ग्लोबल जिहाद की फिर आवाज! हयात तहरीर अल-शाम का बढ़ता कंट्रोल, जियो-पॉलिटिक्स और जंग, सीरिया की इनसाइड स्टोरी
Syria Civil War: इजराइल और हिज्बुल्लाह ने जैसे ही एक बेहद नाजुक युद्ध विराम पर सहमति जताई, ठीक वैसे ही सीरिया में बड़े पैमाने पर हिंसा भड़क उठी, जिसमें इस्लामी समूह हयात तहरीर अल-शाम (HTS) और फ्री सीरियन आर्मी, तुर्की और संयुक्त राज्य अमेरिका के समर्थन वाले मुख्य विद्रोही समूह के हमले शामिल हैं।
मध्य पूर्व में उबाल और आग भड़कना जारी है। 2016 के बाद से अलेप्पो शहर पर सबसे बड़ा हमला किया गया है, जब रूस, ईरान और उसके सहयोगी प्रॉक्सी के समर्थन से सीरियाई सेना ने भीषण सैन्य अभियान चलाया था और विद्रोही बलों को पूर्वोत्तर इलाकों में हारने के बाद भागना पड़ा था।

हयात तहरीर अल-शाम ने कहां कहां किया कब्जा?
पिछले कुछ दिनों में, विद्रोही बलों और HTS ने तेजी से सीरिया में अलेप्पो शहर में कब्जे किए हैं, जिससे अलेप्पो और दमिश्क के बीच राजमार्ग कट गया है। इसके अलावा, उन्होंने इदलिब और अलेप्पो के काफी बड़े हिस्से पर कब्जा कर लिया है, जिसमें उर्म अल-सुगरा, अंजारा, काफ़र बासमा, उरुम अल-कुबरा और अल-हौता जैसी रणनीतिक रूप से संवेदनशील बस्तियां शामिल हैं।
इसके अलावा, विद्रोही गुटों ने सीरियाई सेना के सबसे बड़े सैन्य अड्डे 46वें इन्फैंट्री बेस, कई टैंकों और मिसाइलों के भंडार पर कब्जा कर लिया है। हैरानी की बात ये है, कि विद्रोहियों के हमले में सीरियाई सेना कुछ ही घंटों में ढह गई, और अलकायदा से जुड़े इस्लामवादियों की भारी मौजूदगी वाले विद्रोही, अलेप्पो से दक्षिण की ओर आगे बढ़ गये हैं। हिंसक लड़ाई में अभी तक 300 से ज्यादा लोग मारे गये हैं, जबकि हजारों लोगों ने शहर छोड़ दिया है।

सीरिया में अचानक भड़की जंग या लगाई गई आग?
बदलते ग्लोबल ऑर्डर के बीच पश्चिम एशिया में लगातार हो रहे संघर्षों से शायद ही कोई हैरान हो। फिर भी, बुनियादी सवाल यह उठता है, कि रूस, ईरान और तुर्की की मध्यस्थता में विद्रोही बलों और असद शासन के बीच 2020 के युद्धविराम समझौते के बाद अचानक भड़की इस आग के क्या कारण हैं?
पिछले हफ्ते अचानक शुरू हुए विद्रोहियों के इस हमले के पीछे कई फैक्टर हैं और बारीकी से जांचने पर पता चलता है, कि सीरिया में एक बार फिर से जियो-पॉलिटिकल एक्टर्स, क्षेत्रीय खिलाड़ियों और इस्लामवादी समूहों के अपने अपने स्वार्थ के चपेट में फंस गया है।
मानवीय संकट और आर्थिक स्थिति का बिगड़ना, सीरिया में हिंसा को फिर से बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। वहीं, इजराइली हमले में हिज्बुल्लाह की हार ने ईरान के साथ साथ ईरानी प्रॉक्सी, जैसे हिज्बुल्लाह, हूती विद्रोही और हमास को काफी कमजोर कर दिया है। जिसकी वजह से राष्ट्रपति असद की क्षमता और उनका मनोबल भी काफी कमजोर हो गया है, जाहिर तौर पर कोई है, जो असद प्रशासन की इस कमजोर स्थिति का फायदा उठाना चाह रहा है।
पिछली बार ईरान और उसके मिलिशिया, जैसे हिज्बुल्लाह, रूस के साथ मिलकर असद के मजबूत सैन्य हमले और विद्रोहियों पर जीत के पीछे मुख्य ताकत थे। लेकिन, इस बार यूक्रेन युद्ध में उलझे रूस के लिए सीरिया में असद के ढहते किले को बचाना काफी मुश्किल है।

पिछले महीने यूक्रेन ने बाइडेन प्रशासन की मंजूरी मिलने के बाद रूसी क्षेत्र में लंबी दूरी की मिसाइलें दागीं हैं, जिसका जवाब मॉस्को ने यूक्रेन में अपने हाइपरसोनिक ओरशेनिक मिसाइल हमले करके दिए हैं। इन हालिया हमलों और यूक्रेन के मोर्चे पर युद्ध में नई लहर आने के बाद, यूक्रेन युद्ध में रूस फिर से अंदर तक फंस चुका है, जिससे असद सरकार और कमजोर हो दिख रही है, भले ही रूस ने अलेप्पो में एयरस्ट्राइक क्यों ना किए हों।
ऐसे हालात में, असद शासन के खिलाफ हमले में नई तेजी, रूस को कई मोर्चों पर युद्ध लड़ने के लिए मजबूर कर रहा है, और सीरिया में अचानक शुरू हुआ ये गृहयुद्ध, पश्चिमी देशों की नई रणनीति मालूम होती है। और ये रणनीति इसलिए भी कामयाब होती दिख रही है, क्योंकि अलेप्पो शहर पर विद्रोहियों के कब्जे के बाद रूसी एयरफोर्स ने इन इलाकों में भारी बमबारी भी है, यानि रूस के लिए युद्ध का एक और मोर्चा खुल गया है।
ऐसे में सवाल ये हैं, कि यूक्रेन या सीरिया, रूस कहां अपना ध्यान लगाए?

