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Sukhoi Su-57: चीन-PAK दिखा रहा स्टील्थ फाइटर जेट का दम, क्या 'हताश' भारत खरीदेगा रूसी विनाशक विमान?

Sukhoi Su-57: भारत के दोनों पड़ोसी दुश्मन देशों चीन और पाकिस्तान अपनी एयरफोर्स को एडवांस कर रहे हैं। चीन के पास जहां दो तरफ के पांचवीं पीढ़ी के फाइटर जेट हैं, वहीं पाकिस्तान ने इसी साल जनवरी में घोषणा की थी, कि वो चीन से पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान की खरीद करेगा।

जिसने भारत की चिंता बढ़ा दी है, क्योंकि पांचवीं पीढ़ी के फाइटर जेट के निर्माण की बात तो दूर, फिलहाल स्थिति ये बन गई है, कि इंडियन एयरफोर्स के पास 42 स्क्वॉर्डन होने चाहिए, लेकिन सिर्फ 32 स्क्वॉर्डन से ही काम चलाया जा रहा है।

su-57 fighter jet

पिछले दिनों भारत एक वायस एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने संकेतों में साफ तौर पर कहा था, कि 'आत्मनिर्भता को बढ़ावा देना अच्छी बात है, लेकिन सबसे पहले देश की सुरक्षा है।' उन्होंने कहा था, कि 'आत्मनिर्भरता देश की रक्षा की कीमत पर नहीं हो सकती है।'

उनके बयान से यही पता चलता है, कि लड़ाकू विमानों की कमी से वायुसेना भी परेशान है।

इस बीच रिपोर्ट है, कि भारत अपने खुद के एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (AMCA) के तैयार होने तक, इस कमी को पूरा करने के लिए रूसी Su-57 स्टील्थ फाइटर खरीदने की संभावना तलाश रहा है। भारत का पांचवीं पीढ़ी का फाइटर AMCA के, साल 2035 से पहले तक प्रोडक्शन में जाने की संभावना नहीं है।

जबकि इस बीच, चीन ने पहले ही 200 से ज्यादा J-20 स्टील्थ फाइटर जेट भारत की सीमा के काफी करीब तैनात कर दिए हैं।

दूसरी तरफ, रूस सक्रिय रूप से Su-57 को बेचने की कोशिश कर रहा है और भारत और रूस रक्षा संबंध कैसे रहे हैं, ये हम सब जानते हैं। रूस की सैन्य-तकनीकी सहयोग के लिए संघीय सेवा के डायरेक्टर ने पुष्टि की है, कि उन्हें विभिन्न देशों से इस फाइटर जेट के लिए अनुरोध प्राप्त हुए हैं। Su-57 पर पहले भारत ने भी विचार किया था, लेकिन इसके प्रदर्शन और स्टील्थ क्षमताओं के बारे में चिंताओं के कारण सौदे को रोक दिया गया।

भारत के सामने संभावित खतरे क्या हैं?

भारत को चीन के J-20 लड़ाकू विमानों और चीनी FC-31 फाइटर जेट, जिसे खरीदने की घोषणा पाकिस्तान ने इस साल जनवरी में की थी, उससे चिंता हो सकती है। ये घटनाक्रम भारत के लिए अपनी हवाई युद्ध क्षमताओं को बढ़ाने की तत्काल जरूरत को रेखांकित करते हैं।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, भारत ने चूंकी रूस से एस-400 मिसाइल एयर डिफेंस खरीद लिया है, इसलिए अमेरिका अब F-35 लाइटनिंग II पांचवी पीढ़ी के स्टील्थ लड़ाकू विमान बेचने के लिए तैयार नहीं हो रहा है, जिसकी वजह से भारत के सामने Su-57 एक व्यवहार्य विकल्प के रूप में उभरता है।

Su-57 में हाल ही में किए गए सुधार इसे और भी आकर्षक और खतरनाक बनाते हैं। एडवांस इंजन, बेहतर स्टील्थ सुविधाएं और स्टील्थ मानवरहित लड़ाकू हवाई वाहनों को तैनात करने की क्षमता, इसे एक विनाशक फाइटर जेट बना देती है। हालांकि, इसके बावजूद, भारत के रक्षा मंत्रालय ने अभी तक Su-57 को खरीदने में दिलचस्पी नहीं दिखाई है।

su-57 fighter jet

इंडियन एयरफोर्स को तत्काल मजबूत करने की जरूरत

रूस की सरकार Su-57 के निर्यात के लिए उत्सुक है और कई विदेशी देशों से रूस से इस फाइटर जेट के बारे में जानकारियां मांगी हैं। यह दिलचस्पी विमान की बढ़ती प्रतिष्ठा को दर्शाती है, भले ही इसकी क्षमताओं के बारे में पहले चिंताएं थीं। भारत के लिए, इन लड़ाकू विमानों को हासिल करना उसके स्वदेशी AMCA कार्यक्रम के फाइनल होने की प्रतीक्षा करते समय रणनीतिक लाभ प्रदान कर सकता है।

AMCA, भारत का पांचवी पीढ़ी का फाइटर जेट कार्यक्रम है, जिसकी डिजाइन को इस साल मार्च में भारत सरकार ने मंजूरी दी है, लेकिन इस फाइटर जेट के डेवलपमेंट और टेस्टिंग में अभी कई सालों का वक्त लगेगा। ऐसी उम्मीद है, कि इसे बनने में कम से कम 10 सालों का वक्त लग सकता है।

लेकिन चीन और पाकिस्तान ने भारत पर दबाव बढ़ा दिया है।

AMCA के डेवलपमेंट में देरी से भारत पर अंतरिम समाधान खोजने का दबाव बढ़ गया है। भारत को अब हर हाल में पांचवीं पीढ़ी का लड़ाकू विमान खरीदना होगा, ताकि चीन और पाकिस्तान की तरफ से आने वाले किसी भी खतरे को काउंटर किया जा सके। लिहाजा Su-57 पड़ोसी देशों के सैन्य प्रगति के साथ समानता बनाए रखने के लिए एक अस्थायी उपाय के रूप में काम कर सकता है।

हालांकि, रूसी फाइटर जेट खरीदना उतना आसान नहीं होगा। जियो-पॉलिटिकल अड़चनें भारत के रास्ते में बड़ी बाधा बन सकती है। रूस के साथ भारत के मजबूत संबंधों के कारण F-35 जैसे एडवांस लड़ाकू विमानों को बेचने में अमेरिका की अनिच्छा ने नई दिल्ली के विकल्पों को सीमित कर दिया है। नतीजतन, Su-57 के लिए रूस की ओर रुख करना भारत के लिए डिप्लोमेटिक परेशानियां बढ़ा सकता है।

कुल मिलाकर भारत ने अभी तक आधिकारिक तौर पर Su-57 पर सोच को आगे नहीं बढ़ाया है, लेकिन मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए यह एक मजबूत उम्मीदवार बना हुआ है। एडवांस लड़ाकू विमानों की आवश्यकता दबावपूर्ण है, और सीमित विकल्पों के साथ और पड़ोसियों के खतरनाक मंसूबे को देखते हुए आगे जाकर भारत इसे एक विकल्प के तौर पर आजमा सकता है।

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