द फ्लाईंग सॉसर: उड़न तश्तरी पर पहली एक्शन थ्रिलर फिल्म
नई दिल्ली। पृथ्वी के अलावा किसी दूसरे ग्रह पर भी प्राणी रहते हैं? मनुष्य के मन में हमेशा से इस बात को जानने की लालसा रही है। वैज्ञानिकों के अलावा लेखकों और फिल्मकारों के लिए भी यह प्रिय विषय है। इंग्लैंड के लेखक एच जी वेल्स ने 1898 में एक उपन्यास लिखा था 'वार ऑफ द वर्ड्स'। इसमें पहली बार जिक्र किया गया था कि मंगल ग्रह पर एलियंस (मार्शियंस) रहते हैं। इस विज्ञान कथा में बताया गया है कि कैसे मार्शियंस (मंगल ग्रह पर रहने वाले निवासी) ने दक्षिणी इंग्लैंड पर हमला कर दिया है। जब 1947 में केनेथ आर्नोल्ड ने उड़न तश्तरी देखने का दावा किया तो इस रहस्यमयी घटना की तरफ अमेरिकी फिल्म निर्माताओं का भी ध्यान आकृष्ट हुआ। तब तक केनेथ आर्नोल्ड के बयान के बाद आकाश में उड़ने वाली रहस्यमयी आकृतियों के लिए फ्लाईंग सॉसर शब्द प्रचलन में आ चुका था। इसके बाद 1950 में अमेरिकी फिल्म निर्माता और निर्देशक माइकल कोनराड ने एक फिल्म बनायी जिसका नाम था, द फ्लाईंग सॉसर।

द फ्लाईंग सॉसर की कहानी
अमेरिका के खुफिया अधिकारियों का पता चलता है कि सोवियत संघ के कुछ जासूस अमेरिकी प्रांत अलास्का के सुदूर इलाके में फ्लाईंग सॉसर (उड़न तश्तरी) की सच्चाई का पता लगाने के लिए अभियान चला रहे हैं। अलास्का प्रांत अमेरिका के उत्तर पश्चिमी भाग में है। इसके उत्तर में आर्कटिक सागर और दक्षिण पश्चिम में प्रशांत महासागर है। रूस का एक स्वायत्त प्रशासानिक क्षेत्र है चुकोत्का, जो पूरब में सबसे दूर अवस्थित है। चुकोत्का, चुकची सागर से घिरा क्षेत्र है। चुकची सागर, आर्कटिक महासागर का सीमांत सागर है और यह अमेरिका के अलास्का राज्य से सटा हुआ है। इस तरह रूस अपने सुदूर पूर्वी स्वायत्तशासी क्षेत्र चुकोत्का के कारण अलास्का के नजदीक है। रूस के जासूस अलास्का के कम आबादी वाले एक वनक्षेत्र में फ्लाईंग सॉसर का पता लगाने के जासूसी मिशन पर हैं। इस बात की जानकारी मिलने पर अमेरिकी खुफिया विभाग के अधिकारी हैंक थोर्न (रसेल हिक्स) रूसी जासूसों को पकड़ने के लिए एक कोवर्ट ऑपरेशन प्लान करते हैं।

अमेरिका का वो जासूसी अभियान
हैंक थोर्न कोवर्ट ऑपरेशन के लिए एक वैसे धनी और मस्तमौला लड़के का चयन करते हैं जिसका बचपन अलास्का के उस सुदूर इलाके में गुजरा है। इस लड़के का नाम है माइक ट्रेंट जिसकी भूमिका खुद माइकेल कोनराड (निर्देशक) ने निभायी है। इस गुप्त मिशन को लीड कर रही हैं एक महिला जासूस वी लेंग्ली ( पैट गैरिसन)। चूंकि ट्रेंट उस इलाके की भौगोलिक स्थिति से वाकिफ है, इसलिए उसका काम सिर्फ लेंगली का सहयोग करना है। इनकी पहचान छिपाने के लिए प्रचारित किया जाता है कि ट्रेंट मानसिक अवसाद का एक रोगी है जिसकी सेवा के लिए लेंग्ली नर्स के रूप में तैनात है। ट्रेंट को जब पता चलता है कि उसके साथ काम करने वाली स्पाई एजेंट एक खूबसूरत लड़की है तो वह बहुत खुश होता है।

फ्लाईंग सॉसर की खोज में
जंगल के जिस इलाके में सोवियत संघ के जासूसों के सक्रिय होने का अंदेशा है उसके आसपास ट्रेंट का एक पुश्तैनी मकान है। योजना के मुताबिक ट्रेंट और लेंग्ली उस मकान में पहुंचते हैं। वहां जाने पर उनकी मुलाकात घर के केयर टेकर हांस (हांज वेन ट्यूफेन) से होती है। महिला जासूस लेंगली इस बात पर गौर करती कि हांस के बोलने का लहजा गैरअमेरिकी है। ट्रेंट पहले यही मानता है कि इस इलाके में फ्लाईंग सॉसर जैसी कोई चीज दिखायी नहीं पड़ती। एक दिन जब उसे अपने घर की छत के ऊपर फ्लाईंग सॉसर उड़ती हुई दिखायी पड़ती है तब उसे भी अभियान की वास्तविकता पर भरोसा हो जाता है। इस बीच महिला जासूस वेंग्ली इस बात का पता लगा लेती है कि उनका केयरटेकर हांस दरअसल एक रूसी जासूस है। हांस फ्लाईंग सॉसर को हासिल करने की कोशिश कर रहा है।

पूरा हुआ मिशन
फिर यह पता चलता है कि इस फ्लाईंग सॉसर का आविष्कार अमेरिकी वैज्ञानिक डॉक्टर लॉफ्टन (रॉय एंगेल) ने किया है। डॉक्टर लॉफ्टन का एक सहायक है जिसका नाम है टर्नर। टर्नर साम्यवादियों से सहानुभूति रखता है। वह फ्लाईंग सॉसर को बेचने के लिए सोवियत संघ से 10 लाख डॉलर में सौदा करता है। अंत में वेंग्ली और ट्रेंट फ्लाईंग सॉसर को रुसी जासूसों से बचाने म् कामयाब हो जाते हैं। इस तरह उनक मिशन पूरा होता है। इस फिल्म से एक बात प्रतिध्वनित हुई थी कि अमेरिकी वैज्ञानिकों को फ्लाईंग सॉसर के बारे में बहुत कुछ मालूम है। लेकिन उन्होंने दुनिया से इस बात को छिपा कर रखा। 1950 के दशक में अमेरिका और तत्कालीन सोवियत संघ (रूस) में भयंकर तनातनी थी जिसे शीतयुद्ध का नाम दिया गया था। तब दोनों परमाणु शक्तियां अपनी ताकत को बढ़ाने के लिए हथियारों पर बेशुमार पैस खर्च करती थीं। फ्लाईंग सॉसर को लेकर भी अमेरिका, रूस से सशंकित रहता था। (जारी है एलियंस की कहानी)












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