'शरिया कानून थोपना कबूल नहीं', तालिबान और पंजशीर विद्रोहियों के बीच कई मुद्दों पर समझौता नहीं

तालिबान ने पंजशीर को जीतने की कई बार कोशिश की, लेकिन पंजशीर में काफी ज्यादा नुकसान उठाने के बाद आखिरकार तालिबान को बातचीत के लिए तैयार होना पड़ा।

काबुल, अगस्त 25: एक तरफ जहां तालिबान ने अफगानिस्तान में शरिया कानून लागू कर दिया है, वहीं पंजशीर के विद्रोहियों के साथ शरिया कानून पर ही विवाद बढ़ गया है। पंजशीर में जब तालिबान कब्जा नहीं कर पाया, तो वो विद्रोहियों से बातचीत करने के लिए तैयार हो गया और अफगान मीडिया के मुताबिक, पंजशीर के विद्रोहियों ने साफ कर दिया है कि अफगानिस्तान में शरिया कानून थोपना उन्हें कबूल नहीं है।

''शरिया थोपना कबूल नहीं''

''शरिया थोपना कबूल नहीं''

तालिबान के 40 सदस्यों के प्रतिनिधिमंडल ने पंजशीर एंटी-तालिबान बल के साथ बातचीत की है और माना जा रहा है कि दोनों गुटों के बीच चली बातचीत में कोई नतीजा नहीं निकल पाया है। पंजशीर के विद्रोहियों ने एक ट्वीट करते हुए कहा कि अफगानिस्तान में अगर तालिबान शांति चाहता है, तो उसके सामने दो ही तरीके हैं। पहला तकीका खारासान के लोगों के मूल्यों को उसे स्वीकार करना होगा या फिर तालिबान को लड़ाई करने के लिए तैयार होना पड़ेगा। आपको बता दें कि पंजशीर प्रांत में नॉर्दर्न एलायंस के लड़ाकों और तालिबान के बीच लगातार संघर्ष जारी है और पिछले 2 दिनों में 800 से ज्यादा तालिबानी लड़ाके मारे जा चुके हैं। जिसके बाद आज जाकर तालिबान के 40 प्रतिनिधि बातचीत करने के लिए तैयार हुए थे।

अमरूल्ला सालेह हैं तालिबान के खिलाफ

अमरूल्ला सालेह हैं तालिबान के खिलाफ

आपको बता दें कि काबुल पर कब्जे के बाज जहां अशरफ गनी देश से भाग गये, वहीं खुद को देश का कार्यवाहक राष्ट्रपति घोषित करने वाले अपदस्थ अफगान उपराष्ट्रपति अमरुल्ला सालेह ने तालिबान के खिलाफ विद्रोही बलों के साथ हाथ मिला लिया है और कहा कि केवल सार्थक बातचीत को स्वीकार किया जाएगा। अमरूल्ला सालेह ने पाकिस्तान के खिलाफ मोर्चा खोल रखा है और आज भी अपने ट्वीट में कहा है कि पाकिस्तान की अफगानिस्तान में बर्बादी के लिए जिम्मेदार है और तालिबान के एक एक कदम पर पाकिस्तान ने ही मदद की है। उन्होंने कहा कि अगर बातचीत बेनतीजा रहती है तो विरोधी ताकत तालिबान से मुकालबा करने के लिए तैयार है।

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    शरिया पर नहीं बन रही है बात

    शरिया पर नहीं बन रही है बात

    न्यूजवीक की रिपोर्ट के मुताबिक तालिबान पूरे देश में सख्त शरिया कानून लागू करने पर अड़ा हुआ है तो नॉर्दर्न एलायंस का कहना है कि किसी भी कीमत पर लोगों के ऊपर शरिया थोपने नहीं दिया जाएगा। नॉर्दर्न एलायंस का कहना है कि देश में अगर सरकार चलेगी तो वो लोकतांत्रित तरीके से ही चलेगी। नॉर्दर्न एलायंस ने तालिबान के सामने शर्त रखा है कि देश में कोई भी कानून थोपने नहीं दिया जाएगा। पंजशीर के शेर कहे जाने वाले अहमद मसूद के भाई अहमद वली मसूद ने कहा कि 'हम शांति चाहते हैं और पावर शेयरिंग चाहते हैं और सबके लिए सम्मान चाहते हैं।'

    पाकिस्तान पर बौखलाए अमरूल्ला सालेह

    पाकिस्तान पर बौखलाए अमरूल्ला सालेह

    आपको बता दें कि खुद को अफगानिस्तान का कार्यवाहक राष्ट्रपति घोषित करने वाले अमरूल्ला सालेह पाकिस्तान के ऊपर भारी गुस्सा हैं। उन्होंने पाकिस्तान के साथ साथ अमेरिका को भी अफगानिस्तान के मौजूदा हालात के लिए लताड़ा है। उन्होंने कहा कि कैस दुनिया के सुपरपावर अमेरिका से इतनी बड़ी खुफिया चूक हुई? कैसे उसे पाकिस्तान के कारनामों की भनक नहीं लगी? इसके बारे में सीएनएन-न्यूज18 ने अफगानिस्तान के कार्यकारी राष्ट्रपति अमरुल्ला सालेह से बात की है। उन्होंने अफगान सरकार के नियंत्रण वाले आखिरी किले पंजशीर घाटी से जो कुछ कहा है, उससे भारत का वह दावा और पुख्ता हुआ है कि पाकिस्तान की सरकार नीतिगत तौर पर आतंकवादी ताकतों की सहायता करती है। उन्होंने लंबी बातचीत में अफगानिस्तान की बर्बादी के चार मूल कारण बताए हैं। उनके मुताबिक तालिबान कभी भी दबाव में रहा ही नहीं, क्योंकि उसने पाकिस्तान को अपने आधार के तौर पर इस्तेमाल किया।

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