तालिबान ने किया आधे से ज्यादा अफगान जिलों पर कब्जा, यूएस सैन्य अधिकारी का दावा, खतरे में 'लाइफ लाइन'
अमेरिकी सेना के बड़े अधिकारी मार्क मिले ने कहा है कि अफगानिस्तान के आधा से ज्यादा जिला सेंटरों पर तालिबान ने कब्जा कर लिया है। वहीं, अफगानिस्तान की लाइफ लाइन पर अब तालिबान की नजर है।
वॉशिंगटन, जुलाई 23: अमेरिका के वरिष्ठ जनरल ने दावा किया है कि अफगानिस्तान के 400 जिलों में से करीब 200 से ज्यादा जिलों पर तालिबान ने नियंत्रण स्थापित कर लिया है और अगर जल्द ही तालिबान को नहीं रोका गया तो वो 'लाइफलाइन' पर कब्जा करके अफगानिस्तान सरकार को घुटनों के बल ला सकता है। अमेरिका के वरिष्ठ जनरल के इस दावे के बाद अफगानिस्तान की सरकार बैकफुट पर आ गई है, वहीं अमेरिकी जनरल ने कहा है कि तालिबान की वजह से अफगानिस्तान की स्थिति अभी और खराब होगी।
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50 प्रतिशत से ज्यादा जिलों पर कब्जा
अफगानिस्तान की स्थिति में पिछले कई हफ्तों से लगातार खराब हो रही है और लगातार अलग अलग इलाकों पर तालिबान कब्जा कर रहा है। अमेरिकी सैनिक 31 अगस्त तक अफागनिस्तान से बाहर चले जाएंगे और अब कुछ ही अमेरिकी सैनिक अफगानिस्तान में बचे हुए हैं, जिस देखते हुए तालिबान जल्द से जल्द अफगानिस्तान पर कब्जा करने की फिराक में है। हालांकि, तालिबान ने दावा किया है कि उसने करीब 80 प्रतिशत से ज्यादा हिस्सों पर कब्जा कर लिया है, वहीं यूएस जनरल ने करीब करीब तालिबानी दावे की पुष्टि कर दी है और कहा है कि 50 प्रतिशत से ज्यादा जिला मुख्यालयों पर तालिबान कब्जा जमा चुका है।

अमेरिकी जनरल का दावा
अमेरिका के ज्वाइंट चीफ ऑफ स्टाफ के चेयरमैन जनरल मार्क मिले ने कहा है कि ''तालिबान के साथ सामरिक रणनीति कुछ अलग नजर आ रही है''। मार्क मिले ने कहा कि ''अफगानिस्तान में 419 जिला केन्द्र हैं, जिनमें से 200 से ज्यादा जिला केन्द्रों पर तालिबान ने नियंत्रण हासिल कर लिया है।'' आपको बता दें कि पिछले महीने मार्क मिले ने कगा था कि तालिबान ने 81 जिला केन्द्रों पर नियंत्रण कर लिया है। इस हिसाब से देखा जाए तो एक महीने में तालिबान ने करीब सवा सौ जिला केन्द्रों पर और कब्जा कर लिया है, जो अफगानिस्तान सरकार के लिए खतरे की घंटी है और बताता है कि अफगानिस्तान में तालिबान कितनी तेजी से नियंत्रण स्थापित कर रहा है।

बड़े शहरों पर अब तालिबान की नजर
वहीं, पाकिस्तानी अखबार द ट्रिब्यून की रिपोर्ट के मुताबिक अब तालिबान की निगाहें बड़े शहरों और प्रांतों की राजधानियों पर है। ट्रिब्यून के मुताबिक, भले ही तालिबान ने अभी तक अफगानिस्तान में 200 से ज्यादा जिलों पर कब्जा जमा लिया हो, लेकिन अभी तक किसी प्रांत की राजधानी पर तालिबान का कब्जा नहीं हुआ। ऐसे में अब तालिबान की नजर प्रांतों की राजधानियों पर है। ऐसे में माना जा रहा है कि आने वाले वक्त में अफगानिस्तान में संघर्ष काफी तेज हो सकता है। वहीं, अफगान सरकार ने तालिबान पर देश के 34 प्रांतों में से 29 में सैकड़ों सरकारी इमारतों को नष्ट करने का आरोप लगाया है। अफगान सरकार ने कहा है कि देश के अलग अलग हिस्सों में स्थिति सरकारी इमारतों को तालिबान बर्बाद कर रहा है, जबकि तालिबान ने सरकार के आरोपों को खारिज कर दिया है।

