‘जो महिलाएं हिजाब नहीं पहनती, वो जानवरों की तरह...’, तालिबान ने अफगानिस्तान में लगाए पोस्टर्स
पिछले महीने तालिबान के अधिकारियों ने पश्चिमी अफगान शहर हेरात में पुरुषों और महिलाओं के एक साथ बाहर खाने और पार्कों में जाने पर प्रतिबंध लगा दिया था।
काबुल, जून 17: कट्टर इस्लामवादी संगठन तालिबान लगातार अफगानिस्तान में महिलाओं के अधिकार को कुचल रहा है और पिछले दिनों अफगान महिलाओं के लिए हिजाब पहनना अनिवार्य करने के बाद अब तालिबान की मजहबी पुलिस के द्वारा दक्षिण अफगान शहर कंधार में पोस्टर्स लगाए गये हैं, जिसमें एक बार फिर से महिलाओं के लिए हिजाब पहनना जरूरी बताया गया है।

हिजाब पहनना अनिवार्य
तालिबान की मजहबी पुलिस ने दक्षिणी अफगान शहर कंधार में पोस्टर लगाए हैं, जिसमें कहा गया है कि मुस्लिम महिलाएं, जो अपने शरीर को पूरी तरह से ढके हुए इस्लामी हिजाब नहीं पहनती हैं, वे "जानवरों की तरह दिखने की कोशिश कर रही हैं"। पिछले साल अगस्त में अफगानिस्तान की सत्ता पर कब्जा करने के बाद से तालिबान ने अफगान महिलाओं पर कठोर प्रतिबंध लगाए हैं और अफगानिस्तान में महिलाओं की पढ़ाई लिखाई बंद करवा दी गई है। अफगान महिलाओं को सिर से लेकर पैर तक, एक इंच भी अपना शरीर नहीं दिखाने की हिदायत दी गई है। वहीं, अफगानिस्तान में हिजाब इस तरह के डिजाइन किए गये हैं, कि आंखों पर भी जाली लगी रहेगी। पिछले महीने देश के सर्वोच्च नेता और तालिबान प्रमुख हिबतुल्लाह अखुंदज़ादा ने एक फरमान को मंजूरी दी थी, जिसमें कहा गया था कि महिलाओं को आम तौर पर घर पर रहना चाहिए।

घर से निकलने पर शर्ते
पिछले महीने अफगान महिलाओं के घर से निकलने पर भी शर्तें लगाई गई हैं। पहले तो ये कहा गया है कि, महिलाओं को अपने घर से बाहर नहीं निकलना चाहिए और अगर उनका घर से बाहर निकलना अति-आवश्यक हो, तो वे अपने चेहरे सहित खुद को पूरी तरह से ढक कर रखें। वहीं, इस हफ्ते एक बार फिर से तालिबान ने शरिया कानून के तहत सख्त इस्लामी शासन की व्याख्या की है और कंधार शहर में पोस्टर्स लगाए गये हैं, जिसमें बुर्के की छवियां दिखाई दे रही हैं और महिलाओं के लिए हुक्म जारी किए गये हैं। इस पोस्टर्स में लिखे हैं कि, 'मुस्लिम महिलाएं, जो हिजाब नहीं पहनती हैं, वे जानवरों की तरह दिखने की कोशिश कर रही हैं'। तालिबानी पुलिस ने इन पोस्टर्स को विज्ञापनो के साथ साथ कैफे और दुकानों पर चिपकाए हैं। पोस्टर्स में महिलाओं को छोटे कपड़े ना पहनने की सख्त हिदायत दी गई है। हालांकि, पोस्टर्स पर शीर्ष तालिबानी नेताओं ने तो कोई टिप्पणी नहीं की, लेकिन एक शीर्ष स्थानीय अधिकारी ने पुष्टि की कि पोस्टर लगाए गए हैं।

तालिबानी अधिकारी ने क्या कहा?
कंधार में तालिबान के धार्मिक मंत्रालय के प्रमुख अब्दुल रहमान तैयबी ने एएफपी को बताया कि, 'हमने ये पोस्टर लगाए हैं और जिन महिलाओं के चेहरे (सार्वजनिक रूप से) ढके नहीं हैं, हम उनके परिवारों को सूचित करेंगे और डिक्री के अनुसार कदम उठाएं'। अखुंदज़ादा का फरमान हर उन लोगों के लिए है, जो इस आदेश का पालन नहीं कर रहे हैं। आपको बता दें कि, तालिबान के पहले कार्यकाल में भी महिलाओं के लिए बुर्का पहनना अनिवार्य कर दिया गया था। बुधवार को यूनाइटेड नेशंस के ह्यूमर राइट्स प्रमुख मिशेल बाचेलेट ने महिलाओं के अधिकार छीनने को लेकर तालिबान की आलोचना की थी और कहा था कि, 'उनकी स्थिति गंभीर है'।

यूएनएससी ने की थी अपील
आपको बता दें कि, इससे पहले तालिबान ने पिछले महीने में भी अफगान महिलाओं पर लगाए गए भारी प्रतिबंधों को वापस लेने के संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) के आह्वान को खारिज कर दिया है। तालिबान का साफ तौर पर कहना था कि, यूएनएससी की चिंता का कोई आधार नहीं है। आपको बता दें कि, UNSC ने पिछले महीने में सर्वसम्मति से एक प्रस्ताव पारित किया था और तालिबान की नीतिओं की आलोचना की थी। तालिबान नीति के तहत अफगानिस्तान की सत्ता पर कब्जा जमाने के बाद तालिबान शासन ने महिलाओं, लड़कियों पर कड़े प्रतिबंध लगा दिए हैं।

रेस्टोरेंट में भी साथ खाने पर पाबंदी
पिछले महीने तालिबान के अधिकारियों ने पश्चिमी अफगान शहर हेरात में पुरुषों और महिलाओं के एक साथ बाहर खाने और पार्कों में जाने पर प्रतिबंध लगा दिया था। रिपोर्ट में कहा गया है कि, अफगानिस्तान एक गहन रूढ़िवादी और पितृसत्तात्मक राष्ट्र है, लेकिन अफगानिस्तान में भी पुरुषों और महिलाओं को रेस्टोरेंट में एक साथ भोजन करते देखना आम बात है, खासकर हेरात में, जिसे लंबे समय से अफगान मानकों द्वारा उदार माना जाता है। लेकिन, तालिबान के ताजा फरमान के बाद अब रेस्टोरेंट में महिलाएं और पुरूष एक साथ खाना नहीं खा सकते हैं।












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