ग्रेट बैरियर रीफ 'खतरे में' है, इस सच्चाई से क्यों बचना चाहता है ऑस्ट्रेलिया ? जानिए

यूनेस्को के वर्ल्ड हेरिटेज सेंटर और आईयूसीएन ने ग्रेट बैरियर रीफ को 'वर्ल्ड हेरिटेज इन डेंजर लिस्ट' में डालने का सुझाव दिया है। ऑस्ट्रेलिया इसका विरोध कर रहा है। पिछली बार भी वह तैयार नहीं हुआ था।

दुनिया के सबसे विशाल और खूबसूरत जैव विविधता वाला ग्रेट बैरियर रीफ पर गंभीर खतरा मंडरा रहा है। संयुक्त राष्ट्र से जुड़े पैनल ने इसे 'डेंजर लिस्ट' में डालने का सुझाव दिया है, लेकिन ऑस्ट्रेलिया इसके लिए तैयार नहीं हो रहा है। इस तरह का सुझाव पिछले साल भी दिया गया था और तब भी ऑस्ट्रेलिया इसे रुकवाने में सफल हो गया था। आइए जानते हैं कि ग्रेट बैरियर रीफ है क्या? विश्व धरोहरों में शामिल यह क्षेत्र किस संकट से गुजर रहा है? इसको लेकर वैज्ञानिकों ने क्या भविष्यवाणी की है? और ऑस्ट्रेलिया को इसे डेंजर जोन की लिस्ट में शामिल किए जाने को लेकर क्यों आपत्ति हो रही है। ऐसा होने से उसे किस तरह की दिक्कतें हो सकती हैं?

ग्रेट बैरियर रीफ को लेकर यूएन पैनल ने क्या कहा है ?

ग्रेट बैरियर रीफ को लेकर यूएन पैनल ने क्या कहा है ?

संयुक्त राष्ट्र से जुड़ी संस्थाएं इंटरनेशनल यूनियन फॉर कंजर्वेशन ऑफ नेचर (IUCN) और यूनेस्को के वर्ल्ड हेरिटेज सेंटर (WHC) ने एक साझा रिपोर्ट में ऑस्ट्रेलिया के ग्रेट बैरियर रीफ को लेकर गहरी चिंता जताई है। इन्होंने ग्रेट बैरियर रीफ (जीबीआर) को 'वर्ल्ड हेरिटेज इन डेंजर की लिस्ट में शामिल करने' का सुझाव दिया है। लेकिन, ऑस्ट्रेलिया में इस सुझाव को लेकर छटपटाहट मच गई है। वह इसका विरोध कर रहा है। संयुक्त राष्ट्र के पैनल ने ग्रेट बैरियर रीफ को लेकर सबसे बड़ा खतरा यह बताया है कि इसकी मूल विशेषताओं पर हानिकारक प्रभाव पड़ सकता है। जीबीआर की स्थिति का आकलन यूं नहीं किया गया है, बल्कि एक्सपर्ट की टीम ने इस साल की शुरुआत में ब्रिसबेन से लेकर केर्न तक ग्रेट बैरियर रीफ की यात्रा की है और उसका सूक्ष्म विश्लेषण किया है।

ऑस्ट्रेलिया की प्रतिक्रिया क्या है ?

ऑस्ट्रेलिया की प्रतिक्रिया क्या है ?

संयुक्त राष्ट्र के पैनल के सुझावों के तत्काल बाद ही ऑस्ट्रेलियाई सरकार ने एक बयान जारी करके जीबीआर के संरक्षण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता बताई है। यह भी कहा गया है कि उसका संरक्षण भी उसी दिशा में है, जिस तरह से रिपोर्ट में सुझाया गया है। सांसद तनया पिलबेर्सेक ने बयान में कहा है, 'हमें लगता है कि जो लोग रीफ के भरोसे हैं और काम करते हैं, उन्हें यह रिपोर्ट हिला सकती है। यह ध्यान रखना जरूरी है कि रीफ को 'खतरे वाली' सूची में रखने का प्रस्ताव यूनेस्को का नहीं है। यह एक टेक्निकल रिपोर्ट है और वर्ल्ड हेरिटज सेंटर को इसपर अभी सुझाव देने हैं, जिसपर वर्ल्ड हेरिटेज कमिटी विचार करेगी।' अब सवाल है कि ऑस्ट्रेलिया में इस रिपोर्ट को लेकर इतनी छटपटाहट क्यों है?

ग्रेट बैरियर रीफ क्या है ?

ग्रेट बैरियर रीफ क्या है ?

