इजराइल में हथियारों और गोला-बारूद का जमा हुआ भंडार, अमेरिका-जर्मनी ने मदद में अबतक क्या-क्या भेजा?
इजराइल पर फिलिस्तीनी मुस्लिम आतंकी संगठन हमास के हमले के कुछ ही घंटों बाद अमेरिका ने मध्य-पूर्व में अपने इस बेहद खास सहयोगी के साथ संकट के समय में चट्टान की तरह खड़े रहने का वादा किया था।
अमेरिका ने जिस तरह से इजराइल की मदद के लिए अन्य मानवीय सहायता के अलावा सैन्य सहायता उपलब्ध करानी शुरू की है, उसकी लंबी लिस्ट है। अमेरिका के साथ-साथ जर्मनी ने भी हमास के खिलाफ इस जंग में इजराइल को सैन्य सहायता उपलब्ध कराना शुरू कर दिया है।

अमेरिका-जर्मनी दे रहा है इजराइल को सैन्य मदद
अमेरिका ने बिना समय गंवाए अपने विमानवाहक जहाजों, फाइटर जेट और अन्य सैन्य विमानों को किसी भी चुनौती का सामना करने के लिए उसके क्षेत्र के नजदीक तैनात कर दिया है। इजराइल के अपने 3 लाख जवान गाजा पट्टी के पास तैनात हैं, जो हमास को मिटाने का संकल्प लेकर मोर्चे पर डटे हुए हैं और किसी भी समय ग्राउंड ऑपरेशन शुरू कर सकते हैं।
अमेरिकी डिफेंस कार्गो एटरक्राफ्ट इजराइल पहुंच चुका है
जाहिर है कि जमीनी अटैक शुरू होने के साथ ही इजराइल को गोला-बारूद, तमाम तरह के हथियारों, उसकी गोलियां, विमान, सैन्य हेलीकॉप्टर, रॉकेट और मिसाइलों की आवश्यकता बढ़ेगी। अमेरिका का एक डिफेंस कार्गो हवाई जहाज पहले ही इजराइल में लैंड कर चुका है।
अमेरिका ने दिया है सुरक्षा में मदद का भरोसा
इससे पहले अमेरिका ने इजराइल को हवाई, समुद्री सुरक्षा देने और हथियारों की भी पूर्ण मदद का भरोसा दिया है। वहीं जर्मीनी भी इस युद्ध के लिए कारगर माने जाने वाले छोटे हथियारों की कमी नहीं रहने देने और विशेष ड्रोन की सहायता देने का विश्वास दिला चुका है।
आयरन डोम एयर डिफेंस सिस्टम के लिए अमेरिका दे रहा है इंटरसेप्टर मिसाइलें
इजराइल को अपने आयरन डोम एयर डिफेंस सिस्टम के लिए मिसाइलों की सबसे अधिक जरूरत है और ऐसे समय में अमेरिका बड़ी संख्या में इंटरसेप्टर मिसाइलें उपलब्ध कराकर उसका हौसला बढ़ाए हुए है। हमास के रॉकेट से बचाव में इजराइल का यही आयरन डोम एयर डिफेंस सिस्टम बेहतर काम कर रहा है। यह सिस्टम लेबनान से होने वाले मिसाइलों और रॉकेट अटैक का भी तोड़ है।
इनके अलावा जो अमेरिकी हथियार इजराइल में मौजूद हैं, उनमें करीबी जंग के लिए अहम माने जाने वाले हल्के और छोटे हथियार, स्नाइपर राइफल, एंटी टैंक मिसाइलें और बम और गोला-बारूद भी महत्वपूर्ण हैं।
इजराइल के सैनिकों को अभी जमीनी लड़ाई के लिए मोर्चा संभालनी है। इसलिए उन्हें छोटे हथियारों की बहुत ज्यादा आवश्यकता है। ऐसे समय में अमेरिका और जर्मनी से मिल रही मदद उसके लिए बड़े काम के साबित हो रहे हैं। अमेरिका अपने सैन्य मालवाहक विमान से इंटरसेप्टर मिसाइलों के अलावा पैट्रियट मिसाइलों और छोटे हथियारों का भी बड़ा भंडार पहले ही इजराइल में उतार चुका है।
भूमध्यसागर में अमेरिका भेज चुका है दो विमानवाहक जहाज
इससे पहले हमास के हमले के बाद ही अमेरिका ने भूमध्यसागर में इजराइल के पास ही दो स्ट्राइक ग्रुप को स्टैंडबाय पर रख दिया है। उसने विश्व का सबसे विशाल विमानवाहक यूएसएस गेराल्ड आर फोर्ड इजराइल की मदद के लिए वहां भेजा है। इसके अलावा उसने यूएसएस जॉर्ज वाशिंगटन भी उसकी सेवा में लगा रखा है।
इन दोनों नेवल स्ट्राइक ग्रुप का मतलब है कि करीब 5000 अमेरिकी नौसैनिक और दर्जनों लड़ाकू विमान एक इशारे पर इजराइल की रक्षा के लिए दुश्मनों पर कहर बरपा सकते हैं। इस तरह से अमेरिकी नौसेना इजराइल पर होने वाले किसी भी दूसरे देश को जवाब देने में पूरी तरह से सक्षम है।
जर्मनी इजराइल में पहले से जर्मन सैन्यकर्मियों की ट्रेनिंग के लिए मौजूद अपने पांच हेरोन टीपी जंगी ड्रोन में से 2 को इजराइल के इस्तेमाल के लिए देने पर सहमत हो गया है। इनकी मदद से इजराइल अपनी सीमाओं की चौकसी बढ़ा सकेगा। यह ड्रोन आतंकवादियों को खोजकर उनको खत्म करने में भी सक्षम हैं।
इसके अलावा भी जर्मनी ने इजराइल की जरूरतों के हिसाब से हथियारों की पूरी खेप मदद के रूप में भेजने की सहमति दी है। उसने विमानों के माध्यम से हथियार भेजने की बात कही है।












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