तालिबान ने पहली बार माना, ISIS खतरा नहीं, बहुत बड़ा सिरदर्द बन गया है
तालिबान के प्रवक्ता जबीहुल्लाह मुजाहिद ने कहा है कि तालिबान हमारे लिए खतरा नहीं, एक सिरदर्द है।
काबुल, अक्टूबर 8: अफगानिस्तान में तालिबान ने 15 अगस्त को अपने शासन की घोषणा की थी, लेकिन अब तालिबान ने कहा है कि अफगानिस्तान के लिए आईएसआईएस एक सिरदर्द है। हालांकि, तालिबान ने दावा किया है कि बहुत जल्द ही आईएसआईएस को दबा दिया जाएगा, लेकिन अफगानिस्तान के कई हिस्सों में इन दिनों तालिबान और आईएसआईएस के बीच मुठभेड़ चल रही है।

तालिबान के लिए सिरदर्द है आईएसआईएस
तालिबान के सूचना और संस्कृति मंत्री जबीउल्लाह मुजाहिद ने टोलो न्यूज के हवाले से कहा कि, "हम दाएश (आईएसआईएस) को खतरा नहीं मानते हैं, लेकिन हम इसे सिरदर्द कहते हैं।" "यह कुछ जगहों पर सिरदर्द पैदा करता है, लेकिन हर घटना के बाद आईएसआईएस के लोगों को मार दिया जा रहा है, या वो भागकर छिप जा रहे हैं।'' तालिबान ने इस हफ्ते की शुरुआत में काबुल के उत्तरी उपनगर में कथित तौर पर आईएसआईएस के खिलाफ अभियान चलाया था, जिसमें आईएसआईएस-खुरासान शाखा के तीन आतंकवादी मारे गए थे।

आईएसआईएस के खिलाफ अभियान
अफगानिस्तान की स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, आईएसआईएस के ठिकानों को खत्म करने के लिए तलिबान की तरफ से लगातार अभियान चलाए जा रहे हैं, जिसमें दोनों तरफ के लोग मारे जा रहे हैं। ये ऑपरेशन ईदगाह मस्जिद में एक आत्मघाती हमलावर द्वारा विस्फोट करने के बाद शुरू किया गया है। आपको बता दें कि, ईदगाह मस्जिद में एक आत्मघाती हमलावर ने अपने आप को उड़ा लिया था, जिसमें मस्जिद में नमाज पढ़ते वक्त कई बेगुनाह लोग मारे गये थे। जिसके बाद से ही आईएसआईएस के खिलाफ तालिबान अभियान चला रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक, आईएसआईएस के प्रवक्ता जबीउल्लाह की मां के लिए मस्जिद में प्रार्थना सभा रखा गया था, उस वक्त एक आत्मघाती हमलावर ने विस्फोट दिया था, जिसमें 10 लोगों की मौत और 20 लोग घायल हो गये थे।

अलकायदा और आईएसआईएस का विस्तार
पिछले महीने अमेरिका के सैन्य प्रमुख जनरल मार्क मिले ने भी कहा था कि "एक वास्तविक संभावना" है कि अल कायदा और आईएसआईएस अगले छह से 36 महीनों में अफगानिस्तान में फिर से संगठित हो सकते हैं। आपको बता दें कि, आईएसआईएस और अलकायदा से अगर किसी को सबसे ज्यादा खतरा है, तो वो खतरा खुद तालिबान को है, लिहाजा तालिबान चाहता है कि वो इन दोनों संगठनों को पनपने ना दें। लेकिन, दिक्कत ये हो रही है, कि तालिबान में शामिल कई लड़ाके आईएसआईएस-खोरासन के और अलकायदा के हैं, लिहाजा तालिबान के लिए इन दोनों संगठनों को रोकना मुश्किल है। तालिबान के लिए एक और बड़ी दिक्कत ये है, कि इन दोनों संगठनों के ज्यादातर लड़ाकों ने अफगानिस्तान की सरकार के खिलाफ लड़ाई में तालिबान का साथ दिया है और लड़ाकों के बीच दोस्ती के साथ साथ रिश्तेदारी भी है, लिहाजा तालिबान के ऑपरेशन का अंजाम कुछ खास नहीं होने वाला है।












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