि, दो दिन पहले इसके भाई को इजराइल ने एक स्ट्राइक में मार दिया है। इजराइल के डर से हसन नसरूल्ला सिर्फ टीवी के जरिए भाषण देता है। ये कहां हैं, इसकी जानकारी किसी को नहीं है।
9- तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP)
तहरीक-ए-तालिबान (TTP) को पाकिस्तान 'बैड तालिबान' कहता है और इसने पाकिस्तान की नाक में दम कर रखा है। इसका मकसद पाकिस्तान में अफगानिस्तान की ही तरह कट्टर इस्लामिक शासन की स्थापना करना है। शुरूआत में तो तहरीक-ए-तालिबान को पाकिस्तानी सेना से कोई मतलब नहीं था, लेकिन दोनों के बीच संघर्ष की शुरूआत उस वक्त हुई, जब अमेरिकी सैनिकों के साथ मिलकर पाकिस्तानी सेना ने पहाड़ी वजीरिस्तान क्षेत्र में अल-क़ायदा आतंकियों के खिलाफ अभियान चलाना शुरू किया। अलकायदा में भी उसी समुदाय के लड़ाके शामिल थे, जो तहरीक-ए-तालिबान में थे, लिहाजा अब टीटीपी का पाकिस्तानी सेना के साथ संघर्ष शुरू हो गया है।
मध्य एशियाई आतंकवादी संगठन को इस दौरान अरब के आतंकियों के साथ साथ स्थानीय पश्तून जनजातियों का भारी समर्थन हासिल है और ये काफी शक्तिशाली हो चुका है। टीटीपी ने पाकिस्तान के पेशावर में एक आर्मी पब्लिक स्कूल पर भीषण हमला किया था और 150 से ज्यादा बच्चों और शिक्षकों को मौत के घाट उतार दिया, इसमें 134 छात्र शामिल थे, जिनमें ज्यादातर पाकिस्तानी आर्मी अफसरों के बच्चे थे। ऐसा कहा जाता है, कि अफगानिस्तान और पाकिस्तान के आतंकवादी संगठनों के पास नई भर्तियों की कमी नहीं होती है, क्योंकि उन इलाकों में मदरसों में इतनी चरमपंथी शिक्षा दी जाती है, कि वो मदरसों से निकलने के बाद इन आतंकी संगठनों में कट्टर इस्लामिक शासन लागू करने के मकसद से भर्ती हो जाते हैं।
10- अल नुस्रा फ्रन्ट
अल नुस्रा फ्रन्ट यानी जमात अल नुस्रा का भी मकसद इस्लामिक शासन को लागू करना है और इसे अभी तक अमेरिका, कनाडा, न्यूजीलैंड, सऊदी अरब, तुर्की, यूनाइटेड किंगडम जैसे देश आतंकवादी संगठन घोषित तक इसपर प्रतिबंध लगा चुके हैं। अल नुस्रा एक अरबी शब्द है, जिसका मतलब 'अल-शाम के लोगों के समर्थन में मोर्चा' होता है और ये आतंकी संगठन सीरिया और लेबनान में अलकायदा के ब्रांच के तौर पर एक्टिव है और तेजी से अपनी शक्ति को बढ़ा रहा है। इस संगठन की स्थापना अबु मोहम्मद अल जुलानी ने की थी, जो सीरियाई विद्रोहियों का कट्टर समर्थक था, लिहाजा उसने सीरिया के बशर अल-असद शासन के खिलाफ जंग छेड़ रखी है। ये आज भी सीरिया में सबसे ताकतवर शक्ति है और अकसर बम धमाके करता रहता है।












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