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कौन हैं नोबल विनर स्वांते पाबो? साइबेरिया की गुफा में 40,000 साल मिली पुरानी अंगुली की हड्डी से किया करिश्मा

स्वीडन के आनुवंशिकीविद् स्वांते पाबो को इस साल का नोबेल पुरस्कार मिला है। उन्हें यह पुरस्कार विलुप्त होमिनिन और मानव विकास के जीनोम के क्षेत्र में उनके गहन रिसर्च के लिए दिया गया है।
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नई दिल्ली, 03 अक्टूबरः स्टॉकहोम में रॉयल स्वीडिश एकेडमी ऑफ साइंसेज द्वारा सोमवार को साल 2022 के नोबेल पुरस्कार की घोषणा की गई। जहां मेडिसिन या फिजियोलॉजी के लिए स्वीडन के आनुवंशिकीविद् स्वांते पाबो को इस साल का नोबेल पुरस्कार मिला है। उन्हें यह पुरस्कार विलुप्त होमिनिन और मानव विकास के जीनोम के क्षेत्र में उनके गहन रिसर्च के लिए दिया गया है। पाबो ने लंबे वक्त तक निएंडरथल जिनोम पर रिसर्च किया है। वे मैक्स प्लैंक इंस्टीट्यूट फॉर इवोल्यूशनरी एंथ्रोपोलॉजी मेंजेनेटिक्स विभाग के निदेशक के रूप में भी काम कर चुके हैं।

Photo Credit: The Nobel Foundation (twitter)

पाबो ने किया असंभव को किया संभव

पाबो ने किया असंभव को किया संभव

द नोबेल कमेटी के सेक्रेटरी थॉमस पर्लमैन ने विजेता के नाम की घोषणा की। उन्होंने कहा कि पाबो ने अपने शुरुआती रिसर्च में कुछ ऐसा किया है जो पूरी तरह से असंभव था। उन्हें पुरस्कार देते वक्त नोबेल अकादमी ने कहा, "स्वांते पाबो की खोजों के लिए उनका धन्यवाद। उनकी रिसर्च के बाद ही अब हमें समझने में आसानी हुई है कि हमारे विलुप्त रिश्तेदारों से प्राचीन जीन सिक्वेंसिंग वर्तमान मनुष्यों के शरीर विज्ञान को कैसे प्रभावित करते हैं। ऐसा ही एक उदाहरण EPAS1 जीन का डेनिसोवन संस्करण है, जो उच्च ऊंचाई पर जीवित रहने के लिए लाभदायक साबित होता है। यह जीन तिब्बत के लोगों में पाया जाता है। एक अन्य उदाहरण निएंडरथल जीन हैं जो विभिन्न प्रकार के संक्रमणों के प्रति हमारी प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया को प्रभावित करते हैं।"

डीनएए हंटर के नाम से मशहूर हैं डॉ पाबो

डीनएए हंटर के नाम से मशहूर हैं डॉ पाबो

स्वांते पाबो को डीएनए हंटर यूं ही नहीं कहा जाता है। उन्होंने हजारों साल पहले विलुप्त हो चुके लोगों और आधुनिक मनुष्यों के बीच एक कड़ी का खुलासा किया है। डॉ. पाबो की शोध के परिणामस्वरूप एक नए वैज्ञानिक धारा का उदय हुआ है, जिसे पेलोजेनोमिक्स कहा जाता है, जिसमें प्राचीन या विलुप्त जीवों के जीन का अध्ययन और विश्लेषण किया जाता है। पाबो का रिसर्च ह्यूमन इवोल्यूशन और माइग्रेशन को बेहतर ढंग से समझने के लिए प्रभावी है। डॉ. पाबो का अभूतपूर्व शोध मानव विकास के बारे में सवालों के जवाब देने का प्रयास करता है।

साइबेरिया के गुफा में मिली हड्डी पर किया रिसर्च

साइबेरिया के गुफा में मिली हड्डी पर किया रिसर्च

उनके रिसर्च की वजह से निएंडरथल प्रजाति जो कि पृथ्वी पर मौजूद थी और लगभग 30,000 साल पहले विलुप्त हो गई थी उसकी सिक्वेंसिंग हो पाई है। पाबो ने ही समकालीन मनुष्यों और चिंपैंजी के साथ तुलना कर बताया कि निएंडरथल आनुवंशिक रूप से अलग थे। इसके साथ ही पाबो ने डेनिसोवा की भी खोज की है। डेनिसोवा एक एक विलुप्त होमिनिन है। होमिनिन भी मानव वंश के विलुप्त सदस्य हैं। पाबो ने साल 2008 में साइबेरिया की एक गुफा में 40,000 साल पाई गई उंगली की हड्डी से निकाले गए डीएनए से डेनिसोवन नामक एक पूर्व अज्ञात मानव प्रजाति के अस्तित्व का भी खुलासा किया था।

निएंडरथल से माइटोकॉन्ड्रियल डीएनए का किया अध्ययन

निएंडरथल से माइटोकॉन्ड्रियल डीएनए का किया अध्ययन

डॉ पाबो के शोध से यह मालूम चला कि लगभग 70,000 साल पहले अफ्रीका से प्रवास के बाद, विलुप्त डेनिसोवन से होमो सेपियंस में जीन का स्थानांतरण हुआ था। डॉ. पाबो को 1990 में म्यूनिख विश्वविद्यालय में प्रोफेसर के रूप में नियुक्त किया गया था। यहां उन्होंने निएंडरथल से माइटोकॉन्ड्रियल डीएनए का अध्ययन करने का फैसला किया। माइटोकॉन्ड्रिया, जिसे लोकप्रिय रूप से कोशिका का पावरहाउस कहा जाता है, कोशिका के अंदर का एक अंग है जिसका अपना डीएनए होता है। यद्यपि माइटोकॉन्ड्रियल जीनोम छोटा होता है और कोशिका में केवल आनुवंशिक जानकारी का एक अंश होता है, यह हजारों प्रतियों में मौजूद होता है। इससे इसके सफल अनुक्रमण की संभावना बढ़ जाती है।

निएंडरथल के बारे में हम क्या जानते हैं?

निएंडरथल के बारे में हम क्या जानते हैं?

निएंडरथल, वर्तमान मानव प्रजातियों के निकटतम रिश्तेदार हैं जो यूरोप और पश्चिम एशिया में रहते थे। रिसर्च के मुताबिक 30,000 साल पहले ये विलुप्त हो गए थे। जर्मनी में निएंडर की घाटी में आदिमानव की कुछ हड्डियां प्राप्त हुईं थीं, जिनके आधार पर इनका नाम निएंडरथल मानव रखा गया था। अभी तक की स्टडी से मिली जानकारी के मुताबिक इनकी लंबाई 4.5 से 5.5 फिट तक थी। शोध के मुताबिक इनके बालों का रंग काला और स्किन पीला था।

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English summary
Svante Paabo Sweden scientist Nobel Prize Medicine 2022 winner
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