सीरिया युद्ध में मौजूद ग्लोबल पॉलिटिक्स समझिए
इजराइल-हिज्बुल्लाह युद्ध विराम के तुरंत बाद आक्रामक अभियान की शुरुआत, ईरान के लिए एक और सैन्य मोर्चा खोल देगी, जिससे उसकी उलझनें और गहरी और चौड़ी हो जाएंगी। इस संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता, कि इजराइल, ईरान के मुल्ला शासन को थका देने, हताश करने और हटाने के लिए दीर्घकालिक, अचूक और बहुआयामी रणनीति बना सकता है। सीरिया में हाल ही में हुई हिंसा को इजराइल की ईरान रणनीति के बड़े ढांचे में रखा जाना चाहिए और समझा जाना चाहिए।
इसके अलावा, सीरिया में हिंसा का फिर से उभरना, ईरान-तुर्की और तुर्की-रूस संबंधों को और भी खराब कर सकता है। पश्चिम एशियाई संघर्ष के क्षेत्र में तुर्की की रणनीतिक स्थिति बहुत ही अस्पष्ट रही है। यह इजराइल के खिलाफ फिलिस्तीन का समर्थन करने का दावा तो करता है, लेकिन इस तरह के ऊंचे दावे और ऊंची-ऊंची बयानबाजी वास्तविक राजनीति के सामने धराशायी हो जाती हैं।
सीरिया में, तुर्की ने विद्रोही समूहों और एचटीएस जैसी इस्लामी संस्थाओं का समर्थन किया है। फिर से, सीरिया में, तुर्की, विद्रोहियों का समर्थन करने का दावा करता है, लेकिन विद्रोही समूहों के चौंकाने वाले हमले और हाल ही में हिंसा में वृद्धि के कारण वो अपनी निराशा को स्पष्ट रूप से जता रहा है।
इससे पहले, तुर्की ने इदलिब प्रांत में अपनी सेनाएं तैनात की थीं, क्योंकि संघर्ष की स्थिति ने उसके शरणार्थी समस्या को और खराब कर दिया था, क्योंकि सीरिया से भागने वाले लोग तुर्की जाने लगे थे। और यदि इस बार फिर से संघर्ष तेज होता है, तो तुर्की में एक बार फिर से शरणार्थी जाएंगे। ऐसी स्थिति ईरान और रूस के साथ तुर्की के संबंधों के लिए ये लड़ाई अच्छी नहीं है।
वहीं, बिगड़ते मानवीय संकट और आर्थिक संकट ने आम नागरिकों में आक्रोश और हताशा की तीव्र भावना पैदा कर दी है, जिससे वे बेहद निराश हो गए हैं और कट्टरपंथ और ऐसे समूहों में शामिल होने लगे हैं। जिसकी वजह से एचटीएस जैसे चरमपंथी समूहों को भर्ती काफी तेजी से हो रही है। जिससे सैन्य आक्रमण शुरू करने के लिए उनका मनोबल मजबूत होता जा रहा है।

असद का सीरिया बनाम इस्लामवादी सीरिया
हालांकि सतही तौर पर ऐसा लगता है, कि सीरियाई संघर्ष का फिर से उभरना अमेरिका और इजराइल को कुछ मामलों में सामरिक लाभ दे सकता है, लेकिन ये लंबे समय में पश्चिम को ही नुकसान पहुंचाएगा। यह सही है, कि राष्ट्रपति असद एक क्रूर तानाशाह हैं, जिन्होंने एक खतरनाक परमाणु कार्यक्रम की कल्पना की थी और अपने लोगों पर रासायनिक हथियारों का उपयोग करने से भी नहीं कतराया, लेकिन असल सवाल ये हैं, कि असद की जगह कौन? क्योंकि असद का विकल्प HTS जैसे अलकायदा से जुड़े आतंकी संगठन हैं।
अलेप्पो जैसे मजबूत सरकारी गढ़ों में से एक पर कब्जा करने के बाद, अलकायदा का फ्रंट ग्रुप, HTS, उत्साहित महसूस कर रहा है। HTS जैसे सुन्नी चरमपंथी समूहों के मजबूत होने से इस्लामवादी तत्वों की एक श्रृंखला को बढ़ावा मिलने की संभावना है, जैसे कि तालिबान की जीत सभी प्रकार की इस्लामवादी संस्थाओं के लिए एक आदर्श बन गई। असद को अगर सत्ता से हटा दिया जाता है, तो सीरिया में HTS की मजबूती के लंबे समय में असर होंगे। इससे यूरोप और दक्षिण एशिया में इस्लामी चरमपंथियों को मजबूती मिलेगी।












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