चीन में अगले 80 सालों में घट जाएगी 1 अरब आबादी, बूढ़ा हो जाएगा देश, कठोर जनसंख्या नीति का होगा भयंकर नुकसान

दुनिया की सबसे बड़ी आबादी वाला देश चीन अपनी घटती आबादी को लेकर परेशान है। चीन की घटती जनसंख्या 2025 तक नकारात्मक वृद्धि के आंकड़े तक पहुंच जाएगी।

बीजिंग, 26 जुलाईः दुनिया की सबसे बड़ी आबादी वाला देश चीन अपनी घटती आबादी को लेकर परेशान है। चीन की घटती जनसंख्या 2025 तक नकारात्मक वृद्धि के आंकड़े तक पहुंच जाएगी। ऐसा अनुमान लगाया जा रहा है कि यह एक सदी से भी अधिक समय तक सिकुड़ती रह सकती है। यह बात सोमवार को एक मीडिया रिपोर्ट में कही गई है। इसमें समस्या के समाधान के लिए जनसंख्या की समग्र गुणवत्ता और बदलती आर्थिक विकास योजनाओं में सुधार की आवश्यकता पर भी प्रकाश डाला गया है।

कुल जनसंख्या वृद्धि दर हुई काफी धीमी

कुल जनसंख्या वृद्धि दर हुई काफी धीमी

इना पॉपुलेशन एसोसिएशन के वार्षिक सम्मेलन में बृहस्पतिवार को राष्ट्रीय स्वास्थ्य आयोग के जनसंख्या और पारिवारिक मामलों के प्रमुख यांग वेनजुआंग ने कहा कि चीन की कुल जनसंख्या वृद्धि दर काफी धीमी हो गई है और वर्तमान 14 वीं पंचवर्षीय योजना अवधि (2021-25) के दौरान नकारात्मक वृद्धि दर्ज होने की उम्मीद है। यांग वेनजुआंग ने कहा कि तीसरी बाल नीति कुछ समस्याओं को कम कर सकती है लेकिन अल्पाविधि में इस प्रवृत्ति को उलटने की कोई संभावना नहीं दिखती है।

2025 से शुरू हो सकती है गिरावट

2025 से शुरू हो सकती है गिरावट

चीन के सरकारी अखबार ग्लोबल टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, नए आधिकारिक आंकड़े बताते हैं कि 2025 की शुरुआत में जनसंख्या में गिरावट शुरू हो सकती है क्योंकि जन्म दर दशकों के अपने निचले स्तर पर पहुंच गई है। वहीं, द सन की खबर के अनुसार चीन एक 'जनसंख्या संकट' की तरफ बढ़ रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक चीन के इस जनसंख्या संकट की मुख्य वजह कम्युनिस्ट पार्टी की कठोर नीतियां रही हैं।

मात्र 58 करोड़ होगी जनसंख्या

मात्र 58 करोड़ होगी जनसंख्या


शंघाई एकेडमी ऑफ सोशल साइंसेज ने भविष्यवाणी की है कि आने वाले कुछ सालों में चीन जनसंख्या गिरनी शुरू हो जाएगी और 1.44 बिलियन से घटकर सिर्फ 58 करोड़ ही बचेगी। इससे पहले 2019 में इस संस्था ने उम्मीद की थी कि चीन की जनसंख्या में गिरावट 2029 से शुरू होगा। वहीं, यूनाईटेड नेशनल पॉपुलेशन ने चीन की पिक जनसंख्या की उम्मीद 2031-32 की थी। शंघाई एकेडमी ऑफ सोशल साइंसेज टीम 2021 के बाद 1.1% की वार्षिक औसत गिरावट की भविष्यवाणी करती है, जो चीन की आबादी को 2100 में 587 मिलियन तक कम कर देती है, जो आज की तुलना में आधे से भी कम है।

संकट को और गहरा करेंगे पेंशनभोगी

संकट को और गहरा करेंगे पेंशनभोगी

ऐसे में चीन में आबादी के रूप में बचे लोगों में से आधे 'पेंशनभोगी' होंगे जो देश के बढ़ते संकट को और गहरा करेंगे। नई सदी की शुरुआत में 30 करोड़ पेंशनभोगी और 34 करोड़ लोग काम करने वाले होंगे। इस संकट के कई दुष्परिणाम चीन को भुगतने पड़ सकते हैं। जनसंख्या संकट में बड़ी संख्या में पेंशनभोगियों का भुगतान करने के लिए पैसा कमाने कर्मचारी बेहद कम होंगे, काम न करने वाली एक बूढ़ी आबादी का समर्थन करने के लिए अधिक संसाधनों का इस्तेमाल किया जाएगा, सेना में नए सैनिकों की संख्या कम होती जाएगी और चीन अमीर व शक्तिशाली होने से पहले ही बूढ़ा हो जाएगा।

हर प्रांत में जन्मदर हुआ कम

हर प्रांत में जन्मदर हुआ कम

रिपोर्ट में कहा गया है कि 29 प्रांतों की ओर से जारी 2021 के जन्म के आंकड़ों से पता चलता है कि पिछले साल नए जन्मों की संख्या कई प्रांतों में दशकों में सबसे कम थी और उच्चतम जन्म संख्या वाले शीर्ष 10 प्रांतों में से केवल छह में 500,000 से अधिक थे। पूर्वी चीन के जियांग्शी प्रांत में 1950 के बाद पहली बार 4 लाख से नीचे नए जन्म हुए हैं। वहीं, चीन की तीसरी सबसे बड़ी आबादी वाले शहर हेनान में 1978 के बाद पहली बार 8 लाख से कम बच्चों का जन्म हुआ है।

अगले साल शीर्ष पर होगा भारत

अगले साल शीर्ष पर होगा भारत

संयुक्त राष्ट्र की एक हालिया रिपोर्ट के अनुसार, भारत अगले साल चीन को दुनिया के सबसे अधिक आबादी वाले देश के रूप में पीछे छोड़ सकता है। चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने अपनी 'चाइना ड्रीम' के बारे में बताया है, जिसके तहत करोड़ों लोगों को गरीबी से बाहर निकाला जाएगा और देश को दुनिया में सबसे ताकतवर बनाया जाएगा। चीन की घटती जनसंख्या जिनपिंग के ख्वाब को तोड़ सकती है जहां बेहद छोटी संख्या में कर्मचारियों की कमाई से बड़ी संख्या में रिटायर्ड लोगों का पोषण किया जाएगा।

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