'दलाली के लिए हमें कर रहे बदनाम', पाकिस्तान पर भड़के अफगान, तालिबान ने शहबाज शरीफ को दी चेतावनी
Pakistan-Afghanistan News: आतंकवाद को लेकर अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच ठन गई है और तालिबान ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के उस बयान पर प्रतिक्रिया दी है, जिसमें उन्होंने अफगानिस्तान के लोगों को आतंकवादियों का मददगार बताया था।
तालिबान की तरफ से पाकिस्तानी प्रधानमंत्री के बयान पर सख्त प्रतिक्रिया देते हुए कहा गया है, कि 'ऐसे बयान दोनों देशों के रिश्तों की सेहत के लिए अच्छा नहीं है।' इस्लामिक अमीरात अफगानिस्तान ने पाकिस्तान के इन आरोपों को खारिज कर दिया, कि 12 जुलाई को देश के सैन्य अड्डे पर हुए हमले में अफगान नागरिक शामिल थे।

पाकिस्तान पर तालिबान का पलटवार
इस्लामिक अमीरात अफगानिस्तान के प्रवक्ता जबीहुल्लाह मुजाहिद ने कहा, कि इस तरह के दावे किसी भी देश या उनके लोगों के हित में नहीं हैं।
मुजाहिद ने ट्विटर पर कहा, कि अफगानिस्तान, पाकिस्तान समेत किसी भी देश के लिए खतरा नहीं है।
उन्होंने ट्वीट करते हुए कहा, कि "हम अफगानिस्तान में सुरक्षा स्थिति के बारे में पाकिस्तानी अधिकारियों के आरोपों को खारिज करते हैं, और हम उन्हें निराधार बताते हैं। इस्लामिक अमीरात किसी को भी अफगानिस्तान के क्षेत्र को दूसरे देश के खिलाफ इस्तेमाल करने की अनुमति नहीं देता है।"
तालिबान के प्रवक्ता ने आगे कहा, कि "यदि कोई चिंता है, तो उसे इस्लामिक अमीरात के अधिकारियों के साथ आमने-सामने साझा किया जाना चाहिए, न कि मीडिया में अनावश्यक दावे करके, लोगों के मन को भ्रमित करना चाहिए। जाहिर है, ऐसे दावे दोनों देशों और लोगों के हित में नहीं हैं।"
आपको बता दें, कि तालिबान पाकिस्तान को आतंकवाद पर वही दलीलें दे रहा है, जो दलीले भारत के आरोपों पर पाकिस्तान दिया करता था। हालांकि, पाकिस्तान सुधरने वाले देशों में से नहीं है और वो अभी भी भारत के खिलाफ आतंकवाद को प्रायोजित करता रहता है, लेकिन आतंकवादी खुद पाकिस्तान को ही निशाना बनाते रहते हैं।
पाकिस्तान का दावा क्या है?
पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता मुमताज ज़हरा बलूच ने दावा किया है, कि 12 जुलाई के हमले में शामिल तीन आतंकवादियों की पहचान अफगान नागरिकों के रूप में की गई है।
पाकिस्तानी अखबार डॉन ने बलूच के हवाले से कहा, कि "झोब छावनी पर हमला करने वाले तीन आतंकवादी अफगानिस्तान के कंधार प्रांत के थे।"
इस बीच, पाकिस्तान कैबिनेट की विदेश राज्य मंत्री हिना रब्बानी खार ने भी कहा, कि उन्होंने मौजूदा अफगान सरकार के साथ कई दस्तावेज साझा किए हैं, जो इस हमले में अफगान नागरिकों की संलिप्तता दिखाते हैं।
हिरा रब्बानी खार ने कहा, कि "हमारा सबूत उनकी पहचान है। हमारे पास ठोस सबूत हैं जो हमने साझा किए हैं, कि कई घटनाओं में अफगान नागरिक शामिल थे। प्रत्येक घटना के अपने अलग तथ्य हैं।"
हालांकि कुछ राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक, पाकिस्तान मौजूदा अफगान सरकार को बदनाम करने के लिए ऐसे दावे कर रहा है।
पूर्व राजनयिक अजीज मारिज ने कहा, कि "वे अपनी मांगों को लागू करने और अंतरराष्ट्रीय समुदाय से कमीशन प्राप्त करने के लिए इन वार्ताओं के साथ अफगान सरकार या अफगानिस्तान के इस्लामी अमीरात पर दबाव डालते हैं।"
अफगानिस्तान के राजनीतिक विश्लेषक वाहिद फकीरी ने कहा, कि "मुझे लगता है कि आतंकवाद एक साझा दुश्मन है और इससे मिलकर लड़ना चाहिए।"
इससे पहले, पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने चेतावनी जारी की थी, कि अगर मौजूदा अफगान सरकार ने आतंकवादी संगठनों से लड़ने के लिए कदम नहीं उठाए, तो पाकिस्तान इन समूहों के संचालन को खत्म करने के लिए सैन्य बल का उपयोग करेगा।
लिहाजा, माना जा रहा है, कि अगर पारिस्तान, अफगानिस्तान के ऊपर एयरस्ट्राइक करता है, तो तालिबान उसका माकूल जबाव दे सकता है।












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