लाइफ लाइन पर कब्जे की कोशिश
अमेरिका के वरिष्ठ जनरल ने जहां एक तरफ दावा कर दिया है कि 50 प्रतिशत से ज्यादा जिला मुख्यालयों पर तालिबान ने कब्जा कर लिया है, वहीं इंडिया टूडे की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि अब तालिबान, अफगानिस्तान की लाइफ लाइन मानी जाने वाली हाईवे पर कब्जा करने की कोशिशें शुरू कर दी हैं। दरअसल, तालिबान जानता है कि अगर उसे अफगानिस्तान पर नियंत्रण हासिल करना है तो उसे देश के हाईवे पर कब्जा करना होगा, लिहाजा तालिबान अब काफी तेजी के साथ हाईवे की तरफ बढ़ रहा है। वहीं, एक रूसी रिपोर्ट में कहा गया है कि पाकिस्तान, चीन और ईरान से लगती सीमाओं पर तालिबान ने कब्जा कर लिया है, जो उसके लिए बहुत बड़ी कामयाबी है।

हाईवे कब्जाने की कोशिश में तालिबान
इंडिया टूडे की रिपोर्ट के मुताबित तालिबान ने पाकिस्तान, ईरान, ताजिकिस्तान और तुर्कमेनिस्तान को कनेक्ट करने वाले हेरात, फरहा, कंधार, कुंदुज, तखर और बदख्शां प्रांतों में कई बड़े-बड़े हाईवे पर कब्जा जमा लिया है। वहीं, तालिबान ने इन प्रांतों के बॉर्डर पोस्ट पर भी कब्जा कर लिया है। वहीं, रिपोर्ट के मुताबिक अफगानिस्तान सरकार की सेना अभी भी नंगरहार, पक्ता, पक्तिका, निमरोज और खोस्त प्रांतों के हाईवे पर नियंत्रण बनाए हुई है। वहीं, निमरोज प्रांत में पाकिस्तान से लगती सीमा रेखा पर अभी भी अफगान सैनिकों का नियंत्रण है। माना जा रहा है कि तालिबान की कोशिश राजधानी काबुल की सप्लाई लाउन को काटने की है।

कंधार हाईवे पर तालिबान का कब्जा
इंडिया टूडे की रिपोर्ट के मुताबिक अफगानिस्तान चूंकी लैंड लाउक देश है, लिहाजा हाईवे पर कब्जा करने का मतलब बढ़त हासिल करना होता है और तालिबान इसी फिराक में लगा हुआ है। तालिबान ज्यादा से ज्यादा हाईवे पर कब्जा जमाने में कामयाबी हासिल कर रहा है। वहीं, राजधानी काबुल की सप्लाई लाइन कंधार हाईवे को माना जाता है, जिसपर तालिबान ने बहुत हद तक नियंत्रण बना लिया है। वहीं जलालाबाद और काबुल के बीच के हाईवे को, जिसे दूसरा सप्लाई लाईन कहा जाता है, उसपर कब्जे के लिए तालिबान लगातार आगे बढ़ रहा है। रिपोर्ट तो ये भी है कि अफगान सैनिकों से इस हाईवे को छीनने के लिए ना सिर्फ तालिबान लगातार हमले कर रही है, बल्कि आईएसआईएस भी इस हाईवे पर अपना नियंत्रण चाहता है, ताकि काबुल पर दवाब बनाई जा सके।
हाईवे पर कब्जे से क्या होगा ?
तालिबान जानता है कि अगर राजधानी काबुल की सप्लाई लाइन को रोकने में वो कामयाब हो जाता है, तो फिर अफगानिस्तान सरकार को वो आसानी से घुटनों पर ला सकता है। दोनों सप्लाई लाइन पर कब्जे के बाद राजधानी काबुल तक जरूरी सामान पहुंचना बंद हो जाएगा और फिर तालिबान को अफगानिस्तान के बाकी हिस्सों में पांव पसारने में ज्यादा वक्त नहीं लगेगा, लिहाजा तालिबान लगातार हाईवे को निशाना बना रहा है, जिसके फायदा भी उसे लगातार मिल रहा है। लिहाजा, अफगान सरकार की सेना दिन रात कोशिश कर रही है, कि जलालाबाद-काबुल हाईवे को बचाने के साथ साथ कंधार-काबुल हाईवे पर फिर से नियंत्रण बनाया जाए, लिहाजा सेना और तालिबान के बीच लगातार संघर्ष चल रहा है।












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