जॉब करने के मामले में नंबर एक देश है स्विट्जरलैंड, दस सालों से दबदबा बरकरार, भारत टॉप-100 से भी बाहर
स्विट्जरलैंड ने प्रतिभा को आकर्षित करने और उन्हें अपने यहां बनाए रखने में सबसे अव्वल देश है। मानव संसाधन के सबसे ऊंचे पायदान पर खड़े लोग स्विट्जरलैंड में करियर बनाना और वहां शेटल होने को प्राथमिकता देते हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि स्विट्जलैंड ने इस मामले में एक दशक से अपना दबदबा बरकरार रखा है।
स्विट्जरलैंड का नाम आते ही हम सभी के दिमाग में सबसे पहले खूबसूरती और पर्यटन का ख्याल आता है। लेकिन कर्मचारियों को सैलरी देने के मामले में भी यह देश दुनिया के टॉप देशों में से है। यहां एक कर्मचारी को औसतन हर महीने 5 लाख रुपए तक की सैलरी मिलती है। इसलिए जॉब के मामले में भी है ड्रीम डेस्टिनेशन माना जाता है।

बिजनेस स्कूल इनसीड द्वारा प्रकाशित 2023 वैश्विक प्रतिभा प्रतिस्पर्धात्मकता सूचकांक के अनुसार, शीर्ष 10 में से सात यूरोपीय देशों के वर्चस्व वाली इस सूची में सिंगापुर और अमेरिका शीर्ष तीन स्थानों पर हैं।
स्विट्जरलैंड अपने उच्च स्तर के सोशल प्रोटेक्शन और प्राकृतिक वातावरण के कारण प्रतिभाओं को आकर्षित करने और उन्हें बनाए रखने में पहले स्थान पर है। रिपोर्ट के अनुसार, अगले दशक में जीवन की गुणवत्ता और स्थिरता टैलेंट हब बनने का टार्गेट रखने वालों के लिए महत्वपूर्ण पूंजी होगी।
बिजनेस स्कूल इनसीड (ब्लूमबर्ग) द्वारा प्रकाशित वैश्विक प्रतिभा प्रतिस्पर्धात्मकता सूचकांक के मुताबिक सिंगापुर की हाइली एजुकेटेड लेबर फोर्स के संग इनोवेटिव इकॉनमी ने इसे ग्लोबल नॉलेज स्किल में पहले स्थान पर रखा है। वहीं, अमेरिका अपने "विश्व स्तरीय विश्वविद्यालयों और बिजनेस स्कूलों" के कारण पहले स्थान पर रहा।
लिस्ट में शामिल अन्य देशों में, यूके अपनी शिक्षा के बल पर 10वें स्थान पर है। व्यावसायिक और तकनीकी कौशल में कम अंकों के बावजूद सामान्य ज्ञान कौशल और प्रतिभा विकास में उसका दबदबा है।
ब्रिक्स देशों में चीन पहले स्थान पर है। अर्थव्यवस्था की जरूरतों के हिसाब से लोगों के कौशल का मिलान करने में चीन की भूमिका को सराहा गया है। इस लिस्ट में चीन 40 वें स्थान पर है।
दुनिया का सबसे अधिक आबादी वाला देश भारत इस लिस्ट में बेहद पीछे है और 103वें स्थान पर है। भारत 2020 के बाद से पिछले तीन वर्षों में लगातार पिछड़ते हुए ब्रिक्स देशों सबसे निचले स्थान पर है। लेखकों के अनुसार, इस गिरावट का कारण घरेलू और विदेशी प्रतिभाओं को आकर्षित करने की क्षमता में कमी आना है।
रिपोर्ट के अनुसार, अगले 10 वर्षों में राष्ट्रों के बीच प्रतिभा के लिए प्रतिस्पर्धा और भी तीव्र हो सकती है, जिसमें व्यापार, निवेश और भू-राजनीति में बढ़ती अनिश्चितताओं का हवाला दिया गया है। रिपोर्ट में देशों, शहरों और संगठनों की नवाचार करने और सॉफ्ट-पॉवर प्रोजेक्ट करने की क्षमता पर जोर दिया गया है।
इनसीड के अनुसार, इससे अमीर और गरीब देशों के बीच प्रतिभा में और अधिक असमानता पैदा हो सकती है क्योंकि "धन/प्रतिभा का संबंध मजबूत बना हुआ है"।
रिपोर्ट में यह भी पाया गया कि कोविड ने लैंगिक असमानता को मजबूत किया, क्योंकि उच्च-कुशल नौकरियों में समानता 2019 के शिखर से पिछले तीन वर्षों में कम हो गई।
एआई इस प्रवृत्ति को बढ़ा सकता है क्योंकि "अयोग्य या कम-योग्य श्रमिक अधिक अतिरिक्त दबाव सहन करेंगे, जबकि श्रमिकों की नई श्रेणियां, जिनमें से कुछ उच्च कौशल वाले हैं, एल्गोरिदम और विशेष उपकरणों से मजबूत प्रतिस्पर्धा से पीड़ित होंगे।"












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