ऑस्ट्रेलिया के क्वींसलैंड के तट पर स्थित ग्रेट बैरियर रीफ दुनिया का सबसे विशाल और खूबसूरत मूंगे की चट्टान वाला क्षेत्र है। यह इलाका लगभग 3,44,400 वर्ग किलोमीटर दायरे में फैला है। इसमें 2,900 चट्टानें हैं और 900 द्वीप हैं। सबसे बड़ी बात यह है कि यह वैश्विक पारिस्थितिकी तंत्र का ऐसा हिस्सा है, जिसके नुकसान को झेल पाना जैविक संतुलन के लिए आसान नहीं है। यह दुनिया के सबसे विशाल जैव विविधता वाले क्षेत्र में भी शामिल है। ग्रेट बैरियर रीफ में अकेले करीब 400 तरह की मूंगे की चट्टानें मौजूद हैं। इसी तरह मछलियों की डेढ़ हजार से भी ज्यादा प्रजातियों का यह बसेरा है और 4,000 से अधिक मोलुस्क भी यहां हैं। यूनेस्को ने 1981 में इसे वैश्विक धरोहर में शामिल किया था। यह दुनिया में अपनी खूबसूरती के लिए मशहूर है, जो समुद्र के अंदर और बाहर दोनों से ही दिव्य नजारे के लिए जाना जाता है।

ग्रेट बैरियर रीफ को क्यों खतरा है ?

ग्रेट बैरियर रीफ को क्यों खतरा है ?

ऑस्ट्रेलिया की ओर से ग्रेट बैरियर रीफ को प्राकृतिक तौर पर संरक्षित रखने के काफी प्रयास किए भी जाते रहे हैं। लेकिन, जलवायु परिवर्तन की समस्या और ला नीना जैसी प्राकृतिक घटनाओं की वजह से इसकी सुंदरता और प्रकृति को नुकसान हो रहा है, यह बात सच है। महासागरों के गर्म होने के चलते मूंगे की चट्टानें अपना प्राकृतिक रंग (ब्लीचिंग की समस्या) खोने लगी हैं। क्योंकि मूंगे की चट्टानों के ऊपर के शैवाल बदरंग होने लगे हैं। पानी की गुणवत्ता बिगड़ने से अलग खतरा मंडराने लगा है। यहां पाए जाने वाले जीवों को भी नुकसान पहुंचने का डर है।

2050 तक विलुप्त होने की जताई जा चुकी है आशंका

2050 तक विलुप्त होने की जताई जा चुकी है आशंका

क्वींसलैंड के उत्तरपूर्वी कोरल सागर में मौजूद जीबीआर उसके किनारे के लिए दीवार का काम करता है। इसका ज्यादातर हिस्सा समुद्र के अंदर है और बाहर कुछ हिस्से का ही दीदार होता है। यह दीवार करीब 1,200 मील लंबी और कहीं 10 तो कहीं 90 मील तक चौड़ी है। समुद्र के नीचे यह 200 फीट तक गहराई में है। हालांकि, वैज्ञानिक लंबे समय से इसके विलुप्त हो जाने की आशंका जता चुके हैं और कुछ ने तो 2050 तक के लिए इसके पूरी तरह से खत्म होने की भविष्यवाणी भी कर चुके हैं।

ऑस्ट्रेलिया को चिंता क्यों हो रही है ?

ऑस्ट्रेलिया को चिंता क्यों हो रही है ?

ग्रेट बैरियर रीफ का ऑस्ट्रेलिया की अर्थव्यवस्था में बहुत बड़ा योगदान है। 2.5 करोड़ से कुछ अधिक आबादी वाले देश में सिर्फ जीबीआर के भरोसे 64,000 से ज्यादा लोगों को रोजगार मिला हुआ है। ऊपर से हर साल इसकी वजह से देश को अरबों डॉलर का राजस्व प्राप्त होता है। यह राजस्व इसकी वजह से चलने वाले कारोबार और पर्यटन दोनों की वजह से आता है। इसके अलावा यहां की मूल आबादी परंपरागत रूप से इसी समुद्री वातावरण पर पूरी तरह से निर्भर रही है। ग्रेट बैरियर रीफ उनकी संस्कृति और परंपरा से जुड़ा हुआ है। ऑस्ट्रेलियाई सरकार को इसी बात की चिंता सता रही है कि 'डेंजर लिस्ट' में शामिल किए जाने के बाद इसपर वैश्विक निगरानी बढ़ जाएगी, जिससे उसे कई तरह से नुकसान उठाना पड़ सकता है और ज्यादा रोक-टोक से पर्यटन पर असर पड़ सकता है। (दूसरी और तीसरी तस्वीर के अलावा बाकी ट्विटर वीडियो से